संयुक्त राज्य अमेरिका में लगातार बढ़ती कीमतों ने केंद्रीय बैंकिंग तंत्र को सतर्क रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। फेडरल रिजर्व ने अपनी दो दिवसीय मौद्रिक नीति बैठक के समापन पर ब्याज दरों में कोई फेरबदल न करने का फैसला लिया, जिससे प्रमुख नीतिगत दर लगभग 3.9% पर यथावत बनी हुई है। हालांकि नीति निर्धारकों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मूल्य वृद्धि की रफ्तार अभी भी तय सीमा से ऊपर बनी हुई है। इस रुख के कारण आने वाले महीनों में उधारी लागत और बढ़ने की आशंका पूरी तरह बरकरार है, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए घर, ऑटोमोबाइल और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी वित्तीय देनदारियां महंगी बनी रह सकती हैं।
केंद्रीय बैंक का 2 प्रतिशत का लक्ष्य और भावी रणनीति
फेडरल रिजर्व अपने दीर्घकालिक लक्ष्य के तहत महंगाई को 2% के दायरे में सीमित करना चाहता है। बुधवार को बैठक पूरी होने के बाद जारी किए गए बयान में अधिकारियों ने कहा कि मुद्रास्फीति अब भी असहज स्तर पर टिकी है। ब्याज दरों में तात्कालिक बदलाव न करने का मकसद नीति निर्माताओं को आगामी आर्थिक आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए अतिरिक्त समय उपलब्ध कराना है। इन नए आंकड़ों की समीक्षा के बाद ही बैंक अपनी अगली नीतिगत दिशा तय करेगा। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने फेड ने तीन साल की अवधि में पहली बार अपनी प्रमुख ब्याज दर में बढ़ोतरी की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दरों को घटाने की लगातार मांग की जा रही है, लेकिन केंद्रीय बैंक ने महंगाई को काबू में लाने के उद्देश्य से सख्त मौद्रिक अनुशासन बनाए रखने का रास्ता चुना है।
नीति निर्माताओं में मतभेद और दिसंबर के संकेत
केंद्रीय बैंक के ताजा बयान में भविष्य के कदमों को लेकर कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है। इसके बावजूद पिछले महीने अधिकारियों ने इस वर्ष के दौरान दरों में एक और वृद्धि की संभावना जताई थी। वायदा बाजार में सक्रिय वित्तीय निवेशक भी इस बात के स्पष्ट संकेत देख रहे हैं कि दिसंबर में ब्याज दरों में एक और इजाफा देखने को मिल सकता है। बुधवार के मतदान के दौरान फेड के दो सदस्यों ने नीतिगत दरों में 0.25 प्रतिशत अंक की तत्काल बढ़ोतरी के पक्ष में वोट दिया। इस आंतरिक असहमति से साफ जाहिर होता है कि बैंक के भीतर भी लगातार बनी हुई महंगाई को लेकर गंभीर चिंताएं मौजूद हैं।
सितंबर में महंगाई के आंकड़े और खर्च का दबाव
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सितंबर महीने के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 3.7% बढ़ गया। इसकी तुलना में फरवरी महीने में यह आंकड़ा 2.4% दर्ज किया गया था। अगस्त और सितंबर दोनों ही महीनों में मासिक उपभोक्ता कीमतें 0.3% की रफ्तार से बढ़ीं, जो केंद्रीय बैंक के 2% के निर्धारित लक्ष्य से काफी ऊपर है। इसके अतिरिक्त, फेडरल रिजर्व जिस दूसरे प्रमुख मुद्रास्फीति सूचकांक का गहराई से आकलन करता है, उसमें सितंबर के दौरान सालाना आधार पर 3.6% की बढ़ोतरी का अनुमान व्यक्त किया गया है। बाजार में ऊर्जा की ऊंची कीमतों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े बुनियादी ढांचे पर कंपनियों द्वारा किया जा रहा भारी निवेश भी कीमतों पर निरंतर दबाव बना रहा है।
ऋण लागत और मजबूत रोजगार बाजार का संतुलन
ब्याज दरों का ऊंचा स्तर बना रहने से व्यक्तिगत वित्त पर सीधा असर पड़ता है। विशेष रूप से होम लोन, कार ऋण और क्रेडिट कार्ड के बकाए पर ब्याज का बोझ बढ़ जाता है। अमेरिका में 30 साल की अवधि वाले आवास ऋण की औसत ब्याज दर इस महीने की शुरुआत में उछलकर 7.4% के स्तर पर पहुंच गई थी, जो तीन साल का उच्चतम स्तर है, यद्यपि बाद के दिनों में इसमें मामूली नरमी दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ व्यापक अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूती का प्रदर्शन कर रही है और देश में बेरोजगारी दर 4.2% पर स्थिर है। फेडरल रिजर्व के सामने सबसे जटिल चुनौती यह है कि रोजगार और आर्थिक विकास की रफ्तार को चोट पहुंचाए बिना मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण स्थापित किया जाए। आने वाले हफ्तों में जारी होने वाले नए आर्थिक आंकड़े ही तय करेंगे कि दिसंबर में दरें बढ़ाई जाएंगी या उन्हें स्थिर रखा जाएगा।















