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राजधानी में तौल कांटे से लेकर ईंधन डिस्पेंसर तक कसेंगे शिकंजा, विधिक माप विज्ञान विभाग लाया नए ड्राफ्ट नियमदिल्ली
25 अग॰ 2026, 7:22 am (1 घंटे पहले)· 3

राजधानी में तौल कांटे से लेकर ईंधन डिस्पेंसर तक कसेंगे शिकंजा, विधिक माप विज्ञान विभाग लाया नए ड्राफ्ट नियम

दिल्ली सरकार ने आम लोगों को सही माप और मात्रा दिलाने के लिए विधिक माप विज्ञान विभाग के तहत नए 2026 ड्राफ्ट नियम तैयार किए हैं। इसके तहत निजी परीक्षण केंद्रों को मंजूरी दी जाएगी और माप उपकरणों पर सत्यापन चिह्न लगाए जाएंगे।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रोजमर्रा के कामकाज में इस्तेमाल होने वाले मापने और तौलने वाले उपकरणों की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली है। इसके तहत दुकानों पर उपयोग होने वाले तौल कांटे, पेट्रोल डीजल और सीएनजी स्टेशनों के ईंधन डिस्पेंसर, घरेलू पानी और बिजली के मीटर के अलावा रक्तचाप मापने की मशीन और थर्मामीटर जैसी चिकित्सीय उपकरणों की जांच प्रक्रिया को अधिक मजबूत बनाया जा रहा है। विधिक माप विज्ञान विभाग ने इस दिशा में साल 2026 के लिए नए ड्राफ्ट नियम बनाए हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचाना और पूरी पारदर्शिता कायम करना है।

निजी संस्थानों को मिलेगी परीक्षण केंद्र चलाने की अनुमति

नई व्यवस्था के अंतर्गत सरकार उन निजी संस्थाओं, कंपनियों और फर्मों को मान्यता प्रदान करेगी जो सरकारी मानदंडों के आधार पर इन उपकरणों के परीक्षण का कार्य संभाल सकेंगी। ये अनुमोदित परीक्षण केंद्र अस्पतालों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, खुदरा दुकानों और ईंधन स्टेशनों पर जाकर विभिन्न यंत्रों की कार्यप्रणाली और उनकी माप की शुद्धता की नियमित जांच करेंगे। इस पहल से प्रशासनिक बोझ कम होगा और बाजार में अधिक व्यापक स्तर पर निगरानी रखी जा सकेगी ताकि हर जगह पैमाइश के तय मानकों का पूरी सख्ती से पालन किया जा सके।

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किन उपकरणों की होगी अनिवार्य जांच

तैयार किए गए इन नए ड्राफ्ट नियमों के दायरे में नागरिकों के दैनिक जीवन से जुड़े कई अहम उपकरण शामिल किए गए हैं। इनमें मुख्य रूप से खुदरा बाजारों और वाणिज्यिक दुकानों में उपयोग होने वाले आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक कांटे व पारंपरिक तराजू शामिल हैं। इसके अलावा वाहनों में ईंधन भरने वाले पेट्रोल, डीजल और सीएनजी पंप के डिस्पेंसरों की भी बारीकी से परख की जाएगी ताकि ईंधन की मात्रा में किसी प्रकार की हेराफेरी न हो सके।

उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए सत्यापन चिह्न

खरीददारों और आम जनता के लिए यह पहचानना बेहद आसान कर दिया जाएगा कि वे जिस मशीन या उपकरण से सेवा ले रहे हैं, वह प्रमाणित है या नहीं। इसके लिए परीक्षण के दौरान सही पाए जाने वाले हर उपकरण पर एक विशेष सत्यापन चिह्न या मोहर लगाई जाएगी। इस मोहर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार यानी GNCTD और संबंधित अधिकृत परीक्षण केंद्र का विशिष्ट कोड अंकित होगा। इस व्यवस्था से ग्राहक तुरंत समझ सकेंगे कि संबंधित मशीन सरकारी पैमानों पर खरी उतरी है और उन्हें पूरी सटीक मात्रा में सामान या ईंधन मिल रहा है।

लापरवाही पर लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान

व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए सख्त अनुशासनात्मक उपाय भी जोड़े गए हैं। यदि कोई अनुमोदित परीक्षण केंद्र अपनी ड्यूटी के दौरान गलत तरीके से सत्यापन करता है या नियमों की अनदेखी करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई होगी और उसका लाइसेंस निलंबित या पूरी तरह रद्द किया जा सकता है। इसके अलावा, बेहतर प्रशासनिक नियंत्रण के लिए सभी उपकरणों को उनके संभावित जोखिम के स्तर के आधार पर उच्च, मध्यम और कम जोखिम वाली तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है।

परीक्षण केंद्र खोलने के लिए निर्धारित शुल्क

जो भी निजी संस्थान या कंपनियां सरकार के अंतर्गत अनुमोदित परीक्षण केंद्र के रूप में पंजीकरण कराना चाहती हैं, उनके लिए आर्थिक प्रावधान भी तय किए गए हैं। ड्राफ्ट नियमों के अनुसार प्रत्येक उपकरण के लिए प्रति वर्ष दो लाख पचास हजार रुपये आवेदन शुल्क के रूप में प्रस्तावित किया गया है। इस शुल्क प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल गंभीर और सक्षम संस्थाएं ही इस महत्वपूर्ण जांच प्रक्रिया का हिस्सा बन सकें।

सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया

प्रशासन ने इन नए नियमों को अंतिम रूप देने से पहले आम जनता, व्यापारियों और सभी संबंधित पक्षों से आपत्तियां तथा बहुमूल्य सुझाव आमंत्रित किए हैं। आधिकारिक अधिसूचना जारी होने की तारीख से लेकर अगले दस दिनों के भीतर अपने सुझाव भेजे जा सकते हैं। लिखित सुझाव भेजने के लिए नियंत्रक, विधिक माप विज्ञान विभाग, प्लॉट नंबर-17, इंस्टीट्यूशनल एरिया, विश्वास नगर, नई दिल्ली-110032 का पता निर्धारित किया गया है। इसके अलावा नागरिक controllerwmd@gmail.com ईमेल पते के माध्यम से भी अपने विचार ऑनलाइन भेज सकते हैं, ताकि ग्राहकों को मिलने वाली सेवाओं में त्रुटियों की गुंजाइश को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

सवाल-जवाब

दिल्ली में माप उपकरणों की जांच के लिए कौन सा विभाग नए नियम लाया है?
विधिक माप विज्ञान विभाग ने 2026 के नए ड्राफ्ट नियम तैयार किए हैं।
नए नियमों के तहत किन मुख्य उपकरणों की जांच की जाएगी?
दुकानों के तराजू, पेट्रोल-डीजल और सीएनजी पंप डिस्पेंसर, पानी-बिजली मीटर और ब्लड प्रेशर मशीनों की जांच होगी।
ग्राहक कैसे पहचानेंगे कि मशीन की जांच हो चुकी है?
जांच में सही पाए जाने वाले उपकरणों पर GNCTD और परीक्षण केंद्र के कोड वाला विशेष सत्यापन चिह्न लगाया जाएगा।
परीक्षण केंद्र के लिए कितना आवेदन शुल्क प्रस्तावित किया गया है?
ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक 2.5 लाख रुपये प्रति उपकरण प्रति वर्ष शुल्क प्रस्तावित है।
नियमों पर सुझाव भेजने की अंतिम तिथि और पता क्या है?
अधिसूचना जारी होने के 10 दिनों के भीतर विश्वास नगर, नई दिल्ली स्थित नियंत्रक कार्यालय या ईमेल पर सुझाव भेजे जा सकते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 मिनट पहले

राजधानी में विधिक माप विज्ञान के 2026 के इन नए ड्राफ्ट नियमों के जरिए शासन और लोक नीति के स्तर पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जब सरकार निरीक्षण के लिए निजी परीक्षण केंद्रों को अधिकृत करती है, तो इससे प्रशासनिक बोझ तो कम होता है, साथ ही उपभोक्ताओं को सही माप मिलने की गारंटी भी मजबूत होती है। हालांकि, इन निजी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी निगरानी रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी ताकि लाइसेंस रद्दीकरण के प्रावधानों का असर जमीन पर भी साफ दिखाई दे।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·4 मिनट पहले

यह नीतिगत कदम एशिया के तेजी से बढ़ते महानगरों में उपभोक्ता संरक्षण और डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मिसाल बन सकता है। जब निजी संस्थाओं को माप उपकरणों के परीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ऑडिट मैकेनिज्म को बेहद मजबूत करना होगा। भविष्य में अन्य राज्य भी इसी तरह के ढांचे को अपना सकते हैं ताकि वाणिज्यिक धोखाधड़ी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

दिल्ली सरकार का यह कदम उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव है। निजी परीक्षण केंद्रों को शामिल करने से जमीनी स्तर पर निगरानी का दायरा तो बढ़ेगा, लेकिन असली चुनौती इन थर्ड-पार्टी एजेंसियों पर सख्त नियंत्रण रखने की होगी ताकि भ्रष्टाचार की गुंजाइश न बचे। यदि यह व्यवस्था पूरी ईमानदारी से लागू हुई, तो पेट्रोल पंपों और खुदरा बाजारों में चल रही गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी और पड़ोसी राज्यों के लिए भी यह एक मिसाल बन सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

अपराध और न्याय बीट के दृष्टिकोण से, तौल और माप में हेराफेरी सीधे तौर पर उपभोक्ता धोखाधड़ी और आर्थिक अपराध की श्रेणी में आती है। विधिक माप विज्ञान विभाग के 2026 के इन नए ड्राफ्ट नियमों में निजी परीक्षण केंद्रों को जोड़ना एक व्यावहारिक कदम है, लेकिन जांच एजेंसियों और अदालतों के सामने यह सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती होगी कि थर्ड-पार्टी निरीक्षण के दौरान मिलने वाली गड़बड़ियों पर केवल लाइसेंस रद्द करने तक बात न रुके, बल्कि सुनियोजित धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज हों। तभी पेट्रोल पंपों और बाजारों में पैमाइश के नाम पर होने वाली अवैध वसूली पर पूरी तरह रोक लग सकेगी।

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