ईंधन खुदरा बिक्री से जुड़े कारोबारियों ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर लगने वाले प्रस्तावित नए शुल्कों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। मध्य प्रदेश भर में संचालित पेट्रोल और डीजल आउटलेट संचालकों ने एलान किया है कि वे आगामी 16 अक्टूबर की तारीख से 2,000 रुपये से ऊपर के किसी भी यूपीआई लेनदेन को स्वीकार नहीं करेंगे। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक मूल्य के व्यापारिक लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लगाया जाना तय किया गया है। यद्यपि नियमों के अनुसार यह भार सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की जेब पर नहीं डाला जाएगा बल्कि व्यापारियों द्वारा वहन किया जाएगा, फिर भी ईंधन श्रेणी में 2,000 रुपये से अधिक की ईंधन व सीएनजी बिक्री पर 5 रुपये का तय शुल्क लागू करने की बात सामने आई है। इस वित्तीय बोझ के विरोध में देश के कई क्षेत्रों में असंतोष उभर रहा है।
मुनाफे में सेंध और मासिक वित्तीय नुकसान की दलील
मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि अजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यदि हुकूमत ने इस शुल्क व्यवस्था को वापस नहीं लिया, तो उनके संगठन के सदस्य तय तारीख से बड़ा डिजिटल भुगतान लेना रोक देंगे। उन्होंने व्यवसाय पर पड़ने वाले वित्तीय असर का विवरण देते हुए कहा, "नई व्यवस्था के तहत एक पेट्रोल पंप को हर महीने करीब 17,700 रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा।" सिंह ने आगे समझाया कि पूरे राज्य के भीतर कुल 4,700 आउटलेट कार्यरत हैं। उन्होंने जोर दिया कि ईंधन खुदरा व्यापार का कमीशन दायरा पहले से ही बेहद सीमित है, जिसके चलते विक्रेता इस तरह के अतिरिक्त खर्चे को अपनी जेब से उठाने की स्थिति में नहीं हैं।
व्यापारी महासंघ ने जताई चिंता
खुदरा कारोबारियों की प्रमुख संस्था कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने इस कदम को डिजिटल लेन-देन के व्यापक विस्तार के लिए गंभीर चुनौती करार दिया है। संस्था की भोपाल इकाई के प्रमुख एवं राज्य के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र शर्मा ने शुक्रवार को रेखांकित किया कि डीलरों के इस फैसले से सूबे के लगभग 4,700 बिक्री केंद्र सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। उन्होंने मामले को डिजिटल कॉमर्स पर थोपे जा रहे प्रस्तावित एमडीआर से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।
डिजिटल अर्थव्यवस्था के लक्ष्यों पर असर की आशंका
धर्मेंद्र शर्मा का कहना है कि वर्षों से यूपीआई तकनीक को बिना नकदी वाली अर्थव्यवस्था, पारदर्शी व्यापार मॉडल और डिजिटल इंडिया की रीढ़ के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसके बावजूद अब प्रस्तावित एमडीआर ढांचे ने खुदरा क्षेत्र के मन में कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने शुल्क के गणित को स्पष्ट करते हुए रेखांकित किया कि आम व्यापारिक लेनदेन में 10,000 रुपये के भुगतान पर 40 रुपये की चपत लगेगी। वहीं ईंधन भरवाने के संबंध में 2,000 रुपये से अधिक के हर भुगतान पर 5 रुपये का तय एमडीआर प्रभावी होना प्रस्तावित है, जिससे आउटलेट संचालकों की कार्यशील पूंजी पर लगातार दबाव बढ़ेगा।


















