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संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के तंज पर राहुल गांधी का पलटवार, तीन साल से महिला आरक्षण कानून अटकने पर उठाए सवालराजनीति
8 अग॰ 2026, 12:01 pm (3 घंटे पहले)· 2

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के तंज पर राहुल गांधी का पलटवार, तीन साल से महिला आरक्षण कानून अटकने पर उठाए सवाल

महिलाओं की आजादी पर राहुल गांधी के बयान के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे हृदय परिवर्तन बताते हुए महिला आरक्षण का समर्थन करने को कहा, जिस पर राहुल गांधी ने 2023 में पारित कानून के कार्यान्वयन में तीन साल की देरी और परिसीमन की शर्त पर सवाल खड़े किए।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच सोशल मीडिया पर हुई तीखी बहस ने देश की राजनीति में महिला सशक्तिकरण और संसदीय प्रतिनिधित्व के मुद्दे को एक बार फिर गरमा दिया है। राहुल गांधी द्वारा महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकारों को लेकर जारी किए गए एक वीडियो संदेश के बाद, किरेन रिजिजू ने इसे कांग्रेस के दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव बताते हुए बिना शर्त महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने की बात कही। इसके जवाब में राहुल गांधी ने याद दिलाया कि वर्ष 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पास किए जा चुके इस कानून को तीन साल का समय बीत जाने के बाद भी सरकार ने लागू क्यों नहीं किया है और इसे परिसीमन की शर्त से क्यों बांधा जा रहा है।

राहुल गांधी का सोशल मीडिया संदेश और महिला स्वतंत्रता पर विचार

इस पूरे विवाद की शुरुआत राहुल गांधी के उस वीडियो संदेश से हुई, जिसमें उन्होंने भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति और उनके अधिकारों पर विस्तार से चर्चा की थी। राहुल गांधी ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि देश की महिलाओं की क्षमता और ऊर्जा को पितृसत्तात्मक सोच और सामाजिक पाबंदियों के कारण दबाया नहीं जाना चाहिए। उनके अनुसार, भारत की महिलाओं को अपने जीवन से जुड़े फैसले खुद लेने, स्वतंत्रतापूर्वक अपनी राय व्यक्त करने और अपनी रुचि तथा आकांक्षाओं के अनुसार आगे बढ़ने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए।

राहुल गांधी ने अपने वक्तव्य में इस बात पर विशेष जोर दिया कि महिला सशक्तिकरण को केवल राजनीति या कॉर्पोरेट क्षेत्र तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि असली सशक्तिकरण तब संभव होगा जब महिलाओं को घर के भीतर अपनी बात रखने, सार्वजनिक स्थलों और सड़कों पर सुरक्षित महसूस करने तथा जिन मुद्दों से वे असहमत हैं, उन पर निर्भीकता से सवाल उठाने का अधिकार होगा। उन्होंने पुरुषों के कठोर नियंत्रण और पितृसत्तात्मक मानसिकता को राष्ट्र की समग्र प्रगति में एक बड़ी बाधा करार दिया और कहा कि यदि भारत को एक सफल और समृद्ध देश बनना है, तो महिलाओं को नीतिगत और सामाजिक बातचीत के केंद्र में लाना अनिवार्य है।

किरेन रिजिजू का तंज और 'हृदय परिवर्तन' की टिप्पणी

राहुल गांधी के इस वीडियो संदेश के सामने आने के तुरंत बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया दी। रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान को एक राजनीतिक अवसर के रूप में देखते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी के संदेश को सकारात्मक करार दिया और कहा कि ऐसा लगता है कि महिलाओं के प्रति राहुल गांधी के नजरिए में एक स्पष्ट बदलाव आया है।

किरेन रिजिजू ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह कांग्रेस पार्टी की ओर से एक सकारात्मक संदेश लगता है। उन्होंने राहुल गांधी में महिलाओं के प्रति विचार में आए बदलाव का जिक्र करते हुए उम्मीद जताई कि अब कांग्रेस पार्टी बिना किसी पूर्व शर्त के महिला आरक्षण विधेयक का पूरा समर्थन करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, संसदीय कार्य मंत्री का यह बयान केवल एक सामान्य टिप्पणी नहीं था, बल्कि यह विपक्ष को घेरने और महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाने की एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति थी।

राहुल गांधी का पलटवार: 2023 के कानून और परिसीमन पर सवाल

किरेन रिजिजू की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देने में राहुल गांधी ने भी बिल्कुल देर नहीं की। उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री के पद का हवाला देते हुए तीखा पलटवार किया। राहुल गांधी ने कहा कि किरेन रिजिजू से बेहतर यह बात कौन जान सकता है कि महिला आरक्षण विधेयक संसद से पहले ही पास हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2023 में जब यह विधेयक संसद में पेश किया गया था, तब कांग्रेस पार्टी ने इसका पूरी ताकत और सर्वसम्मति के साथ समर्थन किया था।

राहुल गांधी ने सीधे सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब संसद तीन साल पहले ही इस कानून को सर्वसम्मति से मंजूरी दे चुकी थी, तो इसे अब तक जमीनी स्तर पर लागू क्यों नहीं किया गया। उन्होंने सरकार द्वारा इस कानून के कार्यान्वयन को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने की कवायद की कड़ी आलोचना की। राहुल गांधी ने कहा कि विधेयक को पारित हुए तीन साल बीत चुके हैं और सरकार को इसे बिना किसी देरी या परिसीमन की बेवजह शर्त के तुरंत लागू करना चाहिए।

महिला आरक्षण कानून और परिसीमन का जटिल राजनीतिक पेंच

संसद द्वारा पारित महिला आरक्षण कानून के तहत देश की लोकसभा और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, इस ऐतिहासिक कानून के लागू होने के मार्ग में परिसीमन की प्रक्रिया एक मुख्य शर्त के रूप में जुड़ी हुई है। यही शर्त इस समय केंद्र सरकार और विपक्षी दलों के बीच विवाद का सबसे बड़ा कारण बनी हुई है।

विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस का तर्क है कि महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए आगामी परिसीमन या जनगणना का इंतजार करना अनुचित है। विपक्ष की मांग है कि वर्तमान में मौजूद सीटों की संख्या के आधार पर ही महिलाओं को तुरंत संसद और विधानसभाओं में 33 फीसदी आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए। दूसरी ओर, सरकार का पक्ष यह रहा है कि निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन और सीमाओं के पुनर्निर्धारण के बाद ही यह तय हो सकेगा कि कौन सी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं, इसलिए परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है। राहुल गांधी के ताजा हमले ने इस पुरानी बहस को एक बार फिर संसदीय और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।

संसदीय संवाद और हालिया राजनीतिक मुलाकातों की पृष्ठभूमि

किरेन रिजिजू और राहुल गांधी के बीच सोशल मीडिया पर हुई यह बहस ऐसे समय में आई है जब दोनों नेताओं के बीच संसदीय तालमेल को लेकर हाल ही में बातचीत हुई है। प्राप्त विवरण के अनुसार, पिछले 10 दिनों के भीतर किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से 2 बार मुलाकात की है। हाल ही में बंद कमरे में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक लगभग 50 मिनट तक चली थी, जिसमें संसदीय कामकाज और विधायी मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

इसके बावजूद, सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं के बीच हुई इस तीखी नोकझोंक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधायी मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद काफी गहरे हैं। संसद के आगामी सत्रों में इस मुद्दे पर जोरदार बहस होने के पूरे आसार हैं, क्योंकि विपक्ष कानून को तुरंत लागू करने की मांग पर अड़ा हुआ है, जबकि सरकार प्रक्रियात्मक नियमों का हवाला दे रही है।

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सवाल-जवाब

किरेन रिजिजू और राहुल गांधी के बीच विवाद की मुख्य वजह क्या है?
किरेन रिजिजू और राहुल गांधी के बीच मुख्य विवाद संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के 33 फीसदी आरक्षण को बिना शर्त तुरंत लागू करने और इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने को लेकर है।
महिला आरक्षण विधेयक संसद से कब पारित हुआ था?
महिला आरक्षण विधेयक वर्ष 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था, जिसमें कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष ने समर्थन दिया था।
राहुल गांधी ने किरेन रिजिजू के बयान पर क्या सवाल उठाया?
राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब कानून 2023 में ही पास हो चुका था, तो तीन साल बीत जाने के बाद भी इसे अब तक लागू क्यों नहीं किया गया और इसे परिसीमन से क्यों जोड़ा जा रहा है।
परिसीमन को लेकर सरकार और विपक्ष का क्या रुख है?
सरकार का कहना है कि निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बाद आरक्षण लागू होगा, जबकि विपक्ष की मांग है कि मौजूदा संसदीय सीटों के आधार पर महिलाओं को तुरंत 33 फीसदी आरक्षण दिया जाए।
राहुल गांधी ने अपने वीडियो संदेश में महिलाओं के अधिकारों पर क्या कहा?
राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं को अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेने, अपनी बात रखने, सुरक्षित चलने और पितृसत्तात्मक नियंत्रण से मुक्त होने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए।
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