उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के अंतर्गत आने वाले फुलवाड़ी-खाईधार गांव के स्थानीय निवासी पिछले लंबे समय से सड़क सुविधा की बहाली और निर्माण की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। बुनियादी जरूरत पूरी न होने के कारण ग्रामीणों में शासन और प्रशासन के रवैये के खिलाफ गहरा रोष पनप रहा है। इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों ने अपने ही क्षेत्र में अनिश्चितकालीन प्रदर्शन का रास्ता चुना है और वे बीते 31 दिनों से लगातार धरने पर बैठे हुए हैं।
गांव के निवासी और पूर्व कैप्टन रतन देव ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार की ओर से सड़क निर्माण को लेकर कोई संतोषजनक और ठोस आश्वासन नहीं मिल जाता, तब तक यह धरना किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों का यह आंदोलन किसी राजनीतिक फायदे के लिए नहीं है, बल्कि यह उनकी मूलभूत और दैनिक जीवन से जुड़ी जरूरत को पूरा कराने की एक ईमानदार कोशिश है।
बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष
सड़क मार्ग न होने की वजह से इस पूरे इलाके के लोगों को अपने रोजमर्रा के जरूरी कामों को पूरा करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी ज्योति दानू ने इस बात पर जोर दिया कि सड़क के अभाव ने स्वास्थ्य सेवाओं, बच्चों की शिक्षा और सुगम आवागमन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस असुविधा का सबसे बुरा असर बीमार लोगों, बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे-छोटे स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है।
गांव में किसी व्यक्ति के अचानक बीमार पड़ने या किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति पैदा होने पर मरीज को अस्पताल तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसी परिस्थितियों में लोगों को पारंपरिक पैदल रास्तों का ही एकमात्र सहारा बचता है, जो हर समय उपलब्ध या सुरक्षित नहीं होते हैं।
बरसात के मौसम में बढ़ती हैं मुश्किलें
पैदल रास्तों के भरोसे जीवन जीने वाले स्कूली बच्चों को रोजाना स्कूल आने-जाने के दौरान बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। बरसात का मौसम शुरू होते ही हालात और भी ज्यादा भयावह और जोखिम भरे हो जाते हैं। इन रास्तों पर भारी फिसलन और जगह-जगह पानी भर जाने के कारण आवाजाही करना जान जोखिम में डालने जैसा हो जाता है।
क्षेत्र के विकास के नजरिए से इस मार्ग के महत्व को समझाते हुए पूर्व विधायक शेर सिंह गढ़िया ने बताया कि फुलवाड़ी-खाईधार सड़क इस इलाके के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस सड़क के बन जाने से गांवों को मुख्य मार्ग से बेहतर और सुगम कनेक्टिविटी मिल सकेगी, जिससे लोगों को नजदीकी बाजारों, अस्पतालों, विद्यालयों और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में बहुत आसानी होगी।
प्रशासन का पक्ष और कागजी कार्रवाई
ग्रामीणों ने अपनी इस समस्या को लेकर पहले भी कई बार संबंधित विभागों के अधिकारियों और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी बात रखी थी, लेकिन इसके बावजूद आज तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। अधिकारियों की तरफ से लगातार मिल रहे आश्वासन और जमीनी स्तर पर कोई ठोस परिणाम न दिखने के कारण ही ग्रामीणों को इस कड़े आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा।
जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिलाधिकारी अपूर्वा पांडे ने बताया कि सड़क निर्माण से जुड़ी कागजी प्रक्रिया इस समय तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। इस महत्वपूर्ण सड़क मार्ग के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करके भारत सरकार के पास स्वीकृति के लिए भेज दी गई है।
इसके साथ ही सड़क के निर्माण कार्य की जिम्मेदारी पीएमजेएसवाई को सौंपी गई है और वन विभाग से जुड़ी आपत्तियों तथा वन प्रस्ताव के संबंध में भी लगातार उच्च स्तर पर बातचीत जारी है। प्रशासन की तरफ से सड़क निर्माण से जुड़ी हर एक कार्रवाई पर लगातार नजर रखी जा रही है और इसका नियमित फॉलोअप किया जा रहा है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन ग्रामीणों के इस संघर्ष में उनके साथ है और क्षेत्र के लोगों को सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।



















