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कच्चे तेल में तेजी और यूरोपीय राजनीतिक हलचल से गिरा यूरो, कैनेडियन डॉलर मजबूतबाज़ार
22 सित॰ 2026, 1:57 pm (36 मिनट पहले)· 0

कच्चे तेल में तेजी और यूरोपीय राजनीतिक हलचल से गिरा यूरो, कैनेडियन डॉलर मजबूत

यूरोपीय बाजारों में राजनीतिक अनिश्चितता और कच्चे तेल के बढ़ते दामों के बीच यूरो में गिरावट दर्ज की गई, जबकि कैनेडियन डॉलर मजबूत हुआ है। वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक बैठकों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में तीन दिनों की लगातार बढ़त के बाद यूरो के मुकाबले कैनेडियन डॉलर में मजबूती देखी गई। मंगलवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के शुरुआती घंटों में यूरो और कैनेडियन डॉलर की विनिमय दर 1.6080 के आसपास कारोबार करती नजर आई। तेल की ऊंची कीमतों से कमोडिटी से जुड़ी कनाडाई मुद्रा को सीधा समर्थन मिला है, जिससे एकल यूरोपीय मुद्रा पर दबाव बना हुआ है। निवेशक इस समय न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान होने वाले संभावित कूटनीतिक घटनाक्रमों पर भी बारीकी से नजर बनाए हुए हैं, खासकर तब जब सप्ताहांत में ऊर्जा आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित तरीके से गुजरी है।

संयुक्त राष्ट्र में वैश्विक कूटनीति और अमेरिकी पहल

भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का केंद्र इस समय संयुक्त राष्ट्र महासभा बना हुआ है, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप महासभा को संबोधित करने वाले हैं। उनके आधिकारिक कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक चर्चाएं शामिल हैं। इनमें ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के साथ एक संभावित अलग मुलाकात के अलावा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य खाड़ी देशों के नेताओं के साथ सप्ताह भर चलने वाली बैठकें शामिल हैं। इन कूटनीतिक पहलों के साथ-साथ ट्रंप प्रशासन ने पश्चिम एशिया में युद्ध से क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण में मदद के लिए 5 अरब डॉलर का कोष स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम क्षेत्र में स्थिरता लाने और तनाव घटाने के प्रयासों से जुड़ा है।

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यूरोप में राजनीतिक दबाव और बॉन्ड यील्ड का अंतर

यूरो पर दबाव केवल विदेशी मुद्रा समीकरणों के कारण ही नहीं है, बल्कि घरेलू राजनीतिक हालात भी इसे प्रभावित कर रहे हैं। जर्मनी में धुर दक्षिणपंथी एएफडी की राज्य चुनाव में जीत के बाद चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के नेतृत्व पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। इस राजनीतिक उथल-पुथल ने निवेशकों के भरोसे को झटका दिया है। इसके अलावा, फ्रांस और जर्मनी के बॉन्ड यील्ड के बीच का अंतर भी चिंता का सबब बन गया है। आईएनजी के विश्लेषकों का कहना है कि जर्मन बंड्स के मुकाबले फ्रांस का 10-वर्षीय स्प्रेड 100 बेसिस पॉइंट के स्तर पर पहुंच चुका है। आईएनजी के अनुसार, मुद्रा बाजार फिलहाल इस बदलाव को सतर्कता के साथ देख रहा है, लेकिन यील्ड स्प्रेड के और बढ़ने का जोखिम बना हुआ है, जिससे यूरो को आने वाले समय में इस मोर्चे पर अधिक ध्यान देना पड़ सकता है।

वैश्विक वित्तीय ढांचे में यूरो की हैसियत और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की भूमिका

यूरोपीय संघ के 20 सदस्य देश यूरो का इस्तेमाल करते हैं, जो सामूहिक रूप से यूरोजोन कहलाते हैं। अमेरिकी डॉलर के बाद यूरो दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाली मुद्रा है। वर्ष 2022 में, दुनिया भर के सभी विदेशी मुद्रा लेनदेन में यूरो की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत थी, जिसका औसत दैनिक कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा। इस बाजार में EUR/USD सबसे बड़ा करेंसी पेयर है, जिसकी कुल लेनदेन में अनुमानित 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके बाद EUR/JPY का 4 प्रतिशत, EUR/GBP का 3 प्रतिशत और EUR/AUD का 2 प्रतिशत योगदान है।

जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक यूरोजोन का केंद्रीय रिजर्व बैंक है। यह बैंक ब्याज दरों का निर्धारण करता है और मौद्रिक नीति का प्रबंधन संभालता है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक का मुख्य अधिदेश मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका मतलब मुद्रास्फीति पर नियंत्रण या आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित करना होता है। इसका प्राथमिक हथियार नीतिगत ब्याज दरों में फेरबदल करना है। आम तौर पर ऊंची ब्याज दरें या भविष्य में दरें बढ़ने की उम्मीद यूरो के लिए फायदेमंद साबित होती है, जबकि दरें घटने पर उलटा असर पड़ता है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार बैठकें आयोजित करके मौद्रिक नीतियां तय करती है। इन निर्णयों में यूरोजोन के राष्ट्रीय बैंकों के प्रमुख और बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड सहित छह स्थायी सदस्य मतदान करते हैं।

आर्थिक संकेतकों और ट्रेड बैलेंस का मुद्रा पर प्रभाव

यूरोजोन में महंगाई के आंकड़े यूरो के लिए सबसे महत्वपूर्ण पैमाना होते हैं, जिन्हें हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज के माध्यम से मापा जाता है। यदि मुद्रास्फीति उम्मीद से अधिक बढ़ती है, विशेष रूप से केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो बैंक को इसे नियंत्रित करने के लिए दरें बढ़ाने पर विवश होना पड़ता है। दुनिया के अन्य देशों की तुलना में अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करती हैं, जिससे यूरो में पूंजी प्रवाह बढ़ता है।

इसके साथ ही जीडीपी, विनिर्माण एवं सेवा पीएमआई, रोजगार के आंकड़े और उपभोक्ता भावना जैसे आर्थिक संकेतक भी मुद्रा की चाल तय करते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था यूरो को सहारा देती है, जिससे विदेशी निवेश बढ़ता है। यूरोजोन के चार सबसे बड़े देशों जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन के आर्थिक आंकड़े विशेष महत्व रखते हैं, क्योंकि ये चारों मिलकर पूरे यूरोजोन की अर्थव्यवस्था का 75 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। इसके अलावा ट्रेड बैलेंस यानी व्यापार संतुलन भी अहम भूमिका निभाता है। यह देश द्वारा किए गए निर्यात से हुई कमाई और आयात पर हुए खर्च के बीच का अंतर दर्शाता है। यदि किसी देश के निर्यात की मांग अधिक होती है, तो खरीदारों को उत्पाद खरीदने के लिए उस मुद्रा की जरूरत पड़ती है, जिससे शुद्ध सकारात्मक व्यापार संतुलन मुद्रा को ताकत देता है।

अन्य वैश्विक बाजारों और कमोडिटी में हलचल

वैश्विक बाजार के अन्य हिस्सों में भी व्यापक उतार-चढ़ाव देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर का युग्म एशियाई सत्र में 0.7100 के ऊपर चढ़ गया, जिसे रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक के कड़े बयानों से बल मिला। हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक दृष्टिकोण ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी है, जिससे इस जोड़ी की बढ़त सीमित रह सकती है। इधर सप्ताह के अंत में ट्रंप और शी जिनपिंग की प्रस्तावित बैठक पर भी बाजार केंद्रित है।

डॉलर और येन की जोड़ी 157.50 के स्तर के करीब कारोबार कर रही है। बैंक ऑफ जापान द्वारा हस्तक्षेप की आशंका से जापानी येन में बड़ी गिरावट थमी है। बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर का लक्ष्य 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जो 31 साल का उच्चतम स्तर है। हालांकि इस कदम को व्यापक रूप से पहले से तय माना जा रहा था। सोने के बाजार में एशियाई सत्र की हल्की तेजी के बाद बिकवाली लौटी और यह 4,350 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया, जिस पर फेडरल रिजर्व के रुख का असर दिख रहा है। उधर कच्चे तेल के मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट ने चार दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा। पिछले दिन लगभग दो सप्ताह के निचले स्तर यानी 91.00 डॉलर से नीचे जाने के बाद यह 1.40 प्रतिशत चढ़कर 93.00 डॉलर के स्तर के ठीक नीचे कारोबार करता दिखा।

सवाल-जवाब

यूरो और कैनेडियन डॉलर की विनिमय दर में क्या बदलाव आया है?
तीन दिनों की लगातार बढ़त के बाद यूरो कमजोर हुआ और कैनेडियन डॉलर के मुकाबले 1.6080 के स्तर के करीब आ गया।
कैनेडियन डॉलर में तेजी की मुख्य वजह क्या है?
कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी से कमोडिटी से जुड़ी कनाडाई मुद्रा को मजबूती मिली है।
जर्मनी के राजनीतिक घटनाक्रम का यूरो पर क्या असर पड़ा?
जर्मनी में धुर दक्षिणपंथी एएफडी की चुनावी जीत के बाद चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के नेतृत्व पर अनिश्चितता बढ़ने से यूरो पर दबाव देखा गया।
फ्रांस और जर्मनी के बॉन्ड स्प्रेड पर विश्लेषकों की क्या राय है?
आईएनजी के अनुसार फ्रांस का 10-वर्षीय यील्ड स्प्रेड जर्मन बंड्स के मुकाबले 100 बेसिस पॉइंट तक पहुंच गया है, जिससे जोखिम बढ़ने की संभावना है।
बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला किया?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जो 31 साल का उच्च स्तर है।
कच्चे तेल और सोने के भाव किस स्तर पर पहुंचे हैं?
डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल लगभग 1.40 प्रतिशत चढ़कर 93.00 डॉलर के पास पहुंच गया, जबकि सोना फिसलकर 4,350 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया।
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