राजस्थान के बीकानेर जिले में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता मिली है। यहाँ की स्थानीय पुलिस ने करोड़ों रुपये मूल्य के दुर्लभ पदार्थ एम्बरग्रीस, जिसे आम बोलचाल में 'व्हेल की उल्टी' कहा जाता है, की तस्करी की कोशिश को नाकाम कर दिया है। कोटगेट थाना पुलिस ने इंटेलिजेंस और सीआईडी सीबी (CID CB) के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाया, जिसमें करीब 597 ग्राम संदिग्ध एम्बरग्रीस बरामद किया गया है। जब्त की गई इस खेप की अनुमानित कीमत लगभग 1 करोड़ रुपये आंकी गई है।
महाराष्ट्र से पहुंचे थे आरोपी
सुरक्षा एजेंसियों को इस प्रतिबंधित सामग्री के परिवहन के संबंध में पुख्ता सूचना मिली थी। इस गुप्त जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई की और तीन संदिग्धों को हिरासत में ले लिया। ये तीनों आरोपी महाराष्ट्र के रत्नागिरी से बीकानेर पहुंचे थे और उनका मुख्य उद्देश्य यहाँ एम्बरग्रीस की सप्लाई करना था। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसके साथ मौजूद दो नाबालिगों से विस्तृत पूछताछ की जा रही है ताकि इस अवैध व्यापार के पूरे सिलसिले का पता लगाया जा सके।
वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई
सिटी सीओ अनुज डाल ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस की संयुक्त टीम ने सतर्कता दिखाते हुए आरोपियों को पकड़ लिया और संदिग्ध एम्बरग्रीस को अपने कब्जे में ले लिया। यह पूरी कानूनी कार्रवाई वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है। यह कानून भारत में जंगली जानवरों, पेड़-पौधों की सुरक्षा और उनके संरक्षण के उद्देश्य से बनाया गया है। इसके तहत वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की रक्षा करने और जंगली जानवरों व उनसे बने उत्पादों के अवैध व्यापार को रोकने के लिए सख्त नियम निर्धारित किए गए हैं।
क्या होता है एम्बरग्रीस और क्यों है यह इतना कीमती
एम्बरग्रीस वास्तव में स्पर्म व्हेल के पाचन तंत्र में बनने वाला एक मोम जैसा ठोस पदार्थ होता है। व्हेल के शरीर से बाहर निकलने के बाद यह समुद्र की लहरों पर तैरता हुआ किनारे तक आ जाता है। अत्यधिक दुर्लभ और अत्यंत महंगा होने के कारण इसे समुद्र का 'तैरता हुआ सोना' भी कहा जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक किलोग्राम एम्बरग्रीस की कीमत करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये तक होती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से दुनिया के सबसे महंगे ब्रांडेड परफ्यूम बनाने में किया जाता है, ताकि उसकी खुशबू लंबे समय तक बनी रहे। भारत में इसके व्यापार पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है, और पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस खेप के पीछे कौन सा बड़ा गिरोह सक्रिय है।


















