मिर्जापुर के किसानों के लिए इस बार खेती का सीजन सामान्य नहीं रहने वाला। विंध्य क्षेत्र में इस साल सुपर अल नीनो का असर पड़ने का अंदेशा है, जिसकी वजह से इलाके में बारिश की संभावना 60 प्रतिशत तक घट गई है। यानी जो किसान धान की रोपाई की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें पानी की कमी से जूझना पड़ सकता है। ऐसे हालात में कृषि विभाग किसानों को सलाह दे रहा है कि वे ऐसी फसलें चुनें जिनमें पानी की जरूरत कम हो, ताकि न तो पैदावार गिरे और न ही आमदनी पर चोट पहुंचे।
सुपर अल नीनो क्या असर डालेगा
सुपर अल नीनो एक जलवायु घटना है, जो मौसम के पूरे मिजाज को पलट सकती है। इसी के चलते इस बार विंध्य क्षेत्र में बारिश को लेकर तस्वीर ठीक नहीं दिख रही। मौसम का यह बदला हुआ रुख सीधे खेती-किसानी पर दिखाई देगा, खासकर उन फसलों पर जो पूरी तरह बारिश के भरोसे होती हैं।
कृषि विभाग की सलाह: धान नहीं, ये फसलें चुनें
उपनिदेशक कृषि विकेश सिंह पटेल ने TrendKia को बताया कि जलवायु परिवर्तन के चलते इस बार 40 से 60 प्रतिशत तक कम बारिश होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि जमालपुर, राजगढ़, पटेहरा और हलिया जैसे इलाकों में जो किसान धान बोना चाहते हैं, उनके लिए बेहतर यही होगा कि वे धान की जगह दलहनी, तिलहनी या मोटा अनाज की फसल उगाएं। इससे उन्हें विशेष लाभ मिलेगा।
उनके मुताबिक धान की खेती में सबसे बड़ी दिक्कत सिंचाई की आती है। अगर बारिश नहीं हुई तो खेतों तक पानी नहीं पहुंचेगा और फसल सूखने का खतरा बना रहेगा। वहीं कम पानी में पकने वाली फसलें बोने पर किसानों को नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा और मुनाफा भी ज्यादा होगा।
दलहन-तिलहन पर मिल रहा अनुदान
मिर्जापुर जिले में कृषि विभाग की ओर से किसानों को दलहनी और तिलहनी फसलों पर अनुदान दिया जा रहा है। विकेश सिंह पटेल ने बताया कि जो किसान दलहन, तिलहन या मोटे अनाज की खेती करना चाहते हैं, वे विभाग के गोदाम पर जाकर अनुदान पर बीज ले सकते हैं।
इसके अलावा जिन किसानों को कृषि बीज का किट चाहिए, वे विभाग की वेबसाइट से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के बाद चयन होने पर उन्हें बीज का मिनी किट उपलब्ध कराया जाएगा।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
उपनिदेशक ने किसानों से अपील की कि बारिश कम रहने वाली है, इसलिए तैयारी पहले से ही मजबूत रखें। उन्होंने साफ कहा कि ज्यादा पानी मांगने वाली फसलों से इस बार बचना ही ठीक रहेगा। फिर भी अगर कोई किसान धान बोना ही चाहता है, तो उसे ऐसे बीज इस्तेमाल करने चाहिए जिनकी वैरायटी 60 दिनों में तैयार हो जाती है।













