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समस्तीपुर के विशेषज्ञों ने बताया जुलाई में फूलगोभी उगाने का सीक्रेट, इन किस्मों से होगी छप्परफाड़ कमाईव्यापार
21 घंटे पहले· 0

समस्तीपुर के विशेषज्ञों ने बताया जुलाई में फूलगोभी उगाने का सीक्रेट, इन किस्मों से होगी छप्परफाड़ कमाई

अगेती फूलगोभी की खेती के लिए जुलाई का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों की सलाह मानकर उन्नत किस्मों का चयन और वैज्ञानिक खाद प्रबंधन करने से किसान अपनी फसल से कई गुना अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।

समस्तीपुर: कृषि के क्षेत्र में मुनाफा इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस मौसम में कौन सी फसल लगा रहे हैं। अगर आप सब्जियों की खेती से अच्छी कमाई करना चाहते हैं तो जुलाई का महीना एक सुनहरा अवसर लेकर आता है। इस समय अगेती फूलगोभी की खेती शुरू करके किसान बाजार में सबसे पहले अपनी उपज पहुंचा सकते हैं। जब शुरुआती मौसम में गोभी बाजार में आती है तो उसकी कीमत बहुत अधिक मिलती है। बिहार राज्य के कई जिलों में जागरूक किसानों ने अगेती फूलगोभी के पौधों की रोपाई का काम पूरे जोरों पर शुरू कर दिया है। अगर सही वैज्ञानिक तकनीक का पालन किया जाए और उन्नत बीजों का इस्तेमाल हो तो बहुत ही कम खर्च में बंपर पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

फूलगोभी केवल एक साधारण सब्जी नहीं है बल्कि यह भारतीय रसोई का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। बाजार में इसकी मांग साल के बारहों महीने लगातार बनी रहती है। लोग इसे सिर्फ सब्जी के रूप में ही नहीं खाते हैं। इसका उपयोग सूप बनाने, स्वादिष्ट अचार तैयार करने और कई अन्य तरह के प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में भारी मात्रा में किया जाता है। पोषण और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी यह एक बेहतरीन विकल्प है। इस सब्जी के अंदर विटामिन-बी और प्रोटीन बहुत ही प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग इसे अपने भोजन में जरूर शामिल करते हैं जिसके कारण मंडी में इसकी खपत कभी कम नहीं होती।

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उन्नत बीजों का सही चयन

समस्तीपुर के बिरौली स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में कार्यरत प्रमुख एवं वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. रविंद्र कुमार तिवारी ने सफल खेती के लिए कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारियां साझा की हैं। उनका कहना है कि फूलगोभी के पौधों का सही विकास ठंडी और नमी वाली जलवायु में सबसे अच्छा होता है। डॉ. तिवारी के अनुसार, "प्रमाणित बीज का चुनाव और स्वस्थ पौध तैयार करना बेहतर उत्पादन की पहली शर्त है।" उन्होंने बताया कि रोपाई के समय के आधार पर गोभी के बीजों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है जिनमें अगेती, मध्यम और पछेती किस्में शामिल हैं।

जो किसान जुलाई के महीने में अगेती फसल लगाना चाहते हैं उनके लिए अर्ली कुंआरी, सबौर अग्रिम, पूसा कतकी तथा समर किंग जैसी उन्नत किस्में सबसे ज्यादा लाभदायक मानी जाती हैं। अगर कोई किसान थोड़ा रुककर मध्यम अवधि में खेती करना चाहता है तो उसे पूसा अगहनी, पंत सुभ्रा, पूसा सुभ्रा के अलावा पूसा सिंथेटिक किस्मों का चुनाव करना चाहिए। इसी तरह पछेती खेती करने वाले किसानों के लिए पूसा स्नोबॉल-1 तथा पूसा स्नोबॉल-16 बीज बोने की सिफारिश कृषि वैज्ञानिकों द्वारा की जाती है। क्षेत्र की जलवायु के अनुसार सही किस्म चुनने से फसल बीमारियों से बची रहती है और बाजार में दाम भी बहुत बढ़िया मिलता है।

खेत की तैयारी और मिट्टी का चुनाव

खेत की प्रारंभिक तैयारी और मिट्टी के चयन के विषय में भी विशेषज्ञों ने खास निर्देश दिए हैं। केवीके में सब्जियों के विशेषज्ञ के तौर पर काम कर रहे डॉ. धीरु तिवारी ने बताया कि इस फसल की जड़ें पानी जमा होने पर खराब हो सकती हैं। इसलिए गोभी की खेती के लिए ऐसी जमीन का चुनाव करना चाहिए जहां जल निकासी की उचित व्यवस्था हो। इसके लिए दोमट मिट्टी या फिर बलुई दोमट मिट्टी सबसे बेहतरीन मानी जाती है। रोपाई का काम शुरू करने से पहले ट्रैक्टर से खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए और फिर पाटा लगाकर खेत को पूरी तरह समतल बना लेना चाहिए।

खाद और उर्वरक का वैज्ञानिक प्रबंधन

अच्छी पैदावार के लिए खाद और उर्वरक का सही मात्रा में प्रबंधन करना सबसे बड़ा कदम है। डॉ. धीरु तिवारी सलाह देते हैं कि खेत में पौधे लगाने की तारीख से लगभग तीन सप्ताह पहले ही प्रति हेक्टेयर की दर से 20 से 25 टन पूरी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद खेत में डाल देनी चाहिए। गोबर की खाद से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है। इसके अलावा 120 किलो नाइट्रोजन की जरूरत होती है। इसके साथ 60 किलो फॉस्फोरस और 40 किलो पोटाश का संतुलित मात्रा में इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है।

रासायनिक खादों का प्रयोग करते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। जब खेत की अंतिम जुताई की जा रही हो ठीक उसी समय फॉस्फोरस और पोटाश की शत-प्रतिशत मात्रा मिट्टी में अच्छी तरह मिला देनी चाहिए। उसी वक्त नाइट्रोजन की कुल मात्रा का केवल एक तिहाई हिस्सा ही खेत में डालना चाहिए। नाइट्रोजन की जो मात्रा बच जाती है उसे दो बराबर भागों में बांट लेना चाहिए। इसका पहला हिस्सा रोपाई के 30 दिन बाद और दूसरा हिस्सा 45 दिन बाद फसल में देना चाहिए। इन सभी आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि विधियों को अपनाकर कोई भी किसान फूलगोभी की शानदार गुणवत्ता हासिल कर सकता है और बाजार से भारी मुनाफा कमा सकता है।

सवाल-जवाब

जुलाई के महीने में फूलगोभी की कौन सी किस्में लगानी चाहिए?
जुलाई में अगेती खेती के लिए अर्ली कुंआरी, सबौर अग्रिम, পূसा कतकी और समर किंग जैसी किस्में सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं।
फूलगोभी की अच्छी पैदावार के लिए कैसी मिट्टी की जरूरत होती है?
इस फसल के लिए ऐसी दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है जिसमें जल निकासी की उचित व्यवस्था हो।
खेत में गोबर की खाद कब और कितनी डालनी चाहिए?
रोपाई से लगभग तीन सप्ताह पहले एक हेक्टेयर खेत में 20 से 25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद डालनी चाहिए।
फूलगोभी की फसल में रासायनिक उर्वरक का सही अनुपात क्या है?
प्रति हेक्टेयर 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश का उपयोग करना चाहिए।
नाइट्रोजन खाद को खेत में डालने का सही समय क्या है?
अंतिम जुताई के समय नाइट्रोजन का एक-तिहाई हिस्सा डाला जाता है, और बाकी बची हुई मात्रा को रोपाई के 30 और 45 दिन बाद दो किश्तों में दिया जाता है।
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