अगर आपने इस साल नई टैक्स रिजीम चुनी है और यह मान लिया है कि अब टैक्स बचाने का कोई रास्ता नहीं बचा, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद काम की है. नई टैक्स रिजीम में पुरानी व्यवस्था वाले 80C जैसे डिडक्शन जरूर नहीं मिलते, लेकिन सही जानकारी हो तो स्टैंडर्ड डिडक्शन, एम्प्लॉयर के NPS योगदान, रोजमर्रा के रीइम्बर्समेंट और कई अन्य बेनिफिट्स के जरिए अच्छी-खासी टैक्स बचत अब भी पूरी तरह संभव है.
बिना किसी कागज के मिलते हैं ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन
नई टैक्स रिजीम चुनने वाले नौकरीपेशा कर्मचारियों और पेंशनर्स को सरकार की ओर से ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है. इस छूट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके लिए न कोई बिल दिखाना होता है, न रसीद जमा करनी होती है और न ही खर्च का कोई प्रमाण देना पड़ता है. यह छूट अपने आप टैक्सेबल इनकम से घटा दी जाती है.
धारा 80CCD(2): एम्प्लॉयर का NPS योगदान है सबसे असरदार तरीका
नई टैक्स रिजीम में टैक्स घटाने का सबसे दमदार जरिया है इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80CCD(2). अगर आपकी कंपनी आपके नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) अकाउंट में पैसा डालती है, तो उस पूरी रकम पर कोई टैक्स नहीं लगता. यह छूट बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) के 14 फीसदी तक मिलती है. उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए मिलाकर ₹12 लाख है, तो कंपनी की ओर से ₹1.68 लाख तक का NPS योगदान पूरी तरह टैक्स-फ्री होगा. सबसे अहम बात यह है कि यह फायदा ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन के अतिरिक्त और उससे ऊपर अलग से मिलता है.
EPF और सुपरएन्युएशन फंड में ₹7.5 लाख की सीमा का रखें ख्याल
कंपनी की ओर से आपके ईपीएफ अकाउंट में जमा की जाने वाली रकम पर भी एक तय सीमा तक टैक्स बेनिफिट मिलता है. लेकिन यहां एक जरूरी बात यह है कि EPF, NPS और सुपरएन्युएशन फंड तीनों में कंपनी का सालाना कुल योगदान अगर ₹7.5 लाख से ऊपर जाता है, तो उस अतिरिक्त रकम पर टैक्स देना होगा.
किराए की प्रॉपर्टी पर होम लोन का ब्याज भी काटें
अगर आपके पास कोई प्रॉपर्टी है जिसे आपने किराए पर दे रखा है और उस पर होम लोन भी चल रहा है, तो नई टैक्स रिजीम में भी उस लोन के ब्याज पर डिडक्शन का दावा किया जा सकता है. यह विकल्प उन लोगों के लिए खासा फायदेमंद है जिनकी रेंटल प्रॉपर्टी पर कर्ज बाकी है.
फूड कूपन और डेली रीइम्बर्समेंट पर भी मिलती है राहत
कंपनी की ओर से मिलने वाले कई रोजमर्रा के भत्ते और बेनिफिट्स नई टैक्स रिजीम में भी टैक्स के दायरे से बाहर हैं. टैक्स ईयर 2026-2027 के लिए, एम्प्लॉयर द्वारा दिए जाने वाले फ्री मील, नॉन-अल्कोहलिक बेवरेज या रेस्टोरेंट और कैफे में चलने वाले फूड कूपन पर रोजाना लगभग ₹200 तक की टैक्स छूट मिलती है.
मोबाइल और इंटरनेट का बिल पूरी तरह टैक्स-फ्री
ऑफिशियल काम के लिए इस्तेमाल होने वाले मोबाइल, इंटरनेट और ब्रॉडबैंड के बिलों का रीइम्बर्समेंट नई टैक्स रिजीम में पूरी तरह टैक्स-फ्री है. इसके लिए आपको कंपनी में ओरिजिनल बिल जमा करना होगा. इसके अलावा, कंपनी की ओर से काम के लिए दिए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और उनकी इंश्योरेंस की सुविधाएं भी टैक्स-फ्री श्रेणी में आती हैं.
ऑफिशियल ड्यूटी अलाउंस: इन पर अब भी बरकरार है छूट
नई टैक्स रिजीम में भले ही ज्यादातर अलाउंस टैक्सेबल हो चुके हैं, लेकिन ऑफिशियल ड्यूटी से जुड़े कुछ खास भत्तों पर छूट अभी भी जारी है. बिजनेस ट्रैवल अलाउंस, ट्रांसफर के दौरान होने वाले खर्च, ड्यूटी के दौरान रोजाना के फुटकर खर्च, दिव्यांग कर्मचारियों को मिलने वाला ट्रांसपोर्ट अलाउंस और यूनिफॉर्म मेंटनेंस अलाउंस, ये सभी अब भी टैक्स-फ्री हैं.
फैमिली पेंशन पर भी मिलती है डिडक्शन
नई टैक्स रिजीम का फायदा सिर्फ नौकरीपेशा लोगों तक सीमित नहीं है. परिवार के जो सदस्य फैमिली पेंशन पाते हैं, वे भी इस व्यवस्था के तहत राहत पा सकते हैं. ऐसे मामलों में प्राप्त होने वाली पेंशन का एक-तिहाई हिस्सा या अधिकतम ₹25,000, जो भी कम हो, उस पर डिडक्शन का लाभ लिया जा सकता है.













