नौकरीपेशा लोगों और युवाओं के बीच इन दिनों अतिरिक्त आय के नए स्रोत तलाशने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। कई लोग अपनी पारंपरिक नौकरी के साथ व्यवसाय शुरू करने में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसी कड़ी में खेती और पशुपालन से जुड़े व्यवसाय भी आकर्षण का बड़ा केंद्र बन गए हैं। इनमें ब्रॉयलर मुर्गी पालन एक ऐसा विकल्प है, जिसे अगर सही तरीके से किया जाए तो यह बहुत ही कम समय में अच्छी खासी कमाई का जरिया बन सकता है। हालांकि, बिना उचित जानकारी और ट्रेनिंग के इस क्षेत्र में कदम रखना भारी नुकसान का कारण भी बन सकता है।
नए लोगों के लिए कौन सा मौसम है सबसे उपयुक्त
जब भी कोई नया व्यवसाय शुरू किया जाता है, तो उसकी टाइमिंग बहुत मायने रखती है। पोल्ट्री क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि जो लोग इस बिजनेस में पुराने और अनुभवी हैं, वे साल के किसी भी महीने में अपना काम शुरू कर सकते हैं। लेकिन जो लोग पहली बार इस व्यापार में उतर रहे हैं, उनके लिए बरसात का मौसम सबसे बेहतरीन माना जाता है। इस मौसम में शुरुआत करने का सबसे बड़ा कारण प्राकृतिक रूप से तापमान का संतुलित रहना है। मुर्गियों के स्वस्थ विकास के लिए फार्म के भीतर एक निश्चित तापमान बनाए रखना अनिवार्य होता है।
मौसम का सीधा असर पोल्ट्री व्यवसाय की शुरुआती लागत पर पड़ता है। गर्मी के महीनों में मुर्गियों को अत्यधिक गर्मी से बचाने के लिए फार्म में पंखे और कूलर लगाने पड़ते हैं, जिससे बिजली का बिल काफी ज्यादा आता है। वहीं दूसरी तरफ, कड़ाके की ठंड में शेड के भीतर गर्माहट बनाए रखने के लिए हीटर का इस्तेमाल करना जरूरी हो जाता है। बरसात के दिनों में मौसम न तो बहुत ज्यादा गर्म होता है और न ही बहुत ठंडा होता है। इसलिए अतिरिक्त बिजली और महंगे उपकरणों पर होने वाला खर्च पूरी तरह से बच जाता है।
मुर्गियों के स्वास्थ्य और मृत्यु दर पर नियंत्रण
बरसात के सीजन में पोल्ट्री फार्मिंग शुरू करने का एक और बड़ा फायदा यह है कि इस दौरान मुर्गियों की मृत्यु दर भी काफी कम रहती है। अनुकूल तापमान होने की वजह से मुर्गियां कम तनाव में रहती हैं और उनके बीमार होने की आशंका घट जाती है। नए कारोबारियों के पास शुरुआत में बीमारियों से निपटने का ज्यादा अनुभव नहीं होता है। ऐसे में मौसम का यह साथ उन्हें किसी बड़े आर्थिक नुकसान से सुरक्षित रखता है। इस तरह कम जोखिम के साथ व्यापार की बारीकियां सीखना बहुत आसान हो जाता है।
फार्म की तैयारी और जगह का सही गणित
मुर्गी पालन शुरू करने से पहले सबसे महत्वपूर्ण काम उनके रहने के लिए एक सुरक्षित और हवादार शेड का निर्माण करना होता है। किसी भी फार्म की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि मुर्गियों को कैसा वातावरण मिल रहा है। भागलपुर में पोल्ट्री फार्मिंग करने वाले राजू कुमार का कहना है कि यह व्यापार जितना मुनाफे वाला है, इसके साथ उतने ही बड़े जोखिम भी जुड़े हुए हैं। मुर्गियों के बेहतर विकास के लिए उन्हें शेड के भीतर पर्याप्त जगह मिलना बहुत आवश्यक है। इससे वे आसानी से दाना-पानी खा सकती हैं और फार्म में घूम सकती हैं। जगह की कमी होने से मुर्गियों का विकास रुक सकता है।
शेड के आकार को लेकर राजू कुमार एक सीधा गणित समझाते हैं। उनके अनुसार, अगर कोई व्यक्ति शुरुआती स्तर पर 500 मुर्गियों के साथ अपना व्यवसाय शुरू करना चाहता है, तो उसे कम से कम 600 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होगी। वहीं, अगर कोई 1000 मुर्गियां पालने की योजना बना रहा है, तो उसके लिए 1200 स्क्वायर फीट का एक बड़ा शेड तैयार करना होगा। सही आकार का फार्म होने से मुर्गियों के बीच बीमारियां फैलने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है और बेहतर उत्पादन मिलता है।


















