अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मोर्चे पर भारतीय कारोबारियों और निर्यातकों के लिए एक बड़ा अवसर सामने आया है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुआ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता 20 अक्टूबर को रात 12:01 बजे से आधिकारिक तौर पर लागू हो रहा है। इस द्विपक्षीय समझौते के जमीन पर उतरने के साथ ही न्यूजीलैंड अपने बाजार में पहुंचने वाले लगभग 100 प्रतिशत भारतीय सामानों पर सीमा शुल्क पूरी तरह समाप्त कर देगा। यह कदम विशेष रूप से देश के श्रम-गहन विनिर्माण उद्योगों के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है, जिन्हें अब प्रशांत क्षेत्र के इस संपन्न देश में शून्य टैरिफ के साथ सीधी और प्रतिस्पर्धी पहुंच प्राप्त होगी।
निर्यातकों के लिए नए रास्ते और निवेश की व्यापक योजना
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस महत्वपूर्ण व्यापारिक घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों देशों ने इस समझौते पर औपचारिक रूप से 27 अप्रैल को हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत अगले 15 वर्षों की अवधि में न्यूजीलैंड से भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का प्रवाह सुनिश्चित करने का खाका खींचा गया है। इस पूंजी निवेश से देश के बुनियादी ढांचे, आधुनिक विनिर्माण और सेवा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
व्यापार समझौते की शुरुआत के प्रतीक के रूप में केंद्रीय मंत्री ने जेसीबी इंडिया द्वारा निर्मित छोटे एक्सकेवेटर की पहली खेप को हरी झंडी दिखाकर न्यूजीलैंड रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने रेखांकित किया कि जेसीबी इंडिया वर्तमान में अपनी कुल घरेलू उत्पादन क्षमता का 25 प्रतिशत हिस्सा विश्व के विभिन्न हिस्सों में निर्यात करती है। कंपनी के प्रदर्शन की सराहना करते हुए मंत्री ने प्रबंधन को इस निर्यात हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य सौंपा। इस खेप के साथ ही न्यूजीलैंड कंपनी का 140वां वैश्विक निर्यात गंतव्य बन गया है, जो भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
किन भारतीय उद्योगों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ
इस व्यापार समझौते की संरचना इस तरह तैयार की गई है कि भारत के प्रमुख विनिर्माण और कृषि आधारित क्षेत्रों को इसका सीधा फायदा मिले। भारतीय कपड़ा उद्योग, परिधान निर्माता, चमड़ा उद्योग तथा फुटवियर क्षेत्र को न्यूजीलैंड के बाजार में प्रवेश करते ही शत-प्रतिशत शुल्क छूट का लाभ मिलेगा। इसके अलावा इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, समुद्री खाद्य उत्पाद, प्लास्टिक और रबर निर्माण से जुड़ी घरेलू इकाइयां भी बिना किसी टैरिफ बाधा के अपना निर्यात बढ़ा सकेंगी।
कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के संदर्भ में भारतीय फल, सब्जियां, चाय, कॉफी, कोको, मसाले, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और अनाज न्यूजीलैंड के उपभोक्ताओं तक अधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर पहुंचेंगे। यह समझौता दोनों देशों के बीच कृषि उत्पादकता में तकनीकी साझेदारी को भी सुगम बनाता है, जिससे न्यूजीलैंड की उन्नत कृषि तकनीक का लाभ भारत के विशाल उत्पादन आधार को मिल सकेगा।
संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों की मजबूत सुरक्षा
भारतीय बाजार और स्थानीय किसानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार ने कई संवेदनशील कृषि और ग्रामीण उत्पादों को इस मुक्त व्यापार समझौते से पूरी तरह बाहर रखा है। डेयरी उत्पाद, प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम, चीनी, कृत्रिम शहद, वसा और खाद्य तेलों जैसे क्षेत्रों को किसी भी प्रकार की शुल्क रियायत नहीं दी गई है। इन मदों पर सुरक्षात्मक दीवार बरकरार रखकर यह सुनिश्चित किया गया है कि देश के करोड़ों दुग्ध उत्पादकों और किसानों की आजीविका पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
वहीं दूसरी ओर, 1.4 अरब उपभोक्ताओं वाले भारतीय बाजार में न्यूजीलैंड के उत्पादों के लिए भी सीमित और नियंत्रित पहुंच बनाई गई है। जहां न्यूजीलैंड ने भारत के लिए अपनी 100 प्रतिशत टैरिफ लाइन खोल दी हैं, वहीं भारत ने न्यूजीलैंड के लिए लगभग 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर ही शुल्क रियायतें दी हैं। सेब, कीवी, मानुका शहद और एल्ब्यूमिन जैसे उत्पादों के लिए न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) और टैरिफ-आधारित कोटा की कड़ी शर्तें लागू की गई हैं, ताकि घरेलू बागवानों और उत्पादकों के हितों को नुकसान न पहुंचे।
सेवा क्षेत्र और पेशेवरों के लिए नए अवसर
वस्तुओं के व्यापार के साथ-साथ यह समझौता सेवा क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवरों, कुशल श्रमिकों और छात्रों के लिए भी व्यापक अवसर पैदा करता है। न्यूजीलैंड ने भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए कुल 118 सेवा उप-क्षेत्रों को खोलने की आधिकारिक सहमति दी है। इन प्रमुख क्षेत्रों में सूचना प्रौद्योगिकी (IT), पेशेवर परामर्श सेवाएं, दूरसंचार, निर्माण, वित्तीय सेवाएं, उच्च शिक्षा और पर्यटन शामिल हैं। इस व्यवस्था से भारतीय आईटी कंपनियों, इंजीनियरों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और अन्य पेशेवरों के लिए न्यूजीलैंड में अपनी सेवाएं देना बेहद सुगम हो जाएगा।
न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए पारस्परिक विकास का मजबूत मंच तैयार करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समझौते के पूर्ण कार्यान्वयन के बाद न्यूजीलैंड से भारत को होने वाले मौजूदा कुल निर्यात का 95 प्रतिशत हिस्सा शून्य शुल्क अथवा अत्यंत रियायती टैरिफ दरों के दायरे में आ जाएगा। इस प्रकार यह समझौता दोनों देशों के व्यापारिक संतुलन और रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को एक नए युग में ले जाने के लिए तैयार है।
















