हिमाचल प्रदेश में कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर सफर करने वाले चालकों के लिए गति सीमा नियमों में संशोधन की तैयारी पूरी हो चुकी है। अब इस अहम मार्ग पर अधिकतम वाहन गति साठ किलोमीटर प्रतिघंटा के बजाय अस्सी किलोमीटर प्रतिघंटा तय की जाएगी।
नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक
इस बड़े बदलाव की पृष्ठभूमि तैयार करने के लिए हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने नई दिल्ली की यात्रा की। वहां उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की और पहाड़ी राज्य से जुड़े कई प्रमुख परिवहन मामलों को उनके समक्ष मजबूती से रखा। इस विशेष बैठक के दौरान कीरतपुर-बिलासपुर-मंडी मार्ग पर स्पीड लिमिट को साठ से बढ़ाकर अस्सी किमी प्रतिघंटा करने के प्रस्ताव पर केंद्रीय स्तर पर सहमति बन गई। उल्लेखनीय है कि मंडी जिले के धर्मपुर से विधायक चंद्रशेखर ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा के भीतर इस विषय को उठाया था और वाहन चालकों की सुविधा के लिए गति सीमा बढ़ाने की पुरजोर मांग की थी।
सुरक्षा के लिए लगाए गए थे विशेष उपकरण
कीरतपुर से लेकर नेरचौक और आगे मनाली तक फैले इस पूरे विस्तृत मार्ग पर यातायात को नियंत्रित करने के वास्ते कई स्पीडोमीटर स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त मार्ग पर तीन से चार अलग-अलग स्थानों पर स्वचालित कैमरों की व्यवस्था की गई है ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के डिजिटल चालान स्वतः कट सकें।
सड़क का पहाड़ी स्वरूप और पुरानी पाबंदियां
इस फोरलेन मार्ग की बनावट मैदानी इलाकों की सड़कों जैसी बिल्कुल नहीं है। इस परियोजना का एक बहुत बड़ा हिस्सा चुनौतीपूर्ण पहाड़ी क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जहां चालकों को तीखे मोड़ों, गहरी ढलानों, लंबी सुरंगों, बड़े पुलों और ऊंचे-नीचे रास्तों का सामना करना पड़ता है। सड़क परिवहन मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेजों में भी इस पूरे क्षेत्र को पहाड़ी, भारी वर्षा और भूस्खलन की आशंका वाला संवेदनशील इलाका माना गया है। रास्ते भर पुल, वायाडक्ट, कटिंग और ढलान होने के कारण शुरुआत में इस कॉरिडोर के लिए कम गति सीमा का नियम बनाया गया था ताकि वाहन चालकों का नियंत्रण बना रहे और दुर्घटनाओं की आशंका को न्यूनतम किया जा सके। जब कीरतपुर-नेरचौक खंड को आम जनता और यातायात के लिए खोला गया था, तब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने अधिकतम गति साठ किलोमीटर प्रतिघंटा तय की थी।
आईटीएमएस और कैमरों की निगरानी
इस मार्ग पर तेज गति से वाहन चलाने वालों पर लगाम कसने के लिए आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और कैमरों के माध्यम से ऑनलाइन चालान प्रणाली लागू की गई थी। उस दौरान पुलिस अधिकारियों ने तर्क दिया था कि फोरलेन बनने के बाद वाहन बहुत तेज गति से दौड़ते हैं और यही तेज रफ्तार सड़क हादसों की मुख्य वजह बन रही है। इसी समस्या से निपटने के लिए साठ की सीमा का कड़ाई से पालन करवाने के वास्ते निगरानी यंत्र लगाए गए थे।
अन्य मार्गों के विस्तार और परमिट पर चर्चा
मुकेश अग्निहोत्री के विशेष आग्रह पर अमृतसर-होशियारपुर राष्ट्रीय राजमार्ग को पंडोगा यानी पंजाब-हिमाचल सीमा से झलेड़ा और ऊना तक राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के साथ जोड़ने के वास्ते संबंधित अधिकारियों को जरूरी निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसके अलावा बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री ने प्रदेश के कॉन्ट्रैक्ट कैरिज वाहन संचालकों की एक पुरानी और लंबित मांग को भी केंद्रीय मंत्री के सामने प्रमुखता से रखा। उन्होंने आग्रह किया कि पर्यटक वाहनों के रूप में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों की स्वीकार्य आयु सीमा को बारह वर्ष से बढ़ाकर पंद्रह वर्ष किया जाए। उन्होंने दलील दी कि ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट योजना के दायरे में आने वाले वाहनों की समय सीमा पहले ही बढ़ाई जा चुकी है, इसलिए सड़क सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता किए बिना कॉन्ट्रैक्ट कैरिज वाहनों को भी ठीक इसी तरह की राहत दी जानी चाहिए।
टैक्सी संचालकों को मिली बड़ी राहत
राज्य के टैक्सी चालकों और पर्यटन उद्योग को एक बड़ी राहत देते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया कि टूरिस्ट परमिट के अंतर्गत प्रदेश की सीमाओं के भीतर चलने वाली टैक्सियों की वैधता अवधि को बारह वर्ष से बढ़ाकर पंद्रह वर्ष कर दिया जाए। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस सिलसिले में तत्काल प्रभाव से आवश्यक आधिकारिक अधिसूचना जारी करने के निर्देश दे दिए हैं।
ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों की स्थिति
अग्निहोत्री ने पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के भीतर ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों के नाकाफी बुनियादी ढांचे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में पूरे प्रदेश में सिर्फ दो ही ऐसे स्टेशन चालू हालत में हैं। उन्होंने निवेदन किया कि जब तक राज्य में पर्याप्त संख्या में नए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पूरी तरह स्थापित नहीं हो जाते, तब तक वाहन चालकों और संचालकों को आने वाली भारी परेशानियों को देखते हुए मैनुअल फिटनेस टेस्टिंग की पुरानी व्यवस्था को समानांतर रूप से जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए। इस पर केंद्रीय मंत्री गडकरी ने राज्य सरकार की सभी जायज मांगों पर पूरी सहानुभूति के साथ विचार करने का ठोस आश्वासन दिया है और साथ ही प्रदेश सरकार से सभी निर्माणाधीन ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन केंद्रों की ताजा स्थिति और उससे जुड़े सभी विवरण उपलब्ध करवाने को कहा है।


















