अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड यूरो के मुकाबले एक निश्चित दायरे में कारोबार कर रहा है। सितंबर की शुरुआत से ही EUR/GBP की जोड़ी 0.855 से 0.860 के बीच एक बेहद सीमित दायरे में फंसी हुई है। बैंक ऑफ इंग्लैंड की पिछली नीतिगत बैठक यूरोपीय सेंट्रल बैंक या फेडरल रिजर्व जितनी सख्त नहीं रही, लेकिन केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को बढ़ाने को लेकर वित्तीय बाजारों में लगाई जा रही आक्रामक उम्मीदों पर भी लगाम लगाने में पूरी तरह असफल रहा। इसी गतिरोध के चलते पाउंड का रुख बंधा हुआ नजर आ रहा है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की दरों पर दांव और बजट का असर
वित्तीय बाजार वर्तमान में इस बात की 75 प्रतिशत संभावना जता रहे हैं कि बैंक ऑफ इंग्लैंड नवंबर में अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। इसके साथ ही अगले साल जून तक दरों में कुल 92 बेसिस प्वाइंट्स के बड़े इजाफे की संभावना का आकलन किया जा रहा है। हालांकि अर्थशास्त्रियों का अनुमान इसके ठीक विपरीत है, जहां उनका मानना है कि आगे दरों में कोई वृद्धि नहीं होगी। यह विरोधाभास ब्रिटिश पाउंड के लिए मंदी यानी कमजोरी का परिदृश्य तैयार करता है।
आने वाले हफ्तों में ब्रिटेन के अक्टूबर बजट के ब्योरे भी सामने आएंगे। मौजूदा समय में पाउंड के मूल्यांकन में किसी भी प्रकार का राजकोषीय जोखिम प्रीमियम शामिल नहीं दिखता है। केंद्रीय बैंकों के नीतिगत रुझान और अर्थशास्त्रियों के आकलन के आधार पर EUR/GBP के 0.870 के स्तर तक चढ़ने की उम्मीद बनी हुई है।
एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन की स्थिति
मंगलवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने मजबूती दिखाई और AUD/USD 0.7100 के पार निकल गया। इस उछाल को रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की असिस्टेंट गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक की सख्त टिप्पणियों से समर्थन मिला। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दे रखी है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त सीमित हो सकती है। वैश्विक निवेशकों की नजर इस सप्ताह होने वाले अहम ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन पर भी टिकी हुई है।
दूसरी ओर, USD/JPY की जोड़ी मंगलवार को मामूली बढ़त के साथ 157.50 के आसपास कारोबार करती नजर आई। जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंका ने जापानी येन में बड़ी गिरावट को रोकने में मदद की है। बैंक ऑफ जापान द्वारा 31 साल के उच्चतम स्तर पर दरें बढ़ाने के बावजूद इसका रुख नरम माना जा रहा है, जिससे येन पर दबाव बना हुआ है। फेडरल रिजर्व के सख्त तेवर और पश्चिम एशिया के तनाव से अमेरिकी डॉलर को मिल रही मजबूती USD/JPY को ऊपर बनाए रखने में मदद कर रही है।
बैंक ऑफ जापान का ऐतिहासिक फैसला
बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय कई हफ्तों से वित्तीय बाजारों की आम उम्मीदों के पूरी तरह अनुरूप रहा। इसके बावजूद नीतिगत रुख में नरमी के संकेत बने रहने के कारण येन में अपेक्षित मजबूती देखने को नहीं मिली।
सोने की कीमतों में गिरावट और बिटकॉइन में ठहराव
कीमती धातुओं के बाजार में मंगलवार को यूरोपीय सत्र से पहले सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबारी सत्र में मामूली बढ़त हासिल करने के बाद सोना फिसलकर 4,315 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया, जो इसका तीन दिनों का निचला स्तर है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त नीतिगत रुख के कारण बिना ब्याज वाली पीली धातु से निवेशकों की निकासी जारी है, जिसका सीधा असर सोने के भाव पर पड़ा है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में पिछले दिन 6.7 प्रतिशत की जोरदार छलांग लगाने के बाद बिटकॉइन की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है। मंगलवार को बिटकॉइन में हल्का सुधार देखा गया और यह 85,500 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहा था। हालांकि, संस्थागत मांग की मजबूती अभी भी बाजार को सहारा दे रही है। सोमवार को स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ में करीब 1 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया, जबकि स्ट्रैटेजी ने अपने खजाने में 950 बीटीसी और जोड़े हैं।
















