अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन आपूर्ति में आने वाली रुकावटों से निपटने के लिए भारत सरकार ने एक दूरगामी नीतिगत कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी किए गए 13 अगस्त के नए आदेश के अनुसार देश की 21 रिफाइनिंग और अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए रसोई गैस यानी एलपीजी के अधिकतम उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है। यह व्यवस्था पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों और रणनीतिक जलमार्गों में पैदा हुए तनाव के कारण एलपीजी आयात में आई परेशानियों के बाद लागू की गई है। नए निर्देशों का मुख्य उद्देश्य आयात में किसी भी अचानक आई रुकावट की स्थिति में देश के भीतर एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना और घरेलू उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करना है।
63,810 टन दैनिक उत्पादन का नया राष्ट्रीय लक्ष्य
सरकार द्वारा निर्धारित नए ढांचे के तहत देश की चयनित 21 रिफाइनरी इकाइयों को संकट काल में रोजाना कुल 63,810 टन एलपीजी का उत्पादन करना होगा। यह उत्पादन स्तर 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के दौरान देश में हुए कुल घरेलू एलपीजी उत्पादन के दोगुने से भी अधिक है। इसके अलावा, यह निर्धारित मात्रा भारत की वर्तमान दैनिक एलपीजी खपत का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा कवर करती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये उत्पादन लक्ष्य सामान्य दिनों में लागू नहीं होंगे, बल्कि केवल उसी समय प्रभावी किए जाएंगे जब वैश्विक या क्षेत्रीय कारणों से एलपीजी की आपूर्ति में वास्तविक कमी दर्ज की जाएगी।
पश्चिम एशिया संकट और भारत की आयात पर निर्भरता
भारत अपनी घरेलू रसोई गैस जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी आयात पर निर्भर रहता है। वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल 3.32 करोड़ टन एलपीजी की खपत हुई थी। इसके मुकाबले घरेलू रिफाइनरियों का उत्पादन महज 1.31 करोड़ टन रहा, जिसके कारण भारत को करीब 2.13 करोड़ टन एलपीजी विदेशों से आयात करनी पड़ी। इस प्रकार भारत अपनी कुल एलपीजी आवश्यकता का 64 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजारों से खरीदता है। जब हाल में पश्चिम एशिया में सैनिकी और राजनीतिक तनाव बढ़ा, तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग से होने वाली शिपमेंट बुरी तरह प्रभावित हुई थी। उस दौरान घरेलू रसोई गैस की किल्लत से बचने के लिए अधिकारियों को कई आपातकालीन कदम उठाने पड़े थे, जिनमें वाणिज्यिक और औद्योगिक ग्राहकों को आपूर्ति सीमित करना और आम उपभोक्ताओं के लिए रिफिल सिलेंडरों की बुकिंग अवधि बढ़ाना शामिल था।
रिलायंस और नायरा एनर्जी समेत पीएसयू रिफाइनरियों का आवंटन
मंत्रालय के आदेश में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों के लिए अलग-अलग दैनिक कोटा तय किया गया है। इसमें गुजरात के जामनगर में स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज की घरेलू बाजार केंद्रित रिफाइनरी को सबसे बड़ा दैनिक लक्ष्य सौंपा गया है। आपात स्थिति पैदा होने पर रिलायंस को रोजाना 18,000 टन एलपीजी तैयार करनी होगी। वहीं, रूस की प्रसिद्ध ऊर्जा कंपनी रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी की वाडिनार स्थित रिफाइनरी के लिए रोजाना 4,480 टन एलपीजी उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा देश की 18 सरकारी यानी सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों को सामूहिक रूप से रोजाना 31,470 टन एलपीजी उत्पादन की जिम्मेदारी दी गई है। उल्लेखनीय है कि रिलायंस की जामनगर में स्थित केवल निर्यात के लिए संचालित होने वाली दूसरी रिफाइनरी को इस अनिवार्य उत्पादन लक्ष्य से पूरी तरह मुक्त रखा गया है।
तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर और 6-महीने का समीक्षा तंत्र
उत्पादन लक्ष्य पूरा करने के साथ-साथ सरकार ने कंपनियों के लिए परिचालन और तकनीकी ढांचा मजबूत करने के अनिवार्य निर्देश जारी किए हैं। ऊर्जा कंपनियों को एलपीजी के सुरक्षित भंडारण, त्वरित निकासी और सुचारू परिवहन के लिए पर्याप्त लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए कहा गया है। रिफाइनरियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आवश्यकता पड़ने पर नैफ्था को एलपीजी में परिवर्तित करने की क्षमता विकसित करें और अपने फ्लूइड कैटेलिटिक क्रैकिंग (एफसीसी) यूनिट्स को आधुनिक बनाएं। सरकार ने यह भी व्यवस्था की है कि इन उत्पादन लक्ष्यों की हर 6 महीने में समीक्षा की जाएगी। इस समीक्षा के दौरान नई शुरू होने वाली रिफाइनरियों, नए खोजे गए तेल व गैस क्षेत्रों और हालिया तकनीकी उन्नयन से निर्मित अतिरिक्त क्षमता को भी लक्ष्यों में शामिल किया जाएगा। इस तरह पश्चिम एशिया संकट के दौरान अपनाए गए अस्थायी राहत उपायों को अब एक स्थायी और मजबूत राष्ट्रीय आपूर्ति-सुरक्षा तंत्र का रूप दे दिया गया है।



















