भारत में सामान एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का खर्च आज भी काफी ऊंचा है, और इसी वजह से हर चीज की कीमत पर बोझ बढ़ जाता है। इसी समस्या को जड़ से सुलझाने के मकसद से सरकार ‘पीएम गति शक्ति मास्टर प्लान’ पर तेजी से काम कर रही है, ताकि देश के ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई रफ्तार मिल सके।
अलग-अलग मंत्रालय अब एक मंच पर
अब तक होता यह रहा है कि रेल, सड़क और बंदरगाहों से जुड़े प्रोजेक्ट्स अलग-अलग मंत्रालयों के अधीन चलते थे। इसका नतीजा यह निकलता था कि आपस में तालमेल की भारी कमी रहती थी और माल ढुलाई में समय भी ज्यादा लगता था और पैसा भी। गति शक्ति योजना के तहत अब इन सभी मंत्रालयों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साथ लाया जा रहा है, जिससे हर विभाग एक-दूसरे की योजनाओं को देख और जोड़ सके।
सभी ट्रांसपोर्ट माध्यमों को आपस में जोड़ना
इस योजना का असली जोर इसी बात पर है कि देश के तमाम ट्रांसपोर्ट माध्यम एक-दूसरे से सीधे जुड़ जाएं। जब रेलवे लाइन, हाईवे और समुद्री बंदरगाह आपस में जुड़े होंगे, तो फैक्ट्रियों से निकला सामान बिना किसी रुकावट के कम समय में बाजारों तक पहुंच सकेगा। इससे देश के भीतर माल की आवाजाही पहले से कहीं ज्यादा तेज हो जाएगी।
ट्रांसपोर्ट खर्च घटा तो सामान भी सस्ता
इस पूरे महाप्लान का सबसे बड़ा फायदा देश के आम उपभोक्ता की जेब को होने वाला है। बात सीधी है, जब कोई कंपनी अपना उत्पाद बाजार में बेचती है तो उसकी कीमत में ट्रांसपोर्ट का खर्च भी जुड़ा होता है। फिलहाल भारत में यह माल ढुलाई का खर्च बहुत ज्यादा है, इसलिए हर सामान महंगा पड़ता है।
जैसे ही पीएम गति शक्ति योजना से ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम मजबूत होगा, कंपनियों की ढुलाई लागत नीचे आएगी। लागत घटने पर बाजार में आपसी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के दाम घटाने पर मजबूर होंगी। इसका सीधा असर यह होगा कि खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के बाकी सामान तक, सबकी कीमतें कम हो जाएंगी।
आम आदमी की जेब पर कैसे दिखेगा असर
इस मास्टर प्लान के लागू होते ही बाजार और आम लोगों की जेब पर कई तरह के सकारात्मक बदलाव नजर आएंगे:
- फल-सब्जियां सस्ती होंगी: समय पर ट्रांसपोर्ट उपलब्ध होने से गांवों और खेतों से फल-सब्जियां बिना खराब हुए तुरंत शहरों तक पहुंच जाएंगी। इससे बर्बादी रुकेगी और दाम अपने आप कम होंगे।
- फैक्ट्री का सामान कम कीमत पर: कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की ढुलाई लागत घटेगी तो उनकी अंतिम कीमत भी नीचे आएगी।
- समय की बचत: सड़कों और रेलवे के बेहतर तालमेल से ट्रकों और मालगाड़ियों को सफर में कम समय लगेगा, जिससे पूरी सप्लाई चेन और मजबूत होगी।
सिर्फ सड़क-रेल जोड़ने का जरिया नहीं
कुल मिलाकर देखें तो ‘पीएम गति शक्ति मास्टर प्लान’ महज सड़कों और रेलवे लाइनों को जोड़ने का काम नहीं करता। यह देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने और आम जनता को महंगाई से राहत दिलाने का एक बड़ा माध्यम बनने जा रहा है।













