भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की ताजा समीक्षा बैठक पूरी हो चुकी है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण महंगाई में लगातार तेजी देखी जा रही है, जिसके साथ वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम भी बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद केंद्रीय बैंक ने प्रमुख नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। इस समीक्षा के बाद रेपो रेट को 4% और रिवर्स रेपो रेट को 3.35% के स्तर पर पूर्ववत रखा गया है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपना अकोमोडेटिव रुख भी बरकरार रखा है। वित्तीय और रियल एस्टेट क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस फैसले और निवेश पर इसके संभावित असर का विश्लेषण किया है।
नीतिगत रुख में बदलाव और महंगाई के अनुमान
मिलवुड केन इंटरनेशनल के संस्थापक और सीईओ निश भट्ट ने नीतिगत निर्णय पर अपनी राय व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि मौजूदा घोषणा में कोई अप्रत्याशित कदम नहीं दिखा है। उन्होंने रेखांकित किया कि लगातार 11वीं बार नीतिगत दरों को जस का तस रखा गया है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने नीतिगत सहजता को समाप्त करने और सामान्य स्थिति की ओर लौटने की रूपरेखा बिल्कुल साफ कर दी है। अब पूरा ध्यान महंगाई पर काबू पाने के लिए उदार नीतिगत रुख को वापस लेने पर केंद्रित रहेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह घोषणा संकेत देती है कि आसान मौद्रिक नीति का दौर अब समाप्त हो रहा है। इसका सीधा असर बाजार पर दिखा, जहां 10 साल के बेंचमार्क यील्ड ने कई वर्षों के उच्चतम स्तर को छू लिया। नकदी में आने वाली इस कमी से कुछ समय के लिए अस्थिरता पैदा हो सकती है। यही वजह है कि रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2023 (FY23) के लिए आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 7.2% कर दिया है। इसके विपरीत, मुद्रास्फीति के लक्ष्य को पहले के 4.5% से बढ़ाकर 5.7% तय किया गया है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों का साझा लक्ष्य महंगाई को नियंत्रित करना, अतिरिक्त नकदी को समेटना और धीमी लेकिन स्थिर वृद्धि की दिशा में बढ़ना है।
रियल एस्टेट और होम लोन पर पड़ने वाला असर
अनारॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने इस निर्णय पर मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि रियल एस्टेट उद्योग पहले से ही रेपो रेट में संभावित वृद्धि को लेकर तैयारी कर रहा था। दरों में बढ़ोतरी न होना घर खरीदारों और मौजूदा कर्जदारों के लिए राहत भरा कदम है। बिल्डरों और डेवलपर्स की निर्माण लागत में लगातार तेजी आ रही है, जिससे मकानों और संपत्तियों की कीमतों में इजाफा होना लगभग तय माना जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र में चालू महीने से लागू हुए मेट्रो उपकर (मेट्रो सेस) की वजह से संपत्ति खरीद लागत में 1% की वृद्धि हो चुकी है। ऐसी विषम परिस्थितियों के बीच यदि बैंक होम लोन की ब्याज दरों में इजाफा करते, तो यह खरीदारों के लिए एक बड़ा झटका साबित होता। अब ग्राहकों के पास दशक के सबसे निचले स्तर पर मौजूद होम लोन ब्याज दरों का लाभ उठाने का अवसर बना हुआ है। यूक्रेन संकट शुरू होने के बाद से आम लोगों का रहने का खर्च काफी बढ़ा है। ऐसे समय में रिजर्व बैंक का यह निर्णय देश में किफायती आवास की उपलब्धता बनाए रखने के लिए एक जरूरी और सक्रिय कदम साबित हुआ है।



















