टाटा ग्रुप के शीर्ष नेतृत्व को लेकर उपजा आंतरिक गतिरोध अब खुलकर सामने आ गया है, जिसका सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर देखने को मिला। टाटा संस के चेयरमैन पद पर एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर टाटा ट्रस्ट्स ने औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है। इस घटनाक्रम के बाद शुक्रवार के कारोबारी सत्र में टाटा समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में चौतरफा बिकवाली दर्ज की गई, जिसमें टाटा केमिकल्स और टीसीएस सबसे आगे रहे।
टाटा संस बोर्ड के फैसले पर नोएल टाटा का विरोध
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब टाटा संस के निदेशक मंडल ने एन चंद्रशेखरन को अगले पांच वर्षों के लिए दोबारा चेयरमैन पद सौंपने का प्रस्ताव पारित किया। हालांकि इस प्रस्ताव को एकमत समर्थन नहीं मिला। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस पुनर्नियुक्ति के खिलाफ मतदान किया। बोर्ड के अन्य चार निदेशकों ने चंद्रशेखरन के पक्ष में अपना मत दिया था।
मतदान के उपरांत टाटा ट्रस्ट्स की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह फैसला कंपनी के अंतर्नियमों यानी आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं है। ट्रस्ट्स का पक्ष है कि मौजूदा प्रावधानों के मद्देनजर यह प्रस्ताव कानूनी रूप से प्रभावी और मान्य नहीं माना जा सकता। इसके चलते समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी में नेतृत्व के भविष्य को लेकर असमंजस गहरा गया है।
शेयर बाजार में टाटा समूह के शेयरों पर दबाव
लीडरशिप को लेकर मचे इस घमासान के कारण निवेशकों में घबराहट देखी गई और कई कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई। टाटा केमिकल्स का शेयर लगभग 8 प्रतिशत टूटकर दिन के सबसे निचले स्तर 719 रुपये पर पहुंच गया। वहीं, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन में करीब 5 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई और इसका भाव 683 रुपये के स्तर पर आ गया।
समूह की फ्लैगशिप आईटी कंपनी टीसीएस के शेयर में भी करीब 3.5 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जिससे यह 2,118 रुपये के स्तर तक फिसल गया। इसके अतिरिक्त टाटा मोटर्स, टाटा एलेक्सी और टाटा टेक्नोलॉजीज जैसी प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी लगभग 3 प्रतिशत तक की सुस्ती देखने को मिली।
आरबीआई का कड़ा रुख और आईपीओ की चर्चा
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने टाटा संस की अनलिस्टेड और प्राइवेट इकाई बने रहने की याचिका खारिज कर दी है। केंद्रीय बैंक के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि अपर-लेयर एनबीएफसी के दायरे में आने वाली बड़ी कंपनियों को अनिवार्य रूप से सार्वजनिक तौर पर सूचीबद्ध होना पड़ेगा। इस फैसले से टाटा संस के संभावित आईपीओ की चर्चाओं ने फिर से जोर पकड़ लिया है।
होल्डिंग संरचना की बात करें तो टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स के पास लगभग 66 प्रतिशत की निर्णायक हिस्सेदारी है। दूसरी तरफ शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप कंपनी में तकरीबन 18.37 प्रतिशत का शेयरधारक है। ट्रस्ट्स की भारी हिस्सेदारी के चलते कंपनी के प्रशासनिक फैसलों में उसका रुख बेहद निर्णायक माना जाता है।
आगामी एजीएम में तय होगी आगे की राह
एन चंद्रशेखरन की आगे की भूमिका के लिए टाटा संस की आगामी वार्षिक आम बैठक यानी एजीएम बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। नियमों के अनुसार चेयरमैन की कुर्सी पर बने रहने के लिए उनका एजीएम में निदेशक के रूप में पुनः निर्वाचित होना अनिवार्य है। चूंकि टाटा ट्रस्ट्स कंपनी में सबसे बड़ा और बहुमत शेयरधारक है, इसलिए आम सभा में उसका रुख ही यह तय करेगा कि चंद्रशेखरन की ताजपोशी पर लगा यह गतिरोध किस दिशा में जाता है।


















