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मौसम के हिसाब से कारोबार बदलकर हर महीने मोटी कमाई कर रहे बालोद के भरत साहूव्यापार
8 जुल॰ 2026, 7:35 am (45 दिन पहले)· 2

मौसम के हिसाब से कारोबार बदलकर हर महीने मोटी कमाई कर रहे बालोद के भरत साहू

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के भरत साहू मौसम के अनुरूप अपना व्यवसाय बदलकर पूरे साल शानदार मुनाफा कमा रहे हैं। वह बारिश में भुट्टा बेचकर रोजाना अच्छी कमाई कर रहे हैं और इस रणनीति को ही अपनी सफलता का बड़ा राज मानते हैं।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के रहने वाले भरत साहू ने व्यापार की एक ऐसी तकनीक अपनाई है जो उन्हें साल भर आर्थिक रूप से सक्षम बनाए रखती है। शिकारीपारा के निवासी भरत का मानना है कि यदि आप मौसम के मिजाज को समझकर अपने व्यापार को ढाल लें, तो सीमित पूंजी के साथ भी मोटी कमाई की जा सकती है। इसी दूरदर्शी सोच के साथ वह लंबे समय से सीजनल यानी मौसमी व्यापार कर रहे हैं। वर्तमान में बारिश का मौसम शुरू होते ही उन्होंने गरमागरम भुट्टा बेचने का काम हाथ में लिया है, जिसे स्थानीय लोग खूब पसंद कर रहे हैं और यह उनके लिए आय का एक बेहतरीन साधन बन गया है।

काम का समय और ग्राहकों की पसंद

भरत साहू ने बताया कि बालोद में मानसून की पहली फुहारों के साथ ही उन्होंने भुट्टा बेचने का अपना ठेला सजा लिया था। वह हर दिन दोपहर 12 बजे से लेकर रात 8:30 बजे तक शहर के व्यस्त कचहरी चौक के पास अपनी दुकान लगाते हैं। उनके पास दो तरह के विकल्प उपलब्ध होते हैं, जिसमें देसी भुट्टा और स्वीट कॉर्न शामिल हैं। बारिश के दौरान स्वीट कॉर्न की मांग विशेष रूप से बढ़ जाती है। उनके द्वारा बेचे जा रहे भूनकर तैयार किए गए स्वीट कॉर्न की कीमत 30 रुपये है, जबकि देसी भुट्टा ग्राहकों को 20 रुपये में उपलब्ध कराया जाता है।

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स्वाद का जादू और मुनाफे का गणित

उनके भुट्टे के लाजवाब स्वाद के पीछे एक खास मसाला है। वे भुट्टे पर काला नमक और नींबू का उपयोग करते हैं, जो इसे बेहद चटपटा और लजीज बना देता है। लोगों को उनका यह अंदाज इतना भा रहा है कि ग्राहक बड़ी संख्या में उनके ठेले की ओर खींचे चले आते हैं। भरत के अनुसार, वह वर्तमान में प्रतिदिन 80 से अधिक भुट्टे बेच रहे हैं। इस बिक्री के बाद खर्च काटकर उनके हाथ में प्रतिदिन 600 रुपये से ज्यादा का शुद्ध मुनाफा आ जाता है, जो इस छोटे से व्यापार के लिए काफी सम्मानजनक राशि है।

साल भर बना रहता है कमाई का जरिया

भरत साहू का पूरा बिजनेस मॉडल मौसम आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बारिश के ढाई महीने तक वह केवल भुट्टे का ही व्यापार करेंगे। जैसे ही सीजन बदलेगा, वह अपने सामान में भी बदलाव कर देंगे। उनके अनुभव के अनुसार, वह साल के अन्य महीनों में चना-बूट, ककड़ी और आम जैसे उत्पादों की बिक्री करते हैं, जबकि भीषण गर्मी आने पर वह आइसक्रीम का व्यवसाय अपना लेते हैं। उनका दृढ़ मत है कि एक ही काम पर टिके रहने से कमाई सीमित रह जाती है, लेकिन मौसम के अनुसार ढलने से साल भर आमदनी का प्रवाह बना रहता है। इस बार भुट्टे के काम को शुरू करने में उन्हें मात्र 3000 रुपये का शुरुआती निवेश करना पड़ा, जो साबित करता है कि अधिक लाभ के लिए बड़ी पूंजी की आवश्यकता नहीं है।

पत्नी का अटूट सहयोग

इस सफलता की कहानी में भरत अकेले नहीं हैं, बल्कि उनकी पत्नी भी कंधे से कंधा मिलाकर काम करती हैं। ठेला लगाने से लेकर ग्राहकों के लिए भुट्टा तैयार करने तक के हर कार्य में उनकी पत्नी की बराबर की भागीदारी रहती है। दोनों की संयुक्त मेहनत और सही समय पर सही व्यापार चुनने की स्पष्ट रणनीति ही उनकी समृद्धि का मूल मंत्र है। बरसात की सुहावनी शाम में गरमागरम भुट्टे की मांग ने उनके इस छोटे से उद्यम को काफी लाभदायक बना दिया है।

सवाल-जवाब

भरत साहू कचहरी चौक पर अपना ठेला कब से कब तक लगाते हैं?
भरत साहू कचहरी चौक के पास दोपहर 12 बजे से रात 8:30 बजे तक भुट्टा बेचने का काम करते हैं।
भरत साहू के पास भुट्टे की कीमतें क्या हैं?
उनके पास स्वीट कॉर्न की कीमत 30 रुपये और देसी भुट्टे की कीमत 20 रुपये प्रति नग रखी गई है।
भुट्टे के स्वाद को बेहतर बनाने के लिए वे क्या उपयोग करते हैं?
भुट्टे का स्वाद बढ़ाने के लिए वे उस पर काला नमक और नींबू लगाते हैं।
भरत साहू को इस व्यापार में रोजाना कितना शुद्ध मुनाफा होता है?
इस काम से उन्हें खर्च निकालने के बाद रोजाना 600 रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा मिलता है।
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