घरेलू बाजार में भारी हलचल भरे सप्ताह के बाद चांदी की कीमतों में स्थिरता दर्ज की गई है। 16 फरवरी से 21 फरवरी के दौरान सफेद धातु में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया, जहां शुरुआत में मुनाफावसूली और शॉर्ट-टर्म बिकवाली के दबाव में कीमतें तेजी से नीचे आईं, लेकिन हफ्ते के दूसरे हिस्से में निवेशकों की वापसी से बाजार ने अपनी पूरी गिरावट की भरपाई कर ली। रविवार, 22 फरवरी 2026 को बाजार में कोई दैनिक बदलाव नहीं हुआ और कीमतें पिछले कारोबारी सत्र के स्तर पर टिकी रहीं।
बाजार में विभिन्न वजन श्रेणियों के ताजा खुदरा भाव
रविवार को खुदरा स्तर पर चांदी की दरें पूरी तरह सपाट रहीं। 22 फरवरी 2026 को 1 ग्राम चांदी का भाव 275 रुपये दर्ज किया गया, जिसमें पिछले सत्र के मुकाबले कोई बदलाव नहीं हुआ। छोटी मात्रा में खरीदारी करने वालों के लिए 8 ग्राम चांदी की कीमत 2,200 रुपये रही, जबकि 10 ग्राम चांदी 2,750 रुपये के स्तर पर बिकी। दोनों ही वर्ग में पिछले दिन की तुलना में दरें जस की तस बनी रहीं।
वहीं 100 ग्राम चांदी की दर 27,500 रुपये पर स्थिर रही। थोक और बड़े खरीदारों के लिए प्रति किलोग्राम के आधार पर सफेद धातु 2,75,000 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही थी। शनिवार के मुकाबले रविवार को किसी भी वजन श्रेणी में कोई अंतर नहीं देखा गया, जो हालिया तेज उतार-चढ़ाव के बाद बाजार में एक संक्षिप्त ठहराव को दर्शाता है।
सप्ताह के दौरान 20,000 रुपये प्रति किलो का भारी उतार-चढ़ाव
बीते हफ्ते 16 फरवरी से 21 फरवरी के बीच बाजार ने अत्यधिक अस्थिरता का सामना किया। सप्ताह की शुरुआत में कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जब मुनाफावसूली और अल्पकालिक बिकवाली के दबाव के कारण चांदी करीब 20,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक टूट गई। इस तेज गिरावट ने चांदी को हफ्ते के निचले स्तर लगभग 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक धकेल दिया था।
हालांकि सप्ताह के दूसरे हिस्से में बाजार की धारणा में जोरदार सुधार हुआ। वैश्विक अनिश्चितता और नए सिरे से बढ़ी खरीदारी के चलते चांदी ने शानदार वापसी की और लगभग 20,000 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़त हासिल की। इस रिकवरी की बदौलत धातु हफ्ते के अंत तक फिर से 2,75,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंचने में सफल रही। कैलेंडर के हिसाब से 16 फरवरी से 18 फरवरी के बीच कीमतें कमजोर रहीं, जबकि 19 फरवरी से जोरदार तेजी की शुरुआत हुई। इसके बाद 20 फरवरी और 21 फरवरी को भाव मजबूत बने रहे और अंततः 22 फरवरी को ऊंचे स्तरों पर स्थिर हो गए।
डॉलर में कमजोरी, कानूनी झटका और भू-राजनीतिक तनाव का असर
इस सप्ताह चांदी में अस्थिरता बढ़ने के पीछे कई वैश्विक कारक जिम्मेदार रहे। ग्लोबल टैरिफ के खिलाफ अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद अमेरिकी डॉलर में नरमी आई, जिसने सफेद धातु की सुरक्षित निवेश और औद्योगिक अपील दोनों को मजबूती दी। व्हाइट हाउस के लिए इस कानूनी झटके और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के संयोजन ने बाजार में जोखिम प्रीमियम को फिर से बढ़ा दिया, जिससे चांदी की अस्थिरता और तेज हो गई।
केंद्रीय बैंकों के रुख और औद्योगिक मांग पर भविष्य का परिदृश्य
विशेषज्ञों के मुताबिक गिरती वास्तविक ब्याज दरें, कमजोर अमेरिकी डॉलर और प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक नरमी की दिशा में स्पष्ट झुकाव आगे भी चांदी की कीमतों में तेजी ला सकता है। वीटी मार्केट्स के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड रॉस मैक्सवेल के अनुसार, सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिफिकेशन से आने वाली औद्योगिक मांग भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
रॉस मैक्सवेल ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में यह मांग विस्फोटक होने के बजाय स्थिर बनी हुई है। इसके साथ ही मौजूदा भंडार और रीसाइक्लिंग प्रवाह कीमतों में आने वाले अत्यधिक उछाल को सीमित रखने का काम कर सकते हैं, जिससे लंबी अवधि में आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बना रह सकता है।

















