समुद्री व्यापार और माल ढुलाई की दक्षता को मजबूत करने के इरादे से अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) ने एक नई बुनियादी ढांचा परियोजना का ऐलान किया है। कंपनी गुजरात के मुंद्रा पोर्ट और SEZ परिसर में एक विशेष एम्प्टी कंटेनर यार्ड (ECY) की स्थापना करने जा रही है। इस नए केंद्र का मुख्य उद्देश्य खाली कंटेनरों की आवाजाही, उनकी जांच और भंडारण की प्रक्रिया को सरल एवं तेज बनाना है। इस कदम से भारतीय निर्यातकों, आयातकों, जहाजरानी कंपनियों और परिवहन कारोबारियों को परिचालन में काफी सुगमता मिलेगी।
मुंद्रा पोर्ट का व्यापारिक दायरा और खाली डिब्बों की संख्या
भारत के कंटेनर लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में अडानी समूह की मौजूदगी अत्यंत व्यापक है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, देश के पूरे कंटेनर बाजार में APSEZ की कुल हिस्सेदारी लगभग 45.5 फीसदी तक पहुंच चुकी है। इसमें से अकेले मुंद्रा पोर्ट की भूमिका केंद्रीय है, जो भारत के कुल कंटेनर कारोबार का करीब 35 फीसदी हिस्सा अकेले संभालता है। यही वजह है कि मुंद्रा को देश के सबसे प्रमुख कंटेनर हैंडलिंग केंद्र के रूप में पहचाना जाता है।
आंकड़ों के अनुसार, मुंद्रा पोर्ट पर हर वर्ष औसतन 16 लाख TEUs (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट्स) खाली कंटेनर आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में खाली डिब्बों का प्रबंधन करना एक जटिल चुनौती होती है। समर्पित एम्प्टी कंटेनर यार्ड बनने से इस विशाल नेटवर्क की व्यवस्था में काफी सुधार आएगा और बुनियादी संचालन अधिक अनुशासित हो सकेगा।
एक ही छत के नीचे मिलेंगी सभी बुनियादी सेवाएं
नवनिर्मित एम्प्टी कंटेनर यार्ड की खासियत यह होगी कि यहाँ खाली कंटेनर से जुड़ी तमाम आवश्यकताएं एक ही स्थान पर पूरी हो सकेंगी। इस यार्ड में डिब्बों के सुरक्षित भंडारण के साथ-साथ उनकी मरम्मत, रखरखाव और तकनीकी निरीक्षण की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अतिरिक्त, निर्यातकों और कंटेनर फ्रेट स्टेशनों (CFS) तक खाली डिब्बों को भेजने की प्रणाली को बेहद सुव्यवस्थित रूप से प्रबंधित किया जाएगा।
अब तक कंटेनरों को अलग-अलग चरणों में भिन्न स्थानों पर ले जाना पड़ता था, जिससे समय और ईंधन दोनों का नुकसान होता था। एकीकृत यार्ड बनने से कंटेनरों के बार-बार होने वाले चक्कर समाप्त होंगे, जिससे न केवल बहुमूल्य समय बचेगा बल्कि निर्यात-आयात की समग्र लॉजिस्टिक्स लागत में भी प्रत्यक्ष रूप से गिरावट आएगी।
सप्लाई चेन में बेहतर समन्वय और त्वरित कामकाज
इस नई व्यवस्था के रणनीतिक लाभ रेखांकित करते हुए APSEZ के सीईओ और पूर्णकालिक निदेशक अश्वनी गुप्ता ने स्पष्ट किया कि यह यार्ड पूरे कंटेनर तंत्र की कार्यकुशलता को नई गति देगा। उनके अनुसार, अनावश्यक परिवहन गतिविधियों पर रोक लगने से कंटेनरों का टर्नअराउंड समय बेहतर होगा और पूरी सप्लाई चेन अधिक चुस्त बनेगी।
मुंद्रा पोर्ट SEZ के भीतर ही खाली कंटेनरों की सभी प्रक्रियाएं संपन्न होने से सीमा शुल्क अधिकारियों, शिपिंग लाइनों, टर्मिनल ऑपरेटरों और सड़क व रेल ट्रांसपोर्टरों के बीच आपसी तालमेल कहीं अधिक मजबूत होगा। जब सभी पक्ष एक साझा तंत्र से जुड़ेंगे, तो प्रशासनिक और मैदानी स्वीकृतियों में होने वाली देरी अपने आप खत्म हो जाएगी।
एम्बिशन 2031 के तहत क्षमता विस्तार का खाका
मुंद्रा पोर्ट पर समर्पित यार्ड का निर्माण APSEZ के दीर्घकालिक 'एम्बिशन 2031' रोडमैप का एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। बुनियादी ढांचे के विकास की इस दूरगामी रणनीति के तहत कंपनी की योजना अगले पांच सालों में अपने पूरे भारतीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कंटेनर हैंडलिंग क्षमता में 60 लाख TEUs से अधिक का इजाफा करने की है। इस विशाल महत्वाकांक्षी विस्तार में मुंद्रा पोर्ट केंद्र बिंदु बना रहेगा, जिससे भारत के वैश्विक व्यापारिक संबंधों को एक नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।



















