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अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर दान हेराफेरी प्रकरण में SIT की पड़ताल संपन्न, जल्द पेश होगी चार्जशीटउत्तर प्रदेश
22 सित॰ 2026, 1:42 pm (38 मिनट पहले)· 2

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर दान हेराफेरी प्रकरण में SIT की पड़ताल संपन्न, जल्द पेश होगी चार्जशीट

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में गड़बड़ी मामले की जांच पूरी कर एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंप दी है, जहां 25 सितंबर 2026 तक चार्जशीट पेश की जाएगी।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले चढ़ावे और दान की धनराशि में कथित हेरफेर के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी अंतिम जांच पूरी कर ली है। सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई नवीनतम स्थिति रिपोर्ट में जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया कि संपूर्ण साक्ष्यों का संकलन समाप्त हो चुका है और 25 सितंबर 2026 तक सक्षम अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया जा सकता है। इस जांच के तहत दान कक्ष से नकदी की अनधिकृत निकासी से लेकर सोने-चांदी के उपहारों के पूरे भौतिक रिकॉर्ड का मिलान किया गया है।

एफआईआर और तकनीकी साक्ष्यों का आधार

यह पूरा कानूनी विवाद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में आने वाली दान राशि को निर्धारित नियमों के विरुद्ध बिना अनुमति निकालने और वित्तीय विसंगतियों के आरोपों के बाद सामने आया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए 25 जून 2026 को अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में कुल 8 लोगों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीकृत किया गया था। इस मामले की तह तक पहुंचने के लिए जांच दल ने आधुनिक फॉरेंसिक तरीकों, गवाहों के बयानों, बैंक खातों के लेन-देन, मोबाइल डेटा तथा गिनती कक्ष की सीसीटीवी फुटेज का गहराई से विश्लेषण किया।

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काउंटिंग रूम से 105 बार नकदी निकालने की पुष्टि

जांच एजेंसी द्वारा शीर्ष अदालत को दी गई जानकारी के अनुसार, मंदिर के पीएफसी भवन में स्थापित काउंटिंग रूम के क्लोज्ड-सर्किट टेलीविजन (सीसीटीवी) फुटेज की तकनीकी जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। फुटेज के परीक्षण में 105 ऐसे स्पष्ट मौके दर्ज किए गए, जहां गिनती कक्ष में मौजूद नकदी को बिना किसी आधिकारिक मंजूरी के निकाला गया या फिर छिपाकर बाहर ले जाया गया। इस पूरी कार्यप्रणाली में कुछ अन्य बाहरी अथवा सहयोगी कर्मियों की मिलीभगत भी पाई गई है। फुटेज और पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर ही 8 आरोपियों की भूमिका रेखांकित की गई है, जिसके बाद उनके निजी बैंक खातों में जमा राशि और अचल संपत्तियों की विस्तृत जानकारी भी रिपोर्ट का हिस्सा बनाई गई है।

लॉकर में सुरक्षित 803 बहुमूल्य वस्तुओं का सत्यापन

दान में प्राप्त बेशकीमती वस्तुओं की स्थिति स्पष्ट करते हुए जांच रिपोर्ट में बताया गया कि कुल 803 बहुमूल्य सामान की आधिकारिक रसीदों और स्टॉक पंजिकाओं की पड़ताल की गई। वर्तमान में यह सारा सामान भारतीय स्टेट बैंक के लॉकर में सुरक्षित रखा हुआ है, जहां जांच अधिकारियों ने मौके पर जाकर लॉकर का भौतिक निरीक्षण किया। इस प्रक्रिया में इन 803 वस्तुओं के मिलान में किसी भी प्रकार की कोई विसंगति या कमी नहीं पाई गई। इसके अतिरिक्त 86 ऐसी कीमती वस्तुएं भी सामने आईं, जिनकी औपचारिक रसीद जारी नहीं की गई थी, जिन्हें सूचीबद्ध कर उनका भौतिक सत्यापन अलग से पूरा किया गया।

चांदी के आभूषणों और ईंटों से जुड़े दावों की स्थिति

जांच दल ने लगभग 944.411 किलोग्राम सफेद धातु, जिसे श्रद्धालुओं द्वारा चांदी के रूप में अर्पित किया गया बताया गया था, के संपूर्ण रिकॉर्ड की भी सूक्ष्म जांच की। इस दौरान सार्वजनिक माध्यमों और सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले तरह-तरह के दावों की सत्यता जांची गई। रिपोर्ट के मुताबिक, 200 किलोग्राम और 38.288 किलोग्राम वजन वाली चांदी की ईंटों के साथ-साथ चांदी की माला, चरण पादुका तथा रामचरितमानस ग्रंथ से जुड़े समर्पण की विस्तृत जांच में किसी भी तरह की विसंगति या घपला नहीं पाया गया है।

173 गवाहों से पूछताछ और आगे की कानूनी कार्यवाही

जांच के दायरे को व्यापक बनाते हुए एसआईटी ने 14 सितंबर 2026 तक कुल 173 संबंधित व्यक्तियों के औपचारिक बयान दर्ज किए। इस पूछताछ प्रक्रिया में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े प्रशासनिक अधिकारी, लेखा अनुभाग के कर्मी, भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी, सुरक्षा बल के जवान, सीसीटीवी नेटवर्क के संचालक और अधिकृत चार्टर्ड अकाउंटेंट शामिल रहे। जांच दल ने अदालत को अवगत कराया कि मुख्य जांच पूरी होने के बावजूद यदि आरोप पत्र दाखिल होने के बाद नए तथ्य आते हैं, तो वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत पूरक जांच की जा सकती है। सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि आरोप पत्र की प्रति न्यायालय के समक्ष भी उपलब्ध कराई जाए, जिसके पश्चात इस मामले की अगली न्यायिक सुनवाई 2 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

सवाल-जवाब

एसआईटी किस मामले की जांच कर रही थी?
एसआईटी अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान की धनराशि में अनधिकृत निकासी तथा वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों की जांच कर रही थी।
मामले में आरोप पत्र कब तक दाखिल होने की उम्मीद है?
विशेष जांच दल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जांच पूरी हो चुकी है और 25 सितंबर 2026 तक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।
सीसीटीवी फुटेज की जांच में क्या तथ्य सामने आए?
पीएफसी भवन के काउंटिंग रूम की सीसीटीवी फुटेज में 105 बार नकदी को बिना अनुमति निकालने या छिपाने के मामले दर्ज पाए गए।
क्या चांदी या बहुमूल्य सामान के चढ़ावे में कोई गड़बड़ी पाई गई?
जांच में भारतीय स्टेट बैंक के लॉकर में रखे 803 कीमती सामान और लगभग 944.411 किलो चांदी के रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी नहीं मिली।
इस मामले में कितने गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं?
एसआईटी ने 14 सितंबर 2026 तक ट्रस्ट अधिकारियों, बैंककर्मियों और सुरक्षा स्टाफ सहित कुल 173 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने चार्जशीट की एक प्रति पेश करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को तय की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·14 मिनट पहले

दान में हेराफेरी की बात गले नहीं उतर रही। जब हर चीज सीसीटीवी की निगरानी में थी और गिनती के वक्त इतने कैमरे लगे थे, तो फिर आठ लोग इतनी बार पैसे कैसे निकाल ले गए? कहीं सुरक्षा व्यवस्था में चूक पर पर्दा तो नहीं डाला जा रहा है?

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 मिनट पहले

रोहन, सीसीटीवी फुटेज में 105 बार पैसे निकालने की बात है, तो क्या सुरक्षा में तैनात गार्ड्स या अफसरों से भी पूछताछ हुई है?

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