बीकानेर के उष्ट्र अनुसंधान केंद्र को मिली बड़ी सफलता, स्टेम सेल से होगा थनेला रोग का इलाजविमल इलायची विज्ञापन विवाद: अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ ने एफडीए को भेजा जवाब, शाहरुख खान की प्रतिक्रिया का इंतजारफरीदाबाद में आसमान छू रहे जमीन के दाम, कलेक्टर रेट और बाजार भाव में बहुत बड़ा अंतरकीरतपुर-मनाली फोरलेन पर बढ़ेगी वाहनों की रफ्तार, अब साठ की जगह अस्सी किमी प्रतिघंटा होगी स्पीड लिमिटपहली मुलाकात में स्टाइल को लेकर भारी पड़ सकती हैं ये पांच भूलेंटीचर्स डे को बनाएं खास, मग और पेन की बजाय छात्रों को देने चाहिए ये शानदार खुद बनाए हुए उपहारअलग कप में पीने से क्या सच में बदल जाता है चाय का स्वाद? जानिए इसके पीछे का विज्ञानसूर्य का कन्या राशि में गोचर 17 सितंबर से, इन 5 राशियों के जीवन में चमकेंगे सफलता के सितारेबजट इलेक्ट्रिक स्कूटर की जंग में एथर कोनार्क और टीवीएस आईक्यूब का मुकाबला, जानिए कौन सा मॉडल आपके परिवार के लिए है बेस्टअमेरिकी डॉलर के खिलाफ 160 के स्तर पर रुका जापानी येन, प्रमुख अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से पहले वैश्विक बाजारों में हलचल
पशुपालक भाई बारिश के मौसम में ऐसे बचाएं भेड़-बकरियों की ऊन और बाल, अपनाएं ये जरूरी उपायव्यापार
4 सित॰ 2026, 1:59 pm (40 मिनट पहले)· 1

पशुपालक भाई बारिश के मौसम में ऐसे बचाएं भेड़-बकरियों की ऊन और बाल, अपनाएं ये जरूरी उपाय

मानसून के दौरान नमी, कीचड़ और परजीवियों के कारण भेड़-बकरियों के बाल और ऊन खराब होने का खतरा रहता है। किसानों को अच्छी आमदनी के लिए इस मौसम में बाड़े की साफ-सफाई और खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

बरसात का महीना भेड़-बकरियों की देखभाल करने वालों के सामने कई तरह की परेशानियां लेकर आता है। इस अवधि में वातावरण में नमी, हर तरफ कीचड़, गंदगी और विभिन्न प्रकार के परजीवियों के पनपने से पशुओं के बाल और ऊन की सेहत बिगड़ने लगती है। जब ऊन के अंदर नमी काफी समय तक बनी रहती है, तो वह आपस में उलझ जाती है, उसका रंग पीला पड़ने लगता है और उसकी ओवरऑल क्वालिटी गिर जाती है। इन सब कमियों का सीधा असर किसानों और पशुपालकों को बाजार में मिलने वाले मुनाफे पर पड़ता है। इसलिए यह बहुत जरूरी हो जाता है कि मानसून के दिनों में पशुओं की विशेष रूप से सुरक्षा और देखभाल की जाए।

बाड़े को सूखा और साफ रखना है बेहद जरूरी

भेड़ के शरीर की ऊन बिल्कुल स्पंज की तरह काम करती है जो आसानी से पानी और नमी को अपने अंदर सोख लेती है। यदि मवेशी किसी गीले या कीचड़ से भरे हुए बाड़े के अंदर बैठते हैं, तो उनकी ऊन में फंगस लगने की आशंका काफी ज्यादा बढ़ जाती है। इस वजह से ऊन पीली पड़कर पूरी तरह खराब हो सकती है। यही कारण है कि पशुओं के रहने वाले शेड का फर्श हमेशा सूखा रखा जाना चाहिए। यदि संभव हो सके तो बाड़े के अंदर लकड़ी या बांस की मचान तैयार करें, ताकि गोबर और पेशाब आसानी से नीचे की तरफ गिर जाए और पशु हमेशा एक सूखी जगह पर आराम कर सकें।

ये भी पढ़ें

समय पर ऊन की कटाई और स्वच्छता का ध्यान

बहुत अधिक घनी ऊन के अंदर बारिश का पानी लंबे समय तक फंसा रह जाता है। इस स्थिति के कारण पशुओं में निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी और त्वचा से जुड़ी कई प्रकार की समस्याएं होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा यह सलाह दी जाती है कि बारिश का मौसम शुरू होने से पहले ही ऊन की कटाई करवा लेनी चाहिए। अगर किसी कारणवश पूरे शरीर की ऊन एक साथ काटना संभव न हो, तो कम से कम पेट के निचले हिस्से की, पूंछ की और पिछले अंगों की ऊन जरूर काट दें। ऐसा करने से वहां कीचड़ और गोबर के चिपकने की समस्या से काफी हद तक राहत मिल जाती है.

परजीवियों से बचाव और खानपान पर नियंत्रण

बरसात के इन दिनों में जूं और किलनी जैसी समस्याओं में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिलती है। इन छोटे जीवों के कारण मवेशियों के शरीर में भयंकर खुजली होती है और वे राहत पाने के लिए दीवारों या पेड़ों से अपना शरीर रगड़ने लगते हैं, जिससे उनके बाल और ऊन टूटने लगते हैं। जैसे ही हल्की धूप निकले, किसी योग्य पशु चिकित्सक की सलाह लेकर परजीवी नियंत्रण वाली दवाओं का प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा, बारिश के मौसम में उगने वाले नए हरे चारे में पानी की मात्रा जरूरत से ज्यादा होती है। इसे बहुत अधिक मात्रा में खिलाने से पशुओं को दस्त की शिकायत हो सकती है और पिछला हिस्सा गंदा होने से ऊन खराब हो जाती है। इसलिए हरे चारे के साथ हमेशा सूखा भूसा मिलाकर देना चाहिए, साथ ही संतुलित आहार और मिनरल मिक्सचर का इस्तेमाल करना चाहिए।

सवाल-जवाब

बारिश के मौसम में भेड़-बकरियों की ऊन क्यों खराब होती है?
नमी, कीचड़ और गंदगी के लंबे समय तक संपर्क में रहने से ऊन उलझ जाती है और उसमें फंगस लग जाती है।
पशुओं के बाड़े को सूखा रखने के लिए क्या करना चाहिए?
बाड़े का फर्श हमेशा सूखा रखें और संभव हो तो लकड़ी या बांस की मचान बनाएं।
ऊन की कटाई कब करा लेनी चाहिए?
बारिश का मौसम शुरू होने से पहले ही ऊन की कटाई करा लेना सबसे बेहतर रहता है।
पशुओं में जूं और किलनी की समस्या से कैसे निपटें?
धूप निकलने पर पशु चिकित्सक की सलाह से परजीवी नियंत्रण की दवा का इस्तेमाल करें।
हरे चारे के साथ क्या मिलाकर देना चाहिए?
हरे चारे के साथ सूखा भूसा मिलाकर देना चाहिए ताकि दस्त की समस्या न हो।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR