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मुनाफे में बिजली कंपनियां, फिर भी 38 हजार करोड़ का बकाया कैसे? दिल्ली सरकार ने बिठाई CAG जांचव्यापार
2 घंटे पहले· 3

मुनाफे में बिजली कंपनियां, फिर भी 38 हजार करोड़ का बकाया कैसे? दिल्ली सरकार ने बिठाई CAG जांच

दिल्ली सरकार ने बिजली कंपनियों के 38 हजार करोड़ रुपये के बकाए की जांच के लिए पहली बार CAG ऑडिट का आदेश दिया है, जिसे 3 महीने में पूरा करना होगा।

अमित पटेलअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता 2 मिनट पढ़ें AI के लिए
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दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली कंपनियों के फाइनेंशियल रिकॉर्ड की अब बारीकी से जांच होगी। दिल्ली सरकार ने इन कंपनियों का CAG ऑडिट कराने का आदेश जारी कर दिया है और इसके लिए 3 महीने की समयसीमा तय की गई है। सालों से यह मांग उठती रही थी, लेकिन बिजली कंपनियां इस ऑडिट के लिए राजी नहीं हो रही थीं। मामला अदालत तक भी पहुंचा, लेकिन वहां से भी कंपनियों को राहत नहीं मिली, जिसके बाद दिल्ली सरकार ने सीधे ऑडिट का आदेश दे दिया।

मुनाफे में होने के बावजूद इतना बकाया कैसे?

दिल्ली सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिजली कंपनियों पर 38 हजार करोड़ रुपये का बकाया कैसे बन गया, जबकि ये कंपनियां घाटे में नहीं बल्कि मुनाफे में बताई जाती हैं। इतना ही नहीं, इस मुनाफे में दिल्ली सरकार का भी हिस्सा तय है और वह हिस्सा सरकार को मिल भी रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब कंपनियां कमाई कर रही हैं और सरकार को उसका शेयर भी दे रही हैं, तो फिर 38 हजार करोड़ रुपये का इतना बड़ा बकाया आखिर कहां से और कैसे खड़ा हो गया। दिल्ली सरकार अब इसी उलझन की तह तक जाना चाहती है।

दिल्ली में पहली बार बिजली कंपनियों का होगा CAG ऑडिट

यह पहला मौका है जब दिल्ली में बिजली कंपनियों का CAG ऑडिट होने जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इस ऑडिट के पूरा होते ही 38 हजार करोड़ रुपये के बकाए के पीछे की असली कहानी सामने आ जाएगी। दिल्ली सरकार का कहना है कि जब कंपनियां मुनाफे में हैं और उसका एक हिस्सा सरकार को भी मिल रहा है, तो इतनी बड़ी रकम बकाया रहने का कोई ठोस कारण जनता के सामने आना चाहिए।

केजरीवाल के कार्यकाल में अटका मामला, अब रेखा गुप्ता सरकार में शुरुआत

इससे पहले दिल्ली के पूर्व CM अरविंद केजरीवाल भी बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट की बात कर चुके थे, लेकिन अपने कार्यकाल के दौरान वो इसे अमलीजामा नहीं पहना सके थे। अब रेखा गुप्ता की सरकार में यह ऑडिट आखिरकार शुरू होने जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस ऑडिट के पीछे मकसद उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता लाना है। अगर जांच के दौरान किसी तरह की वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।

ऑडिट में किन-किन चीजों की होगी पड़ताल

दिल्ली सरकार के मुताबिक, CAG ऑडिट के दौरान बिजली कंपनियों के फाइनेंशियल रिकॉर्ड, उनके राजस्व, खर्च, सब्सिडी, बिजली खरीदने पर आने वाली लागत और बकाया रकम से जुड़े हर दस्तावेज की बारीकी से जांच की जाएगी। इस पूरी कवायद का मकसद यह पता लगाना है कि आखिर बकाया रकम की असली वजह क्या है और कहीं वित्तीय प्रबंधन या रिकॉर्ड दर्ज करने में कोई चूक तो नहीं हुई है। ऑडिट पूरा होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि 38 हजार करोड़ रुपये का यह बकाया वाकई जायज है या इसके पीछे कोई गड़बड़ी छिपी है।

इसका आप पर असर

  • भारत में: दिल्ली में बिजली कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिए हो रहा यह CAG ऑडिट अन्य राज्यों में भी बिजली वितरण कंपनियों की जांच की मांग को हवा दे सकता है।
  • दिल्ली में: अगर ऑडिट में गड़बड़ी सामने आती है तो इसका सीधा असर दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं की दरों, सब्सिडी और भविष्य की बिजली नीति पर पड़ सकता है।

सवाल-जवाब

दिल्ली सरकार ने बिजली कंपनियों का CAG ऑडिट का आदेश क्यों दिया?
क्योंकि बिजली कंपनियों पर 38 हजार करोड़ रुपये का बकाया है, जबकि कंपनियां मुनाफे में बताई जा रही हैं, इसलिए सरकार बकाए की असली वजह जानना चाहती है।
ऑडिट पूरा करने के लिए कितना समय दिया गया है?
दिल्ली सरकार के आदेश के मुताबिक यह ऑडिट 3 महीने में पूरा करना होगा।
क्या पहले भी दिल्ली में बिजली कंपनियों का CAG ऑडिट हुआ है?
नहीं, यह पहली बार है जब दिल्ली में बिजली कंपनियों का CAG ऑडिट किया जा रहा है।
क्या इससे पहले भी CAG ऑडिट की मांग उठी थी?
हां, सालों से इसकी मांग हो रही थी, लेकिन बिजली कंपनियां इसके लिए तैयार नहीं थीं और कोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली।
पूर्व CM अरविंद केजरीवाल ने इस बारे में क्या कहा था?
अरविंद केजरीवाल ने भी CAG ऑडिट की बात कही थी, लेकिन उनके कार्यकाल में यह ऑडिट नहीं हो पाया था।
CAG ऑडिट में क्या-क्या जांचा जाएगा?
ऑडिट में बिजली कंपनियों के फाइनेंशियल रिकॉर्ड, राजस्व, खर्च, सब्सिडी, बिजली खरीद की लागत और बकाया रकम से जुड़े दस्तावेजों की जांच होगी।
अगर जांच में गड़बड़ी मिलती है तो क्या होगा?
दिल्ली सरकार के मुताबिक अगर वित्तीय अनियमितता पाई जाती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
अमित पटेल
लेखक के बारे मेंअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता दिल्ली
विशेषज्ञताबिज़नेस समाचार, वित्तीय बाज़ार, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट मामले, स्टार्टअप, उद्यमिता, आर्थिक रुझान, टेक्नोलॉजी बिज़नेस, निवेश, वैश्विक अर्थव्यवस्था

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, स्टार्टअप, तकनीक और आर्थिक रुझानों को कवर करते हैं। वे आधुनिक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले कारोबार और उद्योगों की ख़बरें, बाज़ार विश्लेषण और अंतर्दृष्टि देते हैं।

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, उद्यमिता, तकनीक और आर्थिक घटनाक्रमों को कवर करते हैं। वे ब्रेकिंग बिज़नेस न्यूज़, कॉर्पोरेट रणनीतियों, शेयर बाज़ार के रुझानों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले औद्योगिक नवाचारों पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, स्पष्टता और गहन विश्लेषण पर ज़ोर देते हुए अमित पाठकों को जटिल कारोबारी विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करते हैं। उनकी कवरेज वित्तीय बाज़ार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, उभरते उद्योगों, आर्थिक नीति, निवेश रुझानों और डिजिटल बदलाव तक फैली है।

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