देशभर में रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने की आखिरी तारीख नजदीक आ चुकी है। क्या 23 अगस्त 2026 के बाद इंडेन, एचपी और भारत गैस के कनेक्शन कट जाएंगे या इस समय सीमा को एक बार फिर आगे बढ़ाया जाएगा, इसे लेकर उपभोक्ताओं में चर्चा तेज हो गई है। पूर्व में इस प्रक्रिया को पूरा करने की अंतिम तिथि 16 अगस्त तय की गई थी, जिसे उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाया गया था। 23 अगस्त 2026 को रविवार का दिन है, ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या इस डेडलाइन में फिर से कोई विस्तार किया जाता है या नहीं।
ई-केवाईसी की अनिवार्यता और अब तक की पेंडेंसी
सोलह अगस्त की पिछली समय सीमा से पहले विभिन्न राज्यों से सामने आए आंकड़ों ने यह साफ कर दिया था कि बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी प्रक्रिया पूरी नहीं की थी। उदाहरण के तौर पर पुणे जिले में लगभग 6 लाख घरेलू एलपीजी ग्राहकों में से करीब 4.80 लाख ने ई-केवाईसी नहीं कराई थी। इनमें से 1.25 लाख से अधिक ऐसे उपभोक्ता थे जिन्होंने अस्थायी निलंबन का सामना करने के बाद अपना पंजीकरण पूरा किया था। इसी तरह अमृतसर में 3.5 लाख और गाजियाबाद में 2 लाख ई-केवाईसी पेंडिंग होने की बात सामने आई थी, जबकि राजस्थान में लगभग 38 लाख उपभोक्ता इस प्रक्रिया से बाहर थे।
अंतिम समय की भीड़ और तकनीकी दिक्कतें
डेडलाइन बढ़ाए जाने के बाद से पेंडिंग ई-केवाईसी का कोई नया और आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि अंतिम तारीख से ठीक पहले एलपीजी वित बालकों और एजेंसियों के यहां भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। भारी ट्रैफिक और अंतिम समय के दबाव के कारण ऑनलाइन पोर्टल्स पर भी कई उपभोक्ताओं को तकनीकी गड़बड़ियों और रुकावटों का सामना करना पड़ा था। इसी आखिरी समय की पैनिक और भीड़भाड़ के कारण 16 अगस्त की डेडलाइन को आगे बढ़ाया गया था। वर्तमान में 23 अगस्त की इस समय सीमा को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की स्थिति
यह बात ध्यान देने योग्य है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत आने वाले लाभार्थियों के लिए 23 अगस्त की यह समय सीमा तकनीकी रूप से उतनी महत्वपूर्ण नहीं है। इसकी वजह यह है कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए मिलने वाले लाभ को जारी रखने के लिए हर वित्तीय वर्ष में एक बार ई-केवाईसी करानी होती है। पश्चिम एशिया के संघर्ष के बाद से इस योजना में कुछ अहम बदलाव भी किए गए हैं। इसके तहत पात्र उपभोक्ताओं को एलपीजी रिफिल पर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती है, और उन्हें इस साल से 9 रिफिल के बजाय 4 एलपीजी रिफिल प्रदान किए जा रहे हैं।
गैर-उज्ज्वला उपभोक्ताओं के लिए कड़े नियम
यह 23 अगस्त की समय सीमा मुख्य रूप से गैर-उज्ज्वला (non-PMUY) उपभोक्ताओं के लिए तय की गई है। मार्च 2026 के नियमों के अनुसार, ऑयल मिनिस्ट्री ने स्पष्ट किया था कि जिन गैर-उज्ज्वला ग्राहकों ने अब तक ई-केवाईसी नहीं कराई है, उनके लिए यह प्रक्रिया अनिवार्य है। यह एक बार की प्रक्रिया है, इसलिए यदि आप पहले ही अपनी ई-केवाईसी पूरी कर चुके हैं, तो आपको इस तारीख को लेकर परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन जिन लोगों ने अब तक इसे पूरा नहीं किया है, उन्हें इस रविवार तक अपनी प्रक्रिया जरूर पूरी कर लेनी चाहिए ताकि किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके।
कनेक्शन निलंबन और कमर्शियल दरों का खतरा
यदि उपभोक्ता अगस्त की तय समय सीमा के भीतर ई-केवाईसी पूरी नहीं करते हैं, तो उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। बीपीसीएल के नोटिस के संकेतों के अनुसार, प्रक्रिया पूरी होने तक एलपीजी सिलेंडर कनेक्शन को अस्थायी रूप से निलंबित (temporarily suspended) किया जा सकता है, हालांकि कनेक्शन पूरी तरह से रद्द नहीं होगा। इसके अलावा, इंडियन ऑयल के संदेशों में पहले यह बात कही जा चुकी है कि प्रक्रिया पूरी न होने पर ग्राहकों को घरेलू दरों पर सिलेंडर मिलने की पात्रता खत्म हो सकती है। कई रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ऐसे उपभोक्ताओं को डोमेस्टिक एलपीजी सिलेंडर कमर्शियल दरों पर खरीदने पड़ सकते हैं।
घरेलू और कमर्शियल कीमतों का भारी अंतर
वर्तमान बाजार दरों पर नजर डालें तो दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले इंडेन गैस एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये, कोलकाता में 968 रुपये, मुंबई में 941.50 रुपये और चेन्नई में 957.50 रुपये है। इसके मुकाबले अगस्त महीने में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की दरें काफी अधिक हैं। कमर्शियल सिलेंडर दिल्ली में 2,738 रुपये, मुंबई में 2,691.50 रुपये, कोलकाता में 2,872.50 रुपये और चेन्नई में 2,906 रुपये प्रति सिलेंडर पर चल रहे हैं। यदि किसी उपभोक्ता को घरेलू सब्सिडी वाली दरें नहीं मिलती हैं और उसे कमर्शियल रेट चुकाना पड़े, तो दिल्ली में उसे प्रति सिलेंडर 1,796 रुपये (2,738 रुपये - 942 रुपये) का भारी भरकम अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है। इसी तरह का वित्तीय अंतर अन्य राज्यों में भी देखने को मिल सकता है।
क्या करें उपभोक्ता
चूंकि ये तमाम जानकारियां मीडिया रिपोर्ट्स और मौजूदा नियमों पर आधारित हैं, इसलिए यह सलाह दी जाती है कि किसी भी असमंजस से बचने के लिए उपभोक्ता सीधे अपने एलपीजी वितरक या संबंधित तेल कंपनियों से संपर्क करें। ताकि उन्हें अपनी ई-केवाईसी स्थिति और संभावित परिणामों के बारे में सटीक और ताजा अपडेट मिल सके।
यदि आपको अपने ब्राउज़र में किसी वेबसाइट के नोटिफ़िकेशन से जुड़ी सेटिंग्स को बदलना हो, तो आप आसानी से कुछ आसान स्टेप्स फॉलो कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले ब्राउज़र के मेनू आइकन पर क्लिक करें और विकल्पों की सूची में से सेटिंग्स या ऑप्शंस पेज पर जाएं। इसके बाद बाईं ओर दिए गए प्राइवेसी एंड सिक्योरिटी विकल्प पर क्लिक करें और परमिशन सेक्शन तक नीचे स्क्रॉल करें। यहां नोटिफ़िकेशन विकल्प के सेटिंग्स टैब पर क्लिक करें, जिससे एक पॉप-अप खुलेगा जिसमें सभी सूचियों में से संबंधित साइट के स्टेटस हेड के तहत एलाऊ (ALLOW) विकल्प को चुनें और अपने बदलावों को सेव कर लें।



















