बरसात के दिनों में मौसमी बीमारियों का प्रकोप काफी तेजी से बढ़ता है, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग तेज बुखार की चपेट में आ जाते हैं। अक्सर मरीज हर तरह के बुखार को सामान्य वायरल फ्लू मानकर घर पर ही आराम करने या खुद दवा लेने की भूल कर बैठते हैं। इसी दौरान स्क्रब टाइफस जैसी खतरनाक बीमारी भी पैर पसारती है, जिसे शुरुआत में पहचानना बेहद मुश्किल होता है। समय रहते इसकी पहचान न होना और चिकित्सीय परामर्श में देरी मरीज के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
साधारण वायरल फ्लू और स्क्रब टाइफस में मुख्य अंतर
मऊ में केशरीराज हॉस्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमंत कुमार गुप्ता के मुताबिक, आम मौसमी बुखार के मुकाबले स्क्रब टाइफस कहीं अधिक घातक सिद्ध हो सकता है। यदि इसके लक्षणों की समय पर पहचान कर उचित इलाज न कराया जाए, तो मरीज के फेफड़ों में गंभीर संक्रमण फैलने का खतरा पैदा हो जाता है। सामान्य बुखार में आमतौर पर मरीज को सर्दी, जुकाम और खांसी जैसी सामान्य तकलीफें देखने को मिलती हैं, जबकि स्क्रब टाइफस में हालात बिल्कुल अलग होते हैं।
कीड़े के काटने के 10 से 15 दिन बाद सामने आते हैं लक्षण
डॉ. सुमंत गुप्ता का कहना है कि यह बीमारी खास तौर पर लाल घुन यानी संक्रमित कीट के काटने से फैलती है। जब यह घुन शरीर पर काटता है, तो उस स्थान पर काले रंग का एक विशेष निशान या धब्बा बन सकता है। शुरुआत में इस कीट के काटने का मरीज को बिल्कुल भी अहसास नहीं होता। संक्रमण फैलने के लगभग 10 से 15 दिनों के बाद अचानक अत्यधिक तेज बुखार चढ़ने लगता है और पूरे शरीर में असहनीय दर्द की शिकायत शुरू हो जाती है।
घास और झाड़ियों वाले ग्रामीण इलाकों में सबसे अधिक खतरा
यह समस्या विशेषकर ग्रामीण अंचलों में बहुत ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि लाल घुन आमतौर पर हरी घास और घनी झाड़ियों वाले स्थानों में पनपते हैं। ऐसे इलाकों में रहने वाले या खेतों और जंगलों की ओर जाने वाले ग्रामीणों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। अगर किसी व्यक्ति को तेज बुखार के साथ ऐसे असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए किसी योग्य चिकित्सक से जांच कराकर तुरंत चिकित्सा शुरू करनी चाहिए।
14 दिनों का दवा कोर्स और लापरवाही के बड़े जोखिम
डॉ. सुमंत के अनुसार, चिकित्सकीय जांच में स्क्रब टाइफस की पुष्टि होने के बाद मरीज को लगभग 14 दिन का संपूर्ण उपचार कोर्स कराया जाता है। समय पर दवाएं शुरू होने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। इसके विपरीत, यदि इलाज में थोड़ी भी देरी या अनदेखी की गई, तो फेफड़ों के गंभीर संक्रमण के अलावा निमोनिया और दिमागी बुखार जैसी जानलेवा जटिलताएं भी जन्म ले सकती हैं। इसलिए बरसात के मौसम में बुखार को साधारण समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।



















