किसानों की आमदनी को दोगुना करने के बड़े सरकारी विजन को अमलीजामा पहनाने के लिए उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र में नए प्रयोग तेजी से किए जा रहे हैं। खेती को ज्यादा से ज्यादा मुनाफे का सौदा बनाने की इसी कड़ी में मशरूम की खेती को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। हाल ही में इसी सिलसिले में एक निजी विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और डायरेक्टर शालिनी सिंह बिसेन ने राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच मशरूम उत्पादन से जुड़ी वर्तमान पहलों और भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रयास
शालिनी उत्तर प्रदेश सरकार के साथ कंधे से कंधا मिलाकर किसानों की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए लगातार सक्रिय हैं। उनके प्रयासों का मुख्य केंद्र मशरूम की खेती को जमीनी स्तर पर लोकप्रिय बनाना है। इस पूरी मुहिम में राज्य सरकार का पूरा सहयोग मिल रहा है और विभिन्न प्रोजेक्ट्स के संचालन तथा किसान प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए आपसी समन्वय के साथ काम किया जा रहा है ताकि तय समय में किसानों की आय को दोगुना किया जा सके।
कम लागत और सीमित जगह में बंपर पैदावार
शालिनी सिंह बिसेन के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से प्रदेशभर के किसानों को आधुनिक मशरूम खेती और उससे तैयार होने वाले उत्पादों की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जा रही है। उनका साफ कहना है कि मशरूम उगाने के लिए विशाल खेतों या एकड़ जमीन की कोई आवश्यकता नहीं होती। इस फसल का उत्पादन बेहद सीमित स्थान पर या फिर घर के बंद कमरों के भीतर भी बहुत आसानी से किया जा सकता है।
लखनऊ के पास बनेगा नया ट्रेनिंग सेंटर
घरों के अंदर मशरूम उगाने की इस तकनीक में शुरुआती लागत महज 15 से 20 हजार रुपये तक आती है। हालांकि इससे होने वाला शुद्ध मुनाफा पूरी तरह से मशरूम की किस्म, कुल उत्पादन क्षमता, बाजार की मांग और प्रोसेसिंग पर निर्भर करता है। यह पूरा प्रोजेक्ट उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सौंपा गया है और वह साल 2024 से इस पर पूरी तन्मयता से काम कर रही हैं। उनकी योजना लखनऊ के आसपास एक समर्पित मशरूम उत्पादन सेंटर स्थापित करने की है, जहां किसानों को बिल्कुल मुफ्त प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मूल्यवर्धित उत्पादों से बढ़ेगा मुनाफा
सरकार सिर्फ कच्चा मशरूम उगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को मशरूम से विभिन्न प्रकार के वैल्यू एडेड यानी मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। राज्य सरकार के उद्यान विभाग की मदद से एक निजी विश्वविद्यालय परिसर के भीतर ही विशेष लैब और ट्रेनिंग रूम तैयार किए गए हैं। इन स्थानों पर मशरूम से लड्डू, नमकीन और कई अन्य खाद्य पदार्थ बनाए जा रहे हैं। इन अनूठे उत्पादों से न केवल आम उपभोक्ताओं की सेहत को सीधा फायदा मिलेगा, बल्कि अन्नदाताओं को उनकी मूल लागत का दोगुना या तीन गुना तक मुनाफा आसानी से मिल सकेगा।



















