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मानसून में गाय-भैंस का दूध नहीं होगा कम, पशुओं को खुर सड़न की दर्दनाक बीमारी से बचाने के लिए अपनाएं ये आसान तरीकेव्यापार
20 जून 2026, 7:51 pm (84 दिन पहले)· 6

मानसून में गाय-भैंस का दूध नहीं होगा कम, पशुओं को खुर सड़न की दर्दनाक बीमारी से बचाने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके

बरसात के मौसम में कीचड़ और गंदगी के कारण दुधारू पशुओं में खुर सड़ने का संक्रमण तेजी से फैलता है, जिसे बेहद आसान घरेलू उपायों से रोका जा सकता है।

बारिश का मौसम शुरू होते ही किसानों के सामने खेती-किसानी के साथ-साथ अपने पालतू पशुओं की देखभाल की भी बड़ी जिम्मेदारी आ जाती है। ग्रामीण इलाकों में जगह-जगह जलजमाव, कीचड़ और गंदगी की वजह से गाय और भैंस के खुरों में संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। पशु चिकित्सकों के अनुसार, इस मौसम में पशुओं में खुर सड़ने की समस्या बहुत तेजी से फैलती है। कई बार पशुपालक इसे सामान्य चोट या कांटा चुभना समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन यह लापरवाही पशुओं के लिए बेहद कष्टदायक साबित हो सकती है। इसके कारण पशुओं को चलने-फिरने में भारी परेशानी होती है और उनका दूध उत्पादन भी तेजी से गिर जाता है।

लक्षण और बीमारी फैलने की वजह

ट्रेंडकिया (TrendKia) से बातचीत में देवघर कृषि विज्ञान केंद्र की पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन ने इस बीमारी की पूरी प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि जब पशु लगातार गीली और कीचड़ से भरी जगहों पर खड़े रहते हैं, तो उनके खुरों के बीच की त्वचा गलने लगती है। इस कारण वहां बैक्टीरिया का संक्रमण हो जाता है, जिससे खुर सड़ने लगते हैं।

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इस बीमारी के शुरुआती दौर में पशु थोड़ा लंगड़ाकर चलता है, जिस पर अमूमन ध्यान नहीं दिया जाता। धीरे-धीरे संक्रमण बढ़ने पर पशु अपना एक पैर हवा में उठाकर खड़ा होने लगता है। उसे चलने में तेज दर्द होता है और वह बार-बार बैठने की कोशिश करता है। कई बार खुरों के बीच गंभीर सूजन आ जाती है और वहां से तेज बदबू आने लगती है। अगर इसका सही समय पर इलाज न किया जाए, तो घाव बहुत गहरा हो जाता है और पशु हमेशा के लिए लंगड़ा भी हो सकता है।

दूध उत्पादन और पशुओं के स्वास्थ्य पर असर

डॉ. पूनम सोरेन के मुताबिक, इस बीमारी का सीधा प्रभाव पशुओं की सेहत और उनके दूध देने की क्षमता पर पड़ता है। अत्यधिक दर्द के कारण पशु ठीक से चारा नहीं खा पाते हैं। पोषण की कमी के चलते उनका शरीर कमजोर होने लगता है और दूध की मात्रा घट जाती है। कई किसानों को गलतफहमी होती है कि मानसून में दूध का उत्पादन स्वाभाविक रूप से कम हो जाता है, जबकि इसका असली कारण खुरों में छिपा यह संक्रमण हो सकता है। इसलिए बारिश के महीनों में पशुओं के पैरों की विशेष निगरानी जरूरी है।

बचाव के आसान और घरेलू उपाय

पशुओं को इस दर्दनाक बीमारी से बचाने के लिए डॉ. पूनम सोरेन ने कुछ बेहद असरदार और व्यावहारिक घरेलू उपाय साझा किए हैं:

  • पशुशाला को रखें साफ और सूखा: जिस स्थान पर पशुओं को बांधा जाता है, वहां पानी का ठहराव बिल्कुल नहीं होना चाहिए। यदि पशुशाला का फर्श कच्चा है, तो नमी को सोखने के लिए वहां समय-समय पर सूखी मिट्टी या बालू डालना फायदेमंद होता है।
  • चूने का छिड़काव: पशुशाला और उसके आसपास के परिसर में नियमित रूप से चूने का छिड़काव करें। इससे गंदगी और संक्रामक बैक्टीरिया नष्ट होते हैं।
  • खुरों की नियमित सफाई: हफ्ते में कम से कम दो से तीन बार पशुओं के पैरों और खुरों को साफ पानी से धोकर अच्छे से सुखाना चाहिए। सफाई की यह छोटी सी आदत संक्रमण को रोकने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है।
  • कीचड़ वाली जगहों से दूरी: बारिश के दिनों में पशुओं को ऐसे रास्तों या मैदानों में चराने से बचाएं जहां अत्यधिक कीचड़ हो। यदि चराई के बाद खुरों में मिट्टी या गोबर फंसा रह गया हो, तो घर लौटते ही उसे तुरंत साफ कर दें।
  • संतुलित पोषण: पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने के लिए उन्हें संतुलित आहार देना बेहद जरूरी है। उनके भोजन में हरा चारा, सूखा चारा और उचित मात्रा में खनिज मिश्रण शामिल होना चाहिए, ताकि उनका शरीर बीमारियों से लड़ने में सक्षम रहे।

सवाल-जवाब

बारिश के मौसम में गाय-भैंस का दूध क्यों कम होने लगता है?
बारिश में गीली जगहों पर खड़े रहने से पशुओं के खुरों में संक्रमण (खुर सड़न) हो जाता है, जिससे दर्द के कारण वे चारा कम खाते हैं और उनका दूध उत्पादन घट जाता है।
पशुओं में खुर सड़ने की बीमारी के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
शुरुआती लक्षणों में पशु का हल्का लंगड़ाकर चलना, एक पैर उठाकर खड़े रहना, पैरों में सूजन आना और खुरों से बदबू आना शामिल है।
पशुशाला में नमी कम करने के लिए क्या घरेलू उपाय कर सकते हैं?
पशुशाला के कच्चे फर्श पर सूखी मिट्टी या रेत डालें और गंदगी तथा बैक्टीरिया को कम करने के लिए समय-समय पर चूने का छिड़काव करें।
बरसात में पशुओं के खुरों को कितनी बार साफ करना चाहिए?
पशुओं के खुरों को हफ्ते में कम से कम दो से तीन बार साफ पानी से अच्छी तरह धोकर सुखाना चाहिए।
पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उनके आहार में क्या शामिल करें?
पशुओं को संतुलित आहार देना चाहिए, जिसमें सही मात्रा में हरा चारा, सूखा चारा और खनिज मिश्रण शामिल हो।
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