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फरीदाबाद में आसमान छू रहे जमीन के दाम, कलेक्टर रेट और बाजार भाव में बहुत बड़ा अंतरहरियाणा
4 सित॰ 2026, 2:35 pm (16 मिनट पहले)· 2

फरीदाबाद में आसमान छू रहे जमीन के दाम, कलेक्टर रेट और बाजार भाव में बहुत बड़ा अंतर

फरीदाबाद में तेजी से हो रहे विकास कार्यों के बीच जमीन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। सरकारी कलेक्टर रेट और जमीनों के वास्तविक बाजार भाव में भारी अंतर देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा असर आम खरीदारों की जेब पर पड़ रहा है।

हरियाणा के औद्योगिक शहर फरीदाबाद में शहरीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास के साथ अचल संपत्ति के दाम तेजी से ऊपर जा रहे हैं। शहर के विभिन्न सेक्टरों और रिहायशी इलाकों में जमीन की कीमतों के बीच भारी खाई बनी हुई है। सबसे गौर करने वाली बात यह है कि प्रशासन द्वारा तय किए गए आधिकारिक कलेक्टर रेट और जमीन के असल बाजार भाव में जमीन-आसमान का फर्क है। कई प्रमुख स्थानों पर तो बाजार की वास्तविक कीमतें सरकारी आंकड़ों से कई गुना ऊपर चल रही हैं। ऐसे में जो लोग अपने आशियाने का सपना देख रहे हैं या प्लॉट में निवेश करने की सोच रहे हैं, उनके लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि इन दोनों दरों में कितना अंतर है, शहर का सबसे महंगा इलाका कौन सा है और इन दरों में बदलाव का आम नागरिकों पर क्या प्रभाव पड़ता है।

कलेक्टर रेट और मार्केट रेट का पूरा खेल मांग पर टिका

संपत्ति खरीदने से पहले किन-किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, इस पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए प्रॉपर्टी डीलर विजय मलिक बताते हैं कि बाजार भाव पूरी तरह से बाजार की मांग पर निर्भर करता है। किसी भी प्रॉपर्टी की जैसी मांग होगी, उसके दाम भी उसी हिसाब से तय होते हैं। यानी जिस क्षेत्र में लोग जमीन खरीदने के लिए सबसे ज्यादा उत्सुक होते हैं, वहां का बाजार भाव सरकारी कलेक्टर रेट को बहुत पीछे छोड़ देता है। विजय मलिक के अनुसार, अगर पूरे फरीदाबाद की बात की जाए तो ग्रेटर फरीदाबाद के अंतर्गत आने वाला सेक्टर 80 ऐसा क्षेत्र है जहां जमीन सबसे ज्यादा महंगी बिक रही है और वहां भाव करीब ढाई लाख रुपये प्रति गज चल रहा है।

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विकास कार्य और स्टैंप ड्यूटी का आम आदमी पर सीधा असर

इस खास इलाके में जमीन इतनी महंगी होने के पीछे वहां की जबरदस्त मांग और लगातार हो रहा विकास मुख्य वजह है। फरीदाबाद में जैसे-जैसे विकास कार्य आगे बढ़ रहे हैं और लोगों का रुझान इस तरफ आ रहा है, वैसे-वैसे प्लॉटों के दाम आसमान छू रहे हैं। जब सरकार कलेक्टर रेट बढ़ाती है तो उसका असर यह होता है कि प्रॉपर्टी महंगी हो जाती है और स्टैंप ड्यूटी भी बढ़ जाती है। स्टैंप ड्यूटी बढ़ने से आम आदमी की जेब पर सीधा वित्तीय बोझ पड़ता है। विजय मलिक का कहना है कि आज के समय में बाजार में जिस तरह की मांग है, उसके अनुसार सरकारी कलेक्टर रेट पर जमीन मिल पाना संभव नहीं होता है, ग्राहकों को हमेशा वास्तविक बाजार भाव पर ही सौदा करना पड़ता है।

अवैध कॉलोनियां और डीटीपी के बुलडोजर की कार्रवाई से बचाव

सामान्य तौर पर यदि आप किसी भी अधिकृत बिल्डर की संपत्ति भी देखते हैं तो वह भी आपको बाजार मूल्य पर ही मिलेगी, न कि सरकारी कलेक्टर रेट पर। इसका सीधा अर्थ यह है कि ग्राहक को जमीन खरीदते वक्त कागजी दरों के बजाय बाजार की असल कीमतों का सामना करना ही पड़ता है। विजय मलिक बताते हैं कि आज फरीदाबाद जिस रफ्तार से विकसित हो रहा है, कई बड़े बिल्डर सरकार से वैध लाइसेंस लेकर शहर को संवार रहे हैं। हालांकि, कुछ लालची लोग खेत काटकर अवैध रूप से कॉलोनियां विकसित कर देते हैं, और फिर फरीदाबाद में डीटीपी विभाग का बुलडोजर ऐसी जगहों पर पूरी सख्ती से कार्रवाई करता है जहां सरकारी जमीन या मास्टर प्लान का उल्लंघन होता है।

सस्ते के चक्कर में न फंसें, हमेशा वैध और अधिकृत जगह चुनें

जो लोग अवैध रूप से कटी इन कॉलोनियों में प्लॉट खरीद लेते हैं, उन्हें बाद में प्रशासन की कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। ग्राहकों को सलाह देते हुए विजय मलिक कहते हैं कि जमीन का सौदा करने से पहले डीलर की प्रॉपर्टी आईडी और उसके सभी कानूनी दस्तावेजों की पूरी जांच करनी चाहिए। प्रॉपर्टी की पूरी चेन वेरिफाइड होनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह किसी सरकारी जमीन का हिस्सा तो नहीं है। खरीदारों को यह स्पष्ट सलाह दी जाती है कि वे भले ही थोड़ा अधिक भुगतान करके जमीन खरीदें, लेकिन हमेशा अधिकृत जगहों पर ही निवेश करें, सेक्टर के भीतर प्लॉट लें और किसी प्रमाणित डीलर के माध्यम से ही सौदा पूरा करें।

सेक्टर 80 में कलेक्टर रेट और मार्केट रेट का भारी अंतर

फरीदाबाद के सेक्टर 80 का उदाहरण देते हुए विजय मलिक बताते हैं कि वहां वर्तमान में सरकारी कलेक्टर रेट लगभग 58,500 रुपये प्रति गज के आसपास है, जबकि यदि उसी इलाके में बाजार भाव देखा जाए तो प्लॉट ढाई लाख रुपये प्रति गज की दर से बिक रहे हैं। यही मूल अंतर कलेक्टर रेट और मार्केट रेट के बीच देखने को मिलता है और यह अंतर केवल मांग के कारण पैदा होता है। नहर पार के इस क्षेत्र में हुड्डा और बीपीटीपी दोनों ने मिलकर इस इलाके को विकसित किया है। इस क्षेत्र में कम से कम 250 गज का प्लॉट साइज मिलता है, जिस वजह से यहां जमीन खरीदना एक आम खरीदार की पहुंच से काफी दूर होता जा रहा है।

सवाल-जवाब

फरीदाबाद में कलेक्टर रेट और बाजार भाव में क्या अंतर है?
सरकारी कलेक्टर रेट प्रशासन द्वारा तय किए गए आधिकारिक मूल्य होते हैं, जबकि बाजार भाव वह वास्तविक कीमत है जिस पर प्रॉपर्टी असल में बिकती है। फरीदाबाद में कई जगहों पर बाजार भाव कलेक्टर रेट से काफी ज्यादा चल रहा है।
फरीदाबाद में सबसे महंगी जमीन किस इलाके में है?
स्थानीय डीलरों के अनुसार, ग्रेटर फरीदाबाद के अंतर्गत आने वाला सेक्टर 80 शहर का सबसे महंगा इलाका है, जहां जमीन का भाव करीब ढाई लाख रुपये प्रति गज तक पहुंच गया है।
सेक्टर 80 में कलेक्टर रेट और मार्केट रेट में कितना अंतर है?
सेक्टर 80 में वर्तमान कलेक्टर रेट करीब 58,500 रुपये प्रति गज है, जबकि वहां वास्तविक बाजार भाव ढाई लाख रुपये प्रति गज के आसपास चल रहा है।
कलेक्टर रेट बढ़ने से आम आदमी पर क्या असर पड़ता है?
कलेक्टर रेट बढ़ने से प्रॉपर्टी महंगी हो जाती है और स्टैंप ड्यूटी की दरें भी बढ़ जाती हैं, जिससे खरीदार पर वित्तीय बोझ बढ़ जाता है।
प्रॉपर्टी खरीदते समय किन दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए?
जमीन खरीदने से पहले डीलर की प्रॉपर्टी आईडी, पूरे कागजात और प्रॉपर्टी चेन की ठीक से जांच करनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जमीन सरकारी या विवादित नहीं है।
डीटीपी का बुलडोजर किन जगहों पर कार्रवाई करता है?
डीटीपी विभाग मुख्य रूप से उन जगहों पर कार्रवाई करता है जहां बिना लाइसेंस के कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियां बसाई गई हैं या सरकारी जमीन और मास्टर प्लान का उल्लंघन हुआ है।
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