पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जहां सुरक्षा बलों की गतिविधियों और सैन्य अभियानों के बीच आम नागरिकों पर गंभीर जुल्म ढहाए जाने के आरोप लगे हैं। खुजदार जिले के जेहरी इलाके में हुई एक कथित ड्रोन कार्रवाई में एक महिला की जान चली गई, जबकि दो अन्य लोग जख्मी हो गए हैं। इसके साथ ही इस सैन्य कार्रवाई के दौरान करीब 25 स्थानीय निवासियों को हिरासत में लिए जाने और उसके बाद से वे रहस्यमय तरीके से गायब बताए जा रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों ने इन घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए तीखे सवाल खड़े किए हैं।
संचार व्यवस्था ठप होने से बढ़ी मुश्किलें
बलूच वॉयस फॉर जस्टिस यानी बीवीजे के अनुसार, जब यह ड्रोन हमला हुआ तब संबंधित महिला पानी लाने के लिए घर से बाहर गई हुई थी। इस हमले में उसकी मौके पर ही मौत हो गई और एक अन्य महिला समेत दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हालांकि, क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क और कॉलिंग सेवाएं पूरी तरह बंद होने के कारण न तो मृतका की पहचान स्पष्ट हो पा रही है और न ही घायलों के बारे में पुख्ता जानकारी मिल रही है। जेहरी में लंबे समय से सख्त कर्फ्यू लागू है और इन 25 स्थानीय लोगों के अचानक गायब हो जाने से परिजनों की बेचैनी काफी बढ़ गई है।
बाहरी दुनिया से कटा जेहरी का संपर्क
मानवाधिकार संगठन का आरोप है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने ही इन नागरिकों को हिरासत में लिया है, लेकिन उसके बाद से उनका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है। इलाके में कम्यूनिकेशन ब्लैकआउट होने के कारण परिवारों के लिए अपने लापता अपनों की खोजबीन करना असंभव सा हो गया है। संगठन का साफ कहना है कि इस पूर्ण संचार प्रतिबंध के कारण वहां के हालात और अधिक भयावह होते जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का संपर्क पूरी तरह कट जाने की वजह से वहां हो रही मौतों, घायलों की सही संख्या और जबरन गुमशुदगी की असल दास्तान बाहर नहीं आ पा रही है।
अंतरराष्ट्रीय जांच की उठी मांग
बीवीजे ने आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने, लोगों को जबरन गायब करने और संचार माध्यमों पर पाबंदी लगाए जाने को अमानवीय करार दिया है। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एजेंसियों से अपील की है कि वे जेहरी के इन बिगड़े हालातों का संज्ञान लेते हुए स्वतंत्र जांच करवाएं। इसके साथ ही पाकिस्तानी प्रशासन से यह भी मांग की गई है कि वह सभी लापता लोगों की स्थिति स्पष्ट करे और नागरिकों की जीवन रक्षा सुनिश्चित करे।
तुरबत में भी सड़कों पर तनातनी
उधर बलूचिस्तान के ही तुरबत शहर से भी एक ऐसा ही विवाद सामने आया है, जहां बलूच यकजेहती कमेटी यानी बीवाईसी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का दावा है कि कुछ खास सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को वीआईपी सुरक्षा मुहैया कराने के वास्ते शहर के कई प्रमुख मार्गों को घंटों तक जाम रखा गया। इसके कारण आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और स्कूल जाने वाले बच्चे, मरीज, अस्पताल के कर्मी तथा कारोबारी रास्ते में ही फंसे रहे।
डॉक्टरों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी भिड़ंत
मामला तब और ज्यादा बिगड़ गया जब आम नागरिकों और मरीजों ने इस तरह से रास्ते बंद किए जाने का विरोध जताना शुरू कर दिया। बीवाईसी के मुताबिक, जब बीमार लोगों और वरिष्ठ चिकित्सकों ने सड़क रोके जाने पर आपत्ति जताई, तो फ्रंटियर कॉर्प्स के जवानों ने उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की। संगठन का दावा है कि इस दौरान एक डॉक्टर पर सीधी राइफल तानकर उसे जान से मारने की धमकी दी गई, और वहां एक गर्भवती महिला भी मौजूद थी। इस घटना से आक्रोशित होकर तुरबत टीचिंग अस्पताल के डॉक्टरों, कर्मचारियों और मरीजों ने कामकाज का पूर्ण बहिष्कार कर दिया और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।


















