अपना खुद का मकान खरीदना अमूमन हर व्यक्ति के जीवन का एक बहुत बड़ा सपना होता है। इसके लिए लोग बरसों तक कड़ी मेहनत करते हैं और वित्तीय योजना तैयार करते हैं। हालांकि, जब पैसों का इंतजाम होने के बाद लोग प्रॉपर्टी खरीदने निकलते हैं, तो उत्साह या जानकारी के अभाव में कुछ ऐसी वित्तीय गलतियां कर बैठते हैं, जिनका खामियाजा उन्हें लंबे समय तक भुगतना पड़ता है। इनमें से सबसे बड़ी चूक होम लोन और उसके वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी होती है। बैंक अक्सर विभिन्न शुल्कों और ब्याज दरों के जरिए ग्राहकों से ज्यादा रकम वसूलने की ताक में रहते हैं। इसके अलावा, कई खरीदार इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि प्रॉपर्टी खरीदते समय उन्हें अपनी जेब से कितना डाउन पेमेंट करना चाहिए। घर खरीदने की प्रक्रिया तभी सफल मानी जाती है, जब आप कम ईएमआई के दबाव के साथ लोन लें और उसे बिना किसी मानसिक तनाव के समय पर चुका सकें। यदि आप 1 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कीमत वाला घर खरीदने जा रहे हैं, तो यह समझना बहुत आवश्यक है कि आपके लिए शुरुआती भुगतान यानी डाउन पेमेंट कितना होना चाहिए।
डाउन पेमेंट और भविष्य की नकदी का संतुलन
यह बात वित्तीय रूप से बिल्कुल स्पष्ट है कि आप जितना अधिक डाउन पेमेंट करेंगे, आपके ऊपर लोन का बोझ उतना ही कम हो जाएगा। लेकिन इस रणनीति का एक दूसरा पहलू भी है। अगर आप अपनी सारी जीवनभर की जमापूंजी एकमुश्त डाउन पेमेंट में झोंक देते हैं, तो भविष्य की आकस्मिक जरूरतों के लिए आपके पास नकदी बिल्कुल नहीं बचेगी। इसलिए, डाउन पेमेंट की रकम तय करने से पहले अपनी मासिक आय, खर्चों और ईएमआई के बोझ का गहराई से आकलन करना बुद्धिमानी होगी। यदि आप अपनी सारी बचत डाउन पेमेंट के रूप में दे देंगे, तो इमरजेंसी फंड पूरी तरह शून्य हो जाएगा, जो आने वाले समय में बड़ी मुसीबत बन सकता है। यही कारण है कि केवल भारी-भरकम डाउन पेमेंट देना ही हमेशा समझदारी का सौदा नहीं होता है, बल्कि आपको अपनी वित्तीय स्थिति और लोन के बीच एक बेहतर संतुलन बनाकर चलना बेहद जरूरी है।
शुरुआती मानक और 20 फीसदी का नियम
वित्तीय मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि आप होम लोन लेने की सोच रहे हैं, तो प्रॉपर्टी की कुल कीमत का लगभग 20 फीसदी हिस्सा डाउन पेमेंट के रूप में देना एक आदर्श शुरुआती बिंदु हो सकता है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि अगर आप 1 करोड़ रुपये का मकान खरीद रहे हैं, तो आप 20 लाख रुपये का डाउन पेमेंट करें और शेष बची हुई 80 लाख रुपये की रकम के लिए बैंक से होम लोन ले लें। हालांकि, आपको इस बात का भी पूरा अंदाजा होना चाहिए कि आप जितना बड़ा लोन लेंगे, आने वाले वर्षों में आपकी मासिक ईएमआई का बोझ भी उतना ही ज्यादा भारी रहेगा। इसलिए केवल न्यूनतम डाउन पेमेंट के भरोसे रहना भी आपके लिए भविष्य में महंगा साबित हो सकता है और आपको अपनी कुल वित्तीय क्षमता का पूरा आकलन करने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेना चाहिए।
बचत और आपातकालीन फंड का महत्व
यदि आप यह सोचते हैं कि अपनी सारी बचत को निकालकर डाउन पेमेंट में लगा देना चाहिए ताकि लोन की ईएमआई कम हो जाए, तो यह फैसला भी पूरी तरह सही नहीं कहा जा सकता है। ऐसा करने से आपका बैंक बैलेंस लगभग खाली हो जाएगा और संकट के समय मदद के लिए आपके पास एक भी रुपया नहीं बचेगा। ऐसे में सबसे बेहतर तरीका यह है कि आप अपने डाउन पेमेंट की इस सीमा को 20 फीसदी से बढ़ाकर 30 या 40 फीसदी तक ले जा सकते हैं। यानी आपके पास कुल जितनी भी बचत है, उसमें से 20 फीसदी डाउन पेमेंट की बुनियादी जरूरत पूरी करने के बाद जो अतिरिक्त रकम बचती है, उसका आधा हिस्सा आप और अधिक डाउन पेमेंट के रूप में जमा कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि आपके पास कुल 40 लाख रुपये की नकदी उपलब्ध है, तो आप इसमें से 30 लाख रुपये बतौर डाउन पेमेंट दे दें और बाकी बचे 70 लाख रुपये का होम लोन ले लें। इस तरह की समझदारी भरी प्लानिंग से आपके पास भविष्य की सुरक्षा के लिए 10 लाख रुपये की अतिरिक्त बचत सुरक्षित बची रहेगी।
ब्याज का गणित और प्री-पेमेंट का फायदा
निवेश विशेषज्ञों का यह साफ सुझाव है कि डाउन पेमेंट और ईएमआई के बीच बेहतरीन तालमेल बैठाने के लिए आपको लोन लेने से पहले बैंक से ब्याज दरों और अन्य शुल्कों की पूरी जानकारी जरूर हासिल करनी चाहिए। कल्पना कीजिए कि यदि आप 20 लाख रुपये का डाउन पेमेंट देकर 7.3 फीसदी की ब्याज दर पर होम लोन लेते हैं, तो 20 साल की अवधि के लिए आपकी मासिक ईएमआई करीब 63,600 रुपये आएगी और इस पर आपको कुल मिलाकर लगभग 73 लाख रुपये का भारी ब्याज चुकाना पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर, यदि आप अपनी जेब से 40 लाख रुपये का बड़ा डाउन पेमेंट जमा करते हैं, तो आपकी मासिक ईएमआई घटकर 47,700 रुपये रह जाएगी और कुल ब्याज भी घटकर लगभग 55 लाख रुपये पर आ जाएगा। इसका मतलब साफ है कि आप 20 लाख रुपये अतिरिक्त डाउन पेमेंट के रूप में देकर ब्याज के रूप में सीधे तौर पर 18 लाख रुपये की भारी बचत कर सकते हैं। इसके अलावा, आपको समय-समय पर लोन का प्री-पेमेंट यानी आंशिक भुगतान भी करते रहना चाहिए। ऐसा करने से आपका कर्ज समय से पहले ही खत्म हो जाएगा और भविष्य में बैंक को दिए जाने वाले ब्याज के रूप में एक बहुत बड़ी रकम की बचत हो सकेगी।



















