इन दिनों सोशल मीडिया पर एक खास तरह का ट्रेंड तेजी से फैल रहा है, जिसमें हर कोई अपनी पुरानी यादों या बॉलीवुड के सुनहरे दौर जैसी तस्वीरें शेयर कर रहा है। तस्वीरों में लोगों के बाल घने, प्रिंटेड शर्ट, डेनिम जींस, चौड़े बॉर्डर वाली साड़ियां और बैकग्राउंड में एम्बेसडर कार या पुरानी फिल्मों के पोस्टर नजर आते हैं। पीयूष गोयल से लेकर राहुल गांधी तक और कियारा आडवाणी से लेकर आम पड़ोसियों और रिश्तेदारों तक, इस ट्रेंड से जुड़ने वालों की फेहरिस्त बहुत लंबी होती जा रही है।
इस 1980 के दशक के ट्रेंड की शुरुआत कैसे हुई
मार्च 2023 में इमेज-जेनरेशन एआई टूल मिडयार्नी में कुछ नए अपडेट किए गए थे। इसके जरिए लोगों ने पहली बार ऐसी एआई तस्वीरें बनाई थीं जो 1990 के दशक की लग रही थीं। खासतौर पर बीजिंग की एक छत पर बैठे जोड़े की तस्वीरों की एक सीरीज काफी वायरल हुई थी। ये बिल्कुल असली फोटोग्राफ जैसी दिखती थीं, हालांकि उस समय यह ट्रेंड चीन तक ही सीमित था। इसके बाद सितंबर 2026 में चैटजीपीटी के जरिए यह ट्रेंड भारत में दाखिल हुआ। लोगों ने अपनी असली तस्वीरों को 1980 के दशक की विंटेज तस्वीरों में बदलना शुरू कर दिया। इसमें बैकग्राउंड, लाइटिंग, कपड़े और हेयरस्टाइल बिल्कुल उस दौर के बॉलीवुड कलाकारों जैसे हो जाते हैं, जबकि चेहरा कमोबेश वैसा ही रहता है। यह ट्रेंड इंस्टाग्राम पर ऐड योर्स स्टीकर और रील्स के जरिए तेजी से फैला, जहां नेता, अभिनेता और आम जनता सभी इसमें हिस्सा ले रहे हैं।
यह ट्रेंड इतनी तेजी से क्यों वायरल हो रहा है
इस ट्रेंड को अपनाना बेहद आसान है। आपको बस चैटजीपीटी जैसे एआई टूल्स को अपनी तस्वीर और एक प्रॉम्प्ट देना होता है। इसके आधार पर चैटजीपीटी पुराने पारिवारिक फोटो, बॉलीवुड स्टूडियो पोर्ट्रेट, शादी की तस्वीर या विंटेज मैगजीन शूट जैसी इमेज तैयार कर देता है। इसके पीछे तीन बड़े मनोवैज्ञानिक कारण भी काम कर रहे हैं। पहला कारण यह है कि Gen Z पीढ़ी अपने समय से पहले के दौर को जीना चाहती है। मनोवैज्ञानिक क्ले रूटलेज के मुताबिक, लगभग दो-तिहाई युवा उस दौर की तरफ आकर्षित होते हैं जिसे उन्होंने कभी अनुभव ही नहीं किया। इसे हिस्टोरिकल नॉस्टैल्जिया कहा जाता है, जो युवाओं में जीवन के अर्थ, सामाजिक जुड़ाव और उम्मीद को बढ़ाता है।
सामाजिक जुड़ाव और पुरानी यादों का आकर्षण
इस ट्रेंड के पीछे दूसरा कारण एक बेहतर और अधिक जुड़े हुए समाज की उम्मीद है। पुराने गानों या एल्बम की तरह ये तस्वीरें अहसास कराती हैं कि उस दौर में लोग आज के मुकाबले एक-दूसरे के साथ ज्यादा समय बिताते थे। समाजशास्त्री ज्योति एस. नायर का कहना है कि लोगों में अकेलापन बढ़ रहा है, ऐसे में यह ट्रेंड एक-दूसरे से जुड़ाव का अहसास कराता है। लोग उस समय की ओर खिंचे चले जाते हैं जब जीवन अधिक संवेदनशील था। वहीं, तीसरा कारण यह धारणा है कि अतीत आज से बेहतर था। कंसल्टेंट मनोवैज्ञानिक डॉ. मिनी के. पॉल बताती हैं कि अतीत में जिम्मेदारियां कम और सुखद अनुभव ज्यादा थे, जिसे याद करके खुशी और सुरक्षा का अहसास होता है।
अपनी 1980 वाली तस्वीर खुद कैसे तैयार करें
अपनी तस्वीर को इस विंटेज रूप में ढालने के लिए सबसे पहले अपनी कोई फोटो चैटजीपीटी, जेमिनी या ग्रोक जैसे एआई टूल पर अपलोड करनी होगी। इसके बाद हिंदी या अंग्रेजी में एक सीधा सा निर्देश देना होगा, जैसे कि इस फोटो को 1980 के वायरल फोटो ट्रेंड में बदल दें। कुछ ही सेकंड में तस्वीर बनकर तैयार हो जाएगी जिसे डाउनलोड करके शेयर किया जा सकता है। अगर आप तस्वीर में कुछ खास बदलाव चाहते हैं, तो एक विस्तृत निर्देश का उपयोग कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, आप निर्देश दे सकते हैं कि इस फोटो को एक प्रामाणिक 1980 के दशक के स्टूडियो पोर्ट्रेट में बदलें। चेहरे की पहचान, फीचर्स, स्किन टोन और नेचुरल अपीयरेंस को बिल्कुल एक समान रखें। उस दौर के वॉल्यूम वाले रेट्रो हेयरस्टाइल, विंटेज ज्वेलरी और स्ट्रक्चर्ड आउटफिट के साथ मिड-सेंचुरी स्टूडियो बैकग्राउंड का इस्तेमाल करें ताकि तस्वीर पूरी तरह असली एनालॉग फोटोग्राफ लगे।
एआई पर फोटो अपलोड करने के बाद डेटा के साथ क्या होता है
जब आप अपनी तस्वीर किसी एआई टूल पर अपलोड करते हैं, तो डेटा स्तर पर कई प्रक्रियाएं होती हैं। आपकी इस फोटो का इस्तेमाल एआई टूल्स को ट्रेनिंग देने के लिए किया जाता है। चैटजीपीटी की मूल कंपनी ओपनएआई की उपयोग नीति के अनुसार, हम जो भी टेक्स्ट और इमेज इनपुट देते हैं, उनका उपयोग मॉडल को प्रशिक्षित करने में किया जाता है। टेक्स्ट की तुलना में तस्वीरें एआई मॉडल के लिए बहुत अधिक उपयोगी होती हैं क्योंकि वे उन्हें फेशियल डेटा, ज्योमेट्री और पहचान से जुड़े विभिन्न विवरण प्रदान करती हैं। चैटजीपीटी पर इमेज अपलोड होने के बाद यह चैट में तब तक सुरक्षित रहती है जब तक यूजर खुद इसे डिलीट नहीं कर देता।
डेटा लीक और सुरक्षा से जुड़े खतरे
फोटो के साथ-साथ मोबाइल डिवाइस का आईपी एड्रेस, लोकेशन, यूजर की पसंद, आदतें, पेशे, आंखों और बालों का रंग तक रिकॉर्ड हो जाता है। चैट डिलीट करने के बाद भी कुछ डेटा कानूनी या सुरक्षा कारणों से कंपनी के डेटाबेस में 30 दिनों या उससे अधिक समय तक रह सकता है। साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी एक्सपर्ट्स लगातार इन ट्रेंड्स से जुड़े जोखिमों पर चेतावनी देते रहे हैं। काउंटरपॉइंट रिसर्च के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक का कहना है कि ऐसे वायरल ट्रेंड्स एआई सिस्टम्स के लिए सोने की खान की तरह होते हैं क्योंकि उन्हें लगातार डेटा की जरूरत होती है। लोग स्वेच्छा से अपनी तस्वीरें साझा करते हैं, जिससे प्राइवेसी कानूनों को दरकिनार करना आसान हो जाता है। फेशियल डेटा एक बायोमेट्रिक डिटेल है जिसे बदला नहीं जा सकता, इसलिए ऐसी तस्वीरें शेयर करना अपनी पूरी डिजिटल प्रोफाइल किसी को सौंपने जैसा है।



















