केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन ढांचे में एक बड़े बदलाव की जमीन तैयार हो रही है। विभिन्न सरकारी कर्मचारी निकायों ने आगामी वेतन आयोग के समक्ष न्यूनतम आय तय करने के नियमों में मूलभूत संशोधन की जोरदार सिफारिश की है। वर्तमान व्यवस्था के तहत न्यूनतम वेतन की गणना के लिए तीन सदस्यों वाले परिवार का मानक माना जाता है। हालांकि, संगठनों का तर्क है कि आधुनिक सामाजिक ताने-बाने में यह मानदंड वास्तविक खर्चों को दर्शाने में पूरी तरह असमर्थ है। इसलिए, 8वें वेतन आयोग के साथ हुई हालिया बातचीत में कर्मचारी प्रतिनिधियों ने मांग रखी है कि न्यूनतम वेतन का निर्धारण तीन के बजाय पांच सदस्यों के पारिवारिक आधार पर किया जाना चाहिए। यदि इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है, तो शुरुआती पद यानी लेवल-1 के कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
परिवार के आकार में संशोधन की आवश्यकता और कर्मचारी यूनियनों का तर्क
सरकारी सेवाओं में कार्यरत लाखों कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख संगठनों ने वेतन समीक्षा पैनल के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखा है। नेशनल काउंसिल-जेसीएम, एआईडीईएफ, एआईएनपीएसईएफ और एफएनपीओ जैसे शीर्ष कर्मचारी संघों के प्रतिनिधियों ने 8वें वेतन आयोग के सदस्यों के साथ अपनी बैठक के दौरान बताया कि भारतीय परिवारों की जमीनी हकीकत बदल चुकी है। वर्तमान में औसतन एक कर्मचारी के परिवार में 4.6 से 4.8 यूनिट या सदस्य होते हैं। इस संरचना में न केवल कर्मचारी, उनकी जीवनसंगिनी और बच्चे शामिल हैं, बल्कि वृद्ध माता-पिता भी पूरी तरह से नौकरीपेशा व्यक्ति की आय पर ही निर्भर रहते हैं।
यूनियनों का स्पष्ट कहना है कि तीन सदस्यों वाले पुराने मानक के आधार पर तय की जाने वाली वर्तमान तनख्वाह बढ़ती महंगाई और सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए काफी नहीं है। माता-पिता की चिकित्सा, देखभाल और बच्चों की उच्च शिक्षा के बढ़ते खर्चों को देखते हुए पांच सदस्यों की न्यूनतम इकाई मानना ही न्यायसंगत होगा। कर्मचारी प्रतिनिधियों के अनुसार, जब तक परिवार के सभी आश्रित सदस्यों के भरण-पोषण के खर्च को वेतन तय करने का आधार नहीं बनाया जाएगा, तब तक कर्मचारियों को वास्तविक राहत नहीं मिल सकेगी।
लेवल-1 की बेसिक सैलरी में उछाल का विस्तृत गणित
यदि पांच सदस्यों के पारिवारिक मानदंड के सुझाव को 2.66 के अनुमानित फिटमेंट फैक्टर के साथ लागू किया जाता है, तो सबसे निचले स्तर यानी लेवल-1 के कर्मचारियों की आय में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। 7वें वेतन आयोग की मौजूदा व्यवस्था में लेवल-1 पर शुरुआती मूल वेतन यानी बेसिक सैलरी 18,000 रुपये निर्धारित है। इसके साथ वर्तमान में 58 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता जोड़ा जाता है, जो 10,440 रुपये बैठता है। इस प्रकार, मौजूदा बेसिक पे और महंगाई भत्ते को मिलाकर कुल प्रारंभिक राशि 28,440 रुपये बनती है।
अब यदि इस राशि की गणना तीन सदस्यों के बजाय पांच सदस्यों के परिवार के आधार पर की जाए, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर सीधे 47,400 रुपये तक पहुंच सकती है, जिसे मोटे तौर पर यानी राउंड फिगर में 48,000 रुपये माना जा रहा है। वर्तमान में मिलने वाली 18,000 रुपये की बेसिक सैलरी से तुलना करने पर यह सीधे 108 फीसदी का भारी उछाल प्रदर्शित करता है। इसके अलावा, यदि 7वें वेतन आयोग के मौजूदा 18,000 रुपये के बेसिक पे पर सीधे 2.66 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो नया बेसिक पे 47,880 रुपये यानी लगभग 48,000 रुपये के आंकड़े को छू लेता है। यह स्पष्ट गणित दिखाता है कि इस नए फॉर्मूले से लेवल-1 के कर्मचारियों के मूल वेतन में ही सीधे 30,000 रुपये की सीधी बढ़ोतरी दर्ज हो सकती है।
लेवल-2 से लेवल-5 तक के कर्मचारियों की संभावित सैलरी बढ़ोतरी
वेतन आयोग के इस नए गणना मॉडल का लाभ केवल शुरुआती स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जैसे-जैसे पदानुक्रम में ऊपर की ओर बढ़ेंगे, वेतन वृद्धि का दायरा और भी बड़ा होता जाएगा। 2.66 के फिटमेंट फैक्टर के आधार पर विभिन्न स्तरों के पदों के लिए संभावित संशोधित बेसिक सैलरी का पूरा ब्योरा निम्नलिखित है
- लेवल-2 पद: इस स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों का वर्तमान बेसिक पे 19,900 रुपये है। 2.66 के संभावित फिटमेंट फैक्टर को लागू करने पर यह राशि बढ़कर 52,934 रुपये तक पहुंच सकती है, जिसे राउंड फिगर में लगभग 53,000 रुपये के करीब माना जा सकता है।
- लेवल-3 पद: लेवल-3 के कर्मचारियों को फिलहाल 21,700 रुपये का मूल वेतन प्राप्त हो रहा है। नए फिटमेंट गुणांक के प्रभाव से यह बढ़कर 57,722 रुपये हो सकता है, जो मोटे अनुमान के अनुसार 58,000 रुपये के आसपास पहुंच जाएगा।
- लेवल-4 पद: पदानुक्रम के चौथे स्तर यानी लेवल-4 पर तैनात कर्मियों की मौजूदा बेसिक सैलरी 25,500 रुपये है। नए 2.66 फिटमेंट फैक्टर के आधार पर इसमें उल्लेखनीय इजाफा होगा और यह बढ़कर 67,830 रुपये यानी लगभग 68,000 रुपये के स्तर पर आ सकती है।
- लेवल-5 पद: लेवल-5 के पद पर कार्यरत कर्मचारियों को वर्तमान में 29,200 रुपये का बेसिक पे दिया जाता है। इस गणना मॉडल के अनुसार, उनकी संशोधित बेसिक सैलरी बढ़कर 77,672 रुपये हो सकती है, जो राउंड फिगर में करीब 78,000 रुपये के पास पहुंच जाएगी।
फिटमेंट फैक्टर का अर्थ और इसका वेतन निर्धारण में महत्व
सैलरी के इस पूरे गणित को सही तरीके से समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि आखिर यह फिटमेंट फैक्टर क्या होता है और इसकी गणना कैसे की जाती है। वास्तव में, फिटमेंट फैक्टर एक ऐसा तकनीकी गुणांक या अनुपात है जो 10 वर्षों की अवधि के दौरान बढ़ी हुई महंगाई दर, मुद्रास्फीति और जीवन-यापन के दैनिक खर्चों के संतुलन को दर्शाता है। वेतन आयोग इस आंकड़े का इस्तेमाल यह निर्धारित करने के लिए करता है कि कर्मचारियों के मूल वेतन में कितनी वृद्धि की जानी चाहिए ताकि वे महंगाई के दबाव का मुकाबला आसानी से कर सकें।
हालांकि, कर्मचारियों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि फिटमेंट फैक्टर लागू करने के बाद जो राशि निकलकर आती है, वह केवल बेसिक सैलरी होती है, न कि अंतिम टेक होम सैलरी। वास्तव में, इस नए बेसिक पे के ऊपर विभिन्न प्रकार के भत्ते जैसे कि मकान किराया भत्ता, परिवहन भत्ता और अन्य विशेष भत्ते जोड़े जाते हैं। साथ ही, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली या भविष्य निधि जैसी वैधानिक कटौतियां भी इसी राशि में से की जाती हैं। इसलिए अंतिम इन-हैंड सैलरी इस संशोधित बेसिक पे से भिन्न होगी।
वर्तमान स्थिति और सरकार की अंतिम स्वीकृति का इंतजार
यद्यपि ऊपर दिए गए आंकड़े कर्मचारी संगठनों की मांगों और 2.66 के अनुमानित गुणांक पर आधारित एक सकारात्मक तस्वीर पेश करते हैं, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। कर्मचारी यूनियनों की ओर से परिवार की यूनिट 3 से बढ़ाकर 5 करने की सिफारिश जरूर रख दी गई है, लेकिन सरकार इसे हरी झंडी देगी या नहीं, यह अभी तय होना बाकी है।
हाल के समय में 8वें वेतन आयोग के सदस्य विभिन्न हितधारकों, मंत्रालयों और प्रतिनिधि मंडलों से मुलाकात कर रहे हैं और उनके सुझाव दर्ज कर रहे हैं। न्यूनतम वेतन का आधिकारिक आंकड़ा, फिटमेंट फैक्टर का अंतिम स्तर, नए भत्तों की दरें और संपूर्ण पे मैट्रिक्स का ढांचा आयोग की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद ही अंतिम रूप से तय किया जाएगा। इसलिए मौजूदा गणना केवल एक भावी अनुमान है जो कर्मचारी यूनियनों के प्रस्तावों पर आधारित है।



















