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मुर्गी पालन के बिजनेस में उतरने से पहले एक्सपर्ट की ये सलाह जरूर पढ़ें, हर कदम पर बचेगा नुकसानव्यापार
2 घंटे पहले· 2

मुर्गी पालन के बिजनेस में उतरने से पहले एक्सपर्ट की ये सलाह जरूर पढ़ें, हर कदम पर बचेगा नुकसान

बेगूसराय के पशु चिकित्सा विज्ञान विशेषज्ञ डॉ विपिन कुमार के मुताबिक मुर्गी पालन शुरू करने से पहले ब्रॉयलर और लेयर मुर्गियों के लिए जगह, फार्म की ऊंचाई-चौड़ाई और दो फार्मों के बीच की दूरी जैसे वैज्ञानिक मानकों का पालन जरूरी है, वरना भारी नुकसान हो सकता है।

अमित पटेलअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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पशुपालन की दुनिया में जब भी दुधारू पशुओं की बात होती है तो गाय और भैंस का जिक्र सबसे पहले आता है, लेकिन कम लागत में ज्यादा और तेज कमाई की बात करें तो मुर्गी पालन का कारोबार सबसे आगे निकल जाता है। बेगूसराय जिले में कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़े पशु चिकित्सा विज्ञान विशेषज्ञ डॉ विपिन कुमार कहते हैं कि यह बिजनेस भले ही मुनाफे वाला हो, लेकिन शुरुआत में तकनीकी जानकारी की कमी किसानों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। उनका कहना है कि फार्म खड़ा करने से पहले कुछ वैज्ञानिक मानकों और बुनियादी व्यवस्थाओं का पालन करना बेहद जरूरी है। जगह, हवा और साफ-सफाई का सही इंतजाम हो तो उत्पादन भी बढ़िया मिलता है और मुर्गियों में बीमारी फैलने का डर भी कम रहता है।

ब्रॉयलर और लेयर मुर्गियों के लिए जगह का पूरा हिसाब

डॉ विपिन कुमार के मुताबिक मुर्गी पालन में मुख्य तौर पर दो तरह की मुर्गियां पाली जाती हैं। पहली किस्म ब्रॉयलर है, जिसे मांस के उत्पादन के लिए पाला जाता है, और दूसरी किस्म लेयर है, जिसे अंडे के उत्पादन के लिए तैयार किया जाता है। दोनों के लिए जगह की जरूरत अलग-अलग होती है, इसलिए इसे समझे बिना फार्म शुरू करना नुकसानदायक हो सकता है। अगर ब्रॉयलर मुर्गियों को डीप लिटर सिस्टम में पाला जाए तो हर पक्षी के लिए करीब 1 वर्ग फीट जगह चाहिए होती है। वहीं लेयर मुर्गियों को दो तरीकों से रखा जा सकता है। डीप लिटर सिस्टम में लेयर मुर्गी के लिए प्रति पक्षी करीब 1.5 से 2 वर्ग फीट जगह की दरकार होती है, जबकि केज सिस्टम अपनाने पर यही जरूरत घटकर प्रति पक्षी करीब 0.5 से 0.8 वर्ग फीट रह जाती है। यानी अगर जगह सीमित है तो केज सिस्टम ज्यादा मुर्गियां पालने का विकल्प दे सकता है।

पोल्ट्री फार्म का ढांचा वैज्ञानिक तरीके से खड़ा करें

सिर्फ जगह ही नहीं, फार्म की बनावट भी उतनी ही मायने रखती है। डॉ विपिन कुमार बताते हैं कि पोल्ट्री फार्म को जमीन से करीब 1.5 से 2 फीट ऊंचा बनाना चाहिए। इससे फार्म में नमी नियंत्रित रहती है और सफाई रखना भी आसान हो जाता है। फार्म की साइड की दीवारों की ऊंचाई करीब 6 से 7 फीट रखनी चाहिए, जबकि बीच यानी सेंटर की ऊंचाई 10 से 12 फीट होनी चाहिए। यह ऊंचाई फार्म के भीतर हवा का सही आवागमन बनाए रखती है, जो मुर्गियों की सेहत के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। इसके साथ ही फार्म की चौड़ाई भी करीब 22 से 25 फीट रखने की सलाह दी जाती है, ताकि अंदर हवा ठीक तरह से बहती रहे और मुर्गियों का दम न घुटे।

एक से ज्यादा फार्म बनाते समय बरतें ये सावधानी

जो किसान एक साथ कई पोल्ट्री फार्म बनाने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए भी डॉ विपिन कुमार ने एक अहम सलाह दी है। उनका कहना है कि दो फार्मों के बीच करीब 50 से 100 फीट की दूरी जरूर रखनी चाहिए। इसकी वजह यह है कि अगर किसी एक फार्म में कोई बीमारी फैलती है, तो इतनी दूरी होने से उस बीमारी के दूसरे फार्म तक पहुंचने का खतरा काफी कम हो जाता है। यानी एक फार्म प्रभावित होने पर भी पूरा कारोबार डूबने से बच सकता है।

सही तैयारी से घटता है नुकसान का खतरा

डॉ विपिन कुमार के मुताबिक अगर इसी वैज्ञानिक तकनीक के साथ मुर्गा पालन कारोबार शुरू किया जाए तो किसी आपात स्थिति, जैसे कि कोई बीमारी या वायरस फैलने पर भी नुकसान काफी हद तक सीमित रहता है। यानी पोल्ट्री फार्म शुरू करने से पहले सही जगह का चुनाव, भवन का वैज्ञानिक निर्माण और तय मानकों का पालन तीनों ही बातें बेहद जरूरी हैं। जो किसान इन बातों का ध्यान रखते हुए मुर्गी पालन का कारोबार शुरू करते हैं, उनके लिए यह बिजनेस पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और मुनाफे वाला साबित हो सकता है।

इसका आप पर असर

  • भारत में: जो भी किसान या नए उद्यमी मुर्गी पालन का बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, उनके लिए जगह और फार्म डिजाइन से जुड़े ये वैज्ञानिक मानक शुरुआती नुकसान से बचने में मदद कर सकते हैं।
  • बेगूसराय में: कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़े विशेषज्ञ की सलाह स्थानीय किसानों को अपने पोल्ट्री फार्म का सही डिजाइन तैयार करने में सीधे काम आ सकती है।

सवाल-जवाब

मुर्गी पालन में कौन-कौन सी मुर्गियां पाली जाती हैं?
मुख्य रूप से दो तरह की, ब्रॉयलर जिसे मांस के लिए पाला जाता है और लेयर जिसे अंडे के उत्पादन के लिए पाला जाता है।
ब्रॉयलर मुर्गियों के लिए कितनी जगह चाहिए?
डीप लिटर सिस्टम में ब्रॉयलर मुर्गी के लिए प्रति पक्षी करीब 1 वर्ग फीट जगह चाहिए होती है।
लेयर मुर्गियों के लिए कितनी जगह जरूरी है?
डीप लिटर सिस्टम में प्रति पक्षी 1.5 से 2 वर्ग फीट, जबकि केज सिस्टम में प्रति पक्षी 0.5 से 0.8 वर्ग फीट जगह पर्याप्त मानी जाती है।
पोल्ट्री फार्म की ऊंचाई कितनी होनी चाहिए?
फार्म को जमीन से 1.5 से 2 फीट ऊंचा बनाना चाहिए, साइड वॉल की ऊंचाई 6 से 7 फीट और सेंटर की ऊंचाई 10 से 12 फीट होनी चाहिए।
फार्म की चौड़ाई कितनी रखनी चाहिए?
पोल्ट्री फार्म की चौड़ाई करीब 22 से 25 फीट रखने की सलाह दी जाती है, ताकि हवा का आवागमन बेहतर बना रहे।
एक से ज्यादा फार्म बनाने पर कितनी दूरी रखनी चाहिए?
दो फार्मों के बीच करीब 50 से 100 फीट की दूरी रखनी चाहिए, ताकि एक फार्म में बीमारी फैलने पर वह दूसरे फार्म तक न पहुंचे।
अमित पटेल
लेखक के बारे मेंअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता दिल्ली
विशेषज्ञताबिज़नेस समाचार, वित्तीय बाज़ार, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट मामले, स्टार्टअप, उद्यमिता, आर्थिक रुझान, टेक्नोलॉजी बिज़नेस, निवेश, वैश्विक अर्थव्यवस्था

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, स्टार्टअप, तकनीक और आर्थिक रुझानों को कवर करते हैं। वे आधुनिक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले कारोबार और उद्योगों की ख़बरें, बाज़ार विश्लेषण और अंतर्दृष्टि देते हैं।

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, उद्यमिता, तकनीक और आर्थिक घटनाक्रमों को कवर करते हैं। वे ब्रेकिंग बिज़नेस न्यूज़, कॉर्पोरेट रणनीतियों, शेयर बाज़ार के रुझानों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले औद्योगिक नवाचारों पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, स्पष्टता और गहन विश्लेषण पर ज़ोर देते हुए अमित पाठकों को जटिल कारोबारी विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करते हैं। उनकी कवरेज वित्तीय बाज़ार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, उभरते उद्योगों, आर्थिक नीति, निवेश रुझानों और डिजिटल बदलाव तक फैली है।

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