वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर एक बार फिर मजबूती के रास्ते पर अग्रसर दिखाई दे रहा है। फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीति में सख्ती शुरू करने के ताजा फैसले के बाद डॉलर इंडेक्स ने महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर 100.00 को पार कर लिया है। अगस्त की शुरुआत के बाद यह पहला मौका है जब डॉलर इंडेक्स इस स्तर के ऊपर कारोबार करता देखा गया है। विश्लेषकों के अनुसार अब मुद्रा बाजार की निगाहें 24 जून के उच्चतम स्तर 101.80 पर टिकी हैं, जो तकनीकी मोर्चे पर अगला बड़ा अवरोध माना जा रहा है।
ट्रेजरी यील्ड में उछाल और ब्याज दरों का अनुमान
अमेरिकी डॉलर को सबसे बड़ा सहारा सरकारी बॉन्ड की प्रतिफल दरों में आ रहे तेज उछाल से मिल रहा है। बीते महीने के उत्तरार्ध से लेकर अब तक 2-वर्षीय यूएस ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में लगभग 55 आधार अंकों की जोरदार बढ़त दर्ज की जा चुकी है। यह बदलाव दर्शाता है कि निवेशक और कारोबारी अब फेडरल रिजर्व के लंबे खिंचने वाले ब्याज दर वृद्धि चक्र की तैयारी कर रहे हैं। अमेरिकी ब्याज दर बाजार का मौजूदा आकलन बताता है कि केंद्रीय बैंक आने वाले एक साल के भीतर नीतिगत दरों में तीन और बार बढ़ोतरी कर सकता है।
इन कयासों को क्षेत्रीय फेड अध्यक्षों के बयानों से और अधिक बल मिला है। शिकागो फेड के अध्यक्ष गूल्सबी, जो अगले वर्ष से एक बार फिर मतदान करने वाले सदस्य बनेंगे, उन्होंने आगाह किया कि आपूर्ति पक्ष के झटके अब पहले से कहीं अधिक बार आ रहे हैं, ज्यादा गहरा असर छोड़ रहे हैं और लंबे समय तक बने रह रहे हैं।
गूल्सबी के मुताबिक, यह बेहद जरूरी है कि नीति महंगाई पर एक सार्थक लगाम लगाए।
गूल्सबी का मानना है कि बाद में अचानक और बड़े पैमाने पर सख्त कदम उठाने की तुलना में शुरुआत में ही धीरे-धीरे नीतिगत सख्ती करना कम विघटनकारी साबित होता है। उनका आकलन है कि वर्तमान नीतिगत दर अभी भी समायोजन के दायरे में बनी हुई है।
जापानी येन और बैंक ऑफ जापान का बड़ा फैसला
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यूएसडी/जेपीवाई 157.50 के स्तर के करीब मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप की आशंकाओं ने येन में संभावित गिरावट को कुछ हद तक सीमित रखा है। हालांकि बैंक ऑफ जापान द्वारा 31 साल के उच्च स्तर पर की गई ब्याज दर वृद्धि के बावजूद येन की तेजी कमजोर बनी रही। बैंक ऑफ जापान ने अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। यह कदम मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और पड़ाव है, जिसकी बाजार कई हफ्तों से पहले ही उम्मीद कर रहा था। दूसरी ओर फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और भू-राजनीतिक तनाव ने अमेरिकी डॉलर को अतिरिक्त मजबूती दी है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अन्य मुद्राओं की स्थिति
एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7100 के स्तर से ऊपर खरीदारी आकर्षित की। इस मजबूती के पीछे रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक के कड़े बयानों का हाथ रहा। हालांकि मध्य पूर्व में गहराते तनाव और फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने अमेरिकी डॉलर के सकारात्मक रुख को बरकरार रखा है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त पर लगाम लगने की संभावना बनी हुई है। इसके साथ ही इस सप्ताह के उत्तरार्ध में होने वाली महत्वपूर्ण ट्रंप-शी शिखर वार्ता भी बाजार के केंद्र में बनी हुई है।
सोने और कच्चे तेल के बाजार का रुख
कमोडिटी बाजार में सोने पर बिकवाली का दबाव देखा गया। एशियाई सत्र में मामूली तेजी दिखाने के बाद पीली धातु फिसलकर 4,350 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गई, हालांकि निचली दरों पर नुकसान सीमित नजर आया। फेडरल रिजर्व के कड़े मौद्रिक रुख और बढ़ती यील्ड को गैर-उपज वाली इस सुरक्षित संपत्ति पर दबाव का मुख्य कारण माना जा रहा है।
दूसरी ओर कच्चे तेल के बाजार में सुधार के संकेत देखने को मिले। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट चार दिनों से जारी गिरावट के सिलसिले को तोड़ते हुए संभला। पिछले दिन 91.00 डॉलर से नीचे गिरकर लगभग दो सप्ताह के निचले स्तर को छूने के बाद कच्चा तेल करीब 1.40 प्रतिशत की दैनिक बढ़त के साथ 93.00 डॉलर के करीब कारोबार करता दिखाई दिया। तेल बाजार के कारोबारी भी मध्य पूर्व के संकट और आपूर्ति से जुड़े घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।


















