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पश्चिम एशिया में तनाव घटा तो सरकार ने प्राकृतिक गैस पर लगी आपातकालीन पाबंदियां हटाईं, होर्मुज से LNG की आवाजाही फिर पटरी परव्यापार
3 घंटे पहले· 2

पश्चिम एशिया में तनाव घटा तो सरकार ने प्राकृतिक गैस पर लगी आपातकालीन पाबंदियां हटाईं, होर्मुज से LNG की आवाजाही फिर पटरी पर

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एलएनजी की आपूर्ति सामान्य होने और क्षेत्र में युद्धविराम लागू होने के बाद केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस की सप्लाई पर मार्च में लगाए गए ज्यादातर आपात प्रतिबंध वापस ले लिए हैं।

अमित पटेलअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होते ही केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस की सप्लाई पर लगाई गई ज्यादातर आपातकालीन पाबंदियां हटा दी हैं। यह फैसला उस समय आया है जब क्षेत्र में तनाव काफी कम हो चुका है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की आवाजाही दोबारा सामान्य ढर्रे पर लौट आई है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शनिवार को एक अधिसूचना जारी कर प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 में बदलाव किया और उन अहम प्रावधानों को खत्म कर दिया, जिनके तहत घरेलू और आयातित गैस की आपूर्ति सरकार की तय की गई प्राथमिकता सूची के हिसाब से हो रही थी।

आखिर सरकार ने कब और क्यों लगाई थीं ये पाबंदियां

सरकार ने यह आपात व्यवस्था 9 मार्च को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत लागू की थी, जब पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज हो गया था। उस दौर में अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों और उनके जवाब में हुई ईरानी कार्रवाई के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एलएनजी की ढुलाई पर असर पड़ने लगा था। कई आपूर्तिकर्ताओं ने तो अप्रत्याशित परिस्थिति यानी फोर्स मेज्योर तक लागू कर दिया था। इससे भारत समेत कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर संकट के बादल मंडराने लगे थे, और सरकार को एहतियातन कदम उठाने पड़े।

संकट के वक्त उठाए गए तीन बड़े कदम

मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में साफ किया कि अब क्षेत्र में युद्धविराम लागू है, बातचीत का सिलसिला जारी है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से समुद्री यातायात दोबारा शुरू हो चुका है। ऐसे हालात में गैस की सप्लाई पर लगी आपात पाबंदियों को बनाए रखने की अब कोई जरूरत नहीं बची। दरअसल, पश्चिम एशिया संकट के दौरान देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के मकसद से सरकार ने तीन बड़े कदम उठाए थे। पहला, नेचुरल गैस की आपूर्ति को अपने नियंत्रण में लेना; दूसरा, रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल्स के फीडस्टॉक की जगह एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने का निर्देश देना; और तीसरा, थोक उपभोक्ताओं को डीजल की बिक्री सीमित करना।

एलपीजी और डीजल वाली पाबंदियां पहले ही हट चुकी थीं

एलपीजी उत्पादन और डीजल बिक्री से जुड़ी दोनों पाबंदियां तो पहले ही हटाई जा चुकी थीं, और अब गैस आपूर्ति से जुड़े प्रावधान भी खत्म कर दिए गए हैं। गौरतलब है कि भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 88 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस की लगभग 50 प्रतिशत जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है। इतना ही नहीं, देश के कुल कच्चे तेल आयात का 40 से 45 प्रतिशत और एलएनजी आयात का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा अकेले पश्चिम एशिया से आता है। यही वजह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जरा-सा भी व्यवधान भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है।

पीएनजी, सीएनजी और एलपीजी की सप्लाई पूरी बनी रही

मार्च में लागू हुए आपात आदेश के तहत घरेलू गैस, आयातित एलएनजी और री-गैसीफाइड एलएनजी के आवंटन का पूरा अधिकार सरकार के पास आ गया था। उस दौरान घरों तक पहुंचने वाली पीएनजी, वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी, एलपीजी उत्पादन और पाइपलाइन संचालन की आपूर्ति उनकी औसत खपत के आधार पर पूरी तरह सुनिश्चित की गई थी। वहीं, उर्वरक संयंत्रों को उनकी औसत जरूरत का 70 प्रतिशत और औद्योगिक उपभोक्ताओं को 80 प्रतिशत गैस देने का प्रावधान रखा गया था, ताकि खेती और उद्योग दोनों की रफ्तार बनी रहे।

पेट्रोरसायन संयंत्रों और बिजलीघरों की गैस में कटौती

इन प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए पेट्रोरसायन संयंत्रों और गैस आधारित बिजलीघरों की गैस आपूर्ति में कटौती करनी पड़ी थी। इसके साथ ही तेल रिफाइनरियों को भी अपनी औसत गैस खपत लगभग 65 प्रतिशत तक सीमित रखने के निर्देश दिए गए थे। इस पूरी व्यवस्था को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए सरकारी कंपनी गेल को पीपीएसी के साथ मिलकर गैस की पूलिंग, उसके पुनर्वितरण और नई कीमत तय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब इन तमाम प्रावधानों के हटने के बाद गैस बाजार दोबारा अपनी सामान्य चाल पर लौट आएगा।

इसका आप पर असर

  • भारत में: गैस आपूर्ति पर लगे आपात प्रतिबंध हटने से पेट्रोरसायन संयंत्रों, गैस आधारित बिजलीघरों और रिफाइनरियों को दोबारा पूरी गैस मिलने लगेगी, जिससे औद्योगिक उत्पादन और बिजली आपूर्ति की राह आसान होगी।
  • आम उपभोक्ताओं पर: घरों की पीएनजी, वाहनों की सीएनजी और रसोई गैस की आपूर्ति संकट के दौरान भी पूरी बनी रही थी, और अब बाजार सामान्य होने से आगे भी स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है।

सवाल-जवाब

सरकार ने प्राकृतिक गैस पर लगी पाबंदियां क्यों हटाईं?
पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू होने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एलएनजी की आपूर्ति सामान्य होने के बाद अब इन आपात प्रतिबंधों की जरूरत नहीं रह गई थी।
ये पाबंदियां कब लगाई गई थीं?
सरकार ने यह आपात व्यवस्था 9 मार्च को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत लागू की थी, जब क्षेत्र में संघर्ष तेज हो गया था।
संकट के दौरान सरकार ने कौन से तीन बड़े कदम उठाए थे?
नेचुरल गैस की आपूर्ति को नियंत्रण में लेना, रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश देना और थोक उपभोक्ताओं को डीजल की बिक्री सीमित करना।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरत का कितना हिस्सा आयात करता है?
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 88 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस की लगभग 50 प्रतिशत जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भारत के लिए इतना अहम क्यों है?
देश के कुल कच्चे तेल आयात का 40 से 45 प्रतिशत और एलएनजी आयात का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है, इसलिए यहां कोई भी व्यवधान ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती है।
आपात आदेश के दौरान किसकी गैस आपूर्ति में कटौती हुई थी?
पेट्रोरसायन संयंत्रों और गैस आधारित बिजलीघरों की गैस आपूर्ति में कटौती की गई थी, और रिफाइनरियों को खपत 65 प्रतिशत तक सीमित रखने को कहा गया था।
अमित पटेल
लेखक के बारे मेंअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता दिल्ली
विशेषज्ञताबिज़नेस समाचार, वित्तीय बाज़ार, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट मामले, स्टार्टअप, उद्यमिता, आर्थिक रुझान, टेक्नोलॉजी बिज़नेस, निवेश, वैश्विक अर्थव्यवस्था

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, स्टार्टअप, तकनीक और आर्थिक रुझानों को कवर करते हैं। वे आधुनिक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले कारोबार और उद्योगों की ख़बरें, बाज़ार विश्लेषण और अंतर्दृष्टि देते हैं।

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, उद्यमिता, तकनीक और आर्थिक घटनाक्रमों को कवर करते हैं। वे ब्रेकिंग बिज़नेस न्यूज़, कॉर्पोरेट रणनीतियों, शेयर बाज़ार के रुझानों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले औद्योगिक नवाचारों पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, स्पष्टता और गहन विश्लेषण पर ज़ोर देते हुए अमित पाठकों को जटिल कारोबारी विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करते हैं। उनकी कवरेज वित्तीय बाज़ार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, उभरते उद्योगों, आर्थिक नीति, निवेश रुझानों और डिजिटल बदलाव तक फैली है।

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