धान की खेती करने वाले किसान हमेशा ऐसी किस्मों की तलाश में रहते हैं जो कम समय में पककर तैयार हो जाएं, बेहतरीन पैदावार दें और बाजार में जिनका भाव किसानों की जेब को राहत पहुंचाए। उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में इन दिनों 'पूसा बासमती 1509' किस्म किसानों के बीच खासी लोकप्रिय हो रही है। रामपुर के कई किसान पिछले कई सालों से लगातार इस किस्म की बुवाई कर रहे हैं और इससे मुनाफा कमा रहे हैं। इसी क्रम में स्थानीय किसान जाहिर अली ने इस सीजन में सवा एकड़ जमीन पर पूसा बासमती 1509 की रोपाई की है। उनका अनुभव बताता है कि सही देखभाल और प्रबंधन से इस धान की फसल से प्रति एकड़ लगभग 25 क्विंटल तक उत्पादन मिल जाता है। वर्तमान बाजार दरों की बात करें तो धान मंडी में करीब 4,000 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक रहा है, जबकि इससे तैयार चावल का खुदरा और थोक बाजार में भाव लगभग 120 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रहा है।
115 से 120 दिनों में फसल पककर तैयार
पूसा बासमती 1509 की सबसे प्रमुख और आकर्षित करने वाली विशेषता इसका बेहद कम समय में पककर तैयार हो जाना है। सामान्य तौर पर पारंपरिक बासमती और अन्य लंबी अवधि वाली धान की फसलें पकने में काफी अधिक समय लेती हैं, लेकिन यह किस्म मात्र 115 से 120 दिनों के भीतर कटाई के लिए तैयार हो जाती है। कम समय में फसल तैयार होने से किसानों को खेत जल्दी खाली करने का अवसर मिल जाता है। फसल चक्र के दृष्टिकोण से यह विशेषता बेहद महत्वपूर्ण साबित होती है, क्योंकि किसान धान की कटाई के तुरंत बाद बिना किसी देरी के अगली रबी फसल की तैयारी शुरू कर सकते हैं और सही समय पर बुवाई करके दूसरी फसलों से भी बेहतर लाभ कमा सकते हैं।
प्रति एकड़ 25 क्विंटल तक शानदार पैदावार
उत्पादन के मामले में भी पूसा बासमती 1509 किसानों की उम्मीदों पर खरी उतर रही है। रामपुर के किसान जाहिर अली के अनुसार, उन्नत तकनीकों और सही समय पर खाद-पानी देने से एक एकड़ खेत से औसतन 25 क्विंटल तक धान प्राप्त किया जा सकता है। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों और किसानों का मानना है कि वास्तविक पैदावार हर खेत की मिट्टी की गुणवत्ता, स्थानीय मौसम की स्थितियों, सिंचाई व्यवस्था, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और खेती के तरीकों पर निर्भर करती है। यदि किसान शुरुआत से ही फसल की उचित देखभाल करें और समय पर कीट नियंत्रण करें, तो पैदावार के आंकड़े को अधिकतम स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।
4,000 रुपये क्विंटल के भाव से तगड़ा आर्थिक मुनाफा
इस सीजन में पूसा बासमती 1509 लगाने वाले किसानों की खुशी की मुख्य वजह इसकी बिक्री पर मिलने वाला शानदार बाजार मूल्य है। वर्तमान में किसानों को इस बासमती धान का भाव लगभग 4,000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा है। यदि गणितीय हिसाब से देखा जाए, तो प्रति एकड़ 25 क्विंटल उत्पादन होने पर धान की बिक्री से प्राप्त कुल सकल आय लगभग 1,00,000 रुपये बैठती है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह 1 लाख रुपये केवल धान की बिक्री से मिलने वाला सकल राजस्व है। इसमें से बीज की कीमत, खाद, कीटनाशक, सिंचाई का खर्च, मजदूरी, कटाई और परिवहन जैसी कृषि लागतों को घटाने के बाद किसान का शुद्ध मुनाफा तय होता है। इसके बावजूद, यह भाव किसानों को एक बेहतर आर्थिक रिटर्न प्रदान कर रहा है।
बाजार में 120 रुपये किलो तक चावल का भाव
धान के अलावा, इससे तैयार बासमती चावल की मांग भी बाजार में काफी मजबूत बनी हुई है। किसान जाहिर अली के मुताबिक, पूसा बासमती 1509 से निकलने वाला चावल बाजार में करीब 120 रुपये प्रति किलो के स्तर तक बिक रहा है। बासमती चावल की खपत केवल घरेलू भारतीय बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसकी भारी मांग रहती है। यही कारण है कि व्यापारी और खरीदार अच्छी गुणवत्ता वाले बासमती चावल के लिए प्रीमियम दाम देने को तैयार रहते हैं। जब चावल की गुणवत्ता उत्कृष्ट होती है और किसानों को सही मंडी मिल जाती है, तो उन्हें अपनी मेहनत का पूरा और वाजिब दाम प्राप्त होता है।
अर्ध बौनी किस्म होने से फसल गिरने का जोखिम कम
पूसा बासमती 1509 की एक और शारीरिक विशेषता इसका अर्ध बौना पौधे का ढांचा होना है। इस किस्म के पौधे अपेक्षाकृत छोटे, मजबूत और सीधे खड़े रहने वाले होते हैं। लंबी धान की किस्मों में अक्सर यह समस्या देखी जाती है कि पकने के समय या भारी बालियां आने पर पौधे जमीन पर गिर जाते हैं, जिसे लॉजिंग कहा जाता है। पौधे गिरने से दाने खराब हो जाते हैं और कटाई में भारी परेशानी आती है। अर्ध बौनी किस्म होने के कारण पूसा बासमती 1509 में लॉजिंग का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है। इससे किसानों को कटाई और देखभाल के समय राहत मिलती है। हालांकि, मौसम की अत्यधिक मार जैसे कि तेज आंधी, मूसलाधार बारिश या खेत में अत्यधिक नाइट्रोजन खाद के इस्तेमाल की स्थिति में फसल गिरने की आशंका फिर भी बनी रहती है।
कम सिंचाई और सीमित संसाधनों में बेहतर विकल्प
पूसा बासमती 1509 के कम समय में तैयार होने का सीधा फायदा सिंचाई प्रबंधन पर भी पड़ता है। चूंकि फसल केवल 115 से 120 दिनों में पूरी हो जाती है, इसलिए लंबी अवधि वाली धान की किस्मों की तुलना में इसे कम बार पानी देने की आवश्यकता पड़ती है। इससे न केवल किसानों के ट्यूबवेल या पंपिंग सेट का डीजल और बिजली का खर्च बचता है, बल्कि भूजल संसाधनों का संरक्षण भी होता है। जिन क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता सीमित है या जो किसान पानी की बचत करते हुए धान के बाद जल्दी दूसरी नकदी फसल उगाना चाहते हैं, उनके लिए पूसा बासमती 1509 एक बेहद उपयोगी, टिकाऊ और व्यावहारिक विकल्प साबित हो रही है।


















