अमेरिकी डॉलर इंडेक्स लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में नीचे फिसला है और पिछले पांच सत्रों में से चार बार गिरावट झेल चुका है। जापानी येन में तेज उछाल और इस हफ्ते आने वाले अमेरिकी महंगाई आंकड़ों को लेकर बना सस्पेंस डॉलर खरीदारों को फिलहाल किनारे बैठने पर मजबूर कर रहा है। एशियाई कारोबार में इंडेक्स 98.80 के आसपास कारोबार करता दिखा, जो दिन भर में करीब 0.10% की गिरावट है, हालांकि यह अगस्त में बने तीन महीने के निचले स्तर से अब भी ऊपर बना हुआ है।
येन की तेजी ने बढ़ाई डॉलर की मुश्किलें
दबाव का बड़ा हिस्सा जापान से आ रहा है। जापान में मजदूरी वृद्धि के आंकड़े उम्मीद से बेहतर आए हैं और दूसरी तिमाही की जीडीपी के आंकड़ों में भी संशोधन के बाद बढ़ोतरी दिखी है। इससे बाजार को यकीन हो गया है कि बैंक ऑफ जापान अगले हफ्ते होने वाली बैठक में ब्याज दरें बढ़ा सकता है। इसी उम्मीद ने येन की तरफ नई खरीदारी खींची है, जिसका सीधा असर डॉलर पर पड़ा है। गौरतलब है कि डॉलर इंडेक्स पिछले बुधवार को करीब तीन हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था, और मौजूदा गिरावट काफी हद तक उसी बढ़त की भरपाई मानी जा रही है।
गुरुवार और शुक्रवार के आंकड़ों पर टिकी निगाहें
बाजार की नजरें अब दिन की हलचल से आगे बढ़कर इस हफ्ते आने वाले दो अहम आंकड़ों पर टिक गई हैं। गुरुवार को अमेरिकी उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) आएगा और उसके अगले दिन शुक्रवार को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) जारी होगा। दोनों आंकड़ों को बारीकी से खंगाला जाएगा ताकि यह पता चल सके कि फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में नीति को किस दिशा में ले जाना चाहता है। फेड का रुख ही तय करेगा कि डॉलर इंडेक्स खोई हुई जमीन वापस पा सकेगा या और नीचे फिसलेगा, यही वजह है कि यह हफ्ता बाजार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
ओसीबीसी का आकलन: नौकरी के आंकड़े काफी नहीं
ओसीबीसी के विश्लेषकों ने पिछले हफ्ते आए उम्मीद से बेहतर अमेरिकी पेरोल आंकड़ों को लेकर कहा कि यह आंकड़ा डॉलर के लिए हल्का सहारा तो है, लेकिन अकेले इतना काफी नहीं कि डॉलर में लगातार तेजी आ सके। उनका कहना है कि मजबूत रोजगार आंकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं और फेड की सख्ती की गुंजाइश को जिंदा रखते हैं, जिससे डॉलर की गिरावट पर कुछ लगाम लग सकती है। हालांकि, मजदूरी में दबाव अब भी सीमित बना हुआ है, इसलिए ओसीबीसी का मानना है कि बाजार सितंबर में दर बढ़ोतरी को लेकर पक्का भरोसा जताने से पहले महंगाई के ठोस संकेतों का इंतजार करेगा। यही वजह है कि अब सारा ध्यान इस हफ्ते के सीपीआई आंकड़े पर टिक गया है, अगर आंकड़ा उम्मीद से ज्यादा आया तो डॉलर में नई मजबूती आ सकती है, जबकि कमजोर आंकड़ा बाजार को दोनों तरफ झुलाता रहेगा।
चार्ट पर अहम स्तर
तकनीकी तौर पर देखें तो पहला प्रतिरोध 99.23 पर है, जो 61.8% फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर से मेल खाता है। इसके बाद 200 दिन का ईएमए 99.52 पर और 50% रिट्रेसमेंट स्तर 99.72 के आसपास आता है। इससे ऊपर बड़ी बाधाएं 38.2% रिट्रेसमेंट के करीब 100.20 और 23.6% रिट्रेसमेंट पर 100.80 पर हैं। नीचे की तरफ पहला सहारा 98.55 पर है, जो 78.6% रिट्रेसमेंट स्तर है, जबकि इससे नीचे एक मजबूत ढांचागत आधार करीब 97.67 पर है, जहां खरीदार पहले भी गिरावट थामने की कोशिश करते दिखे हैं।
ताज़ा लाइव आंकड़ों में डॉलर इंडेक्स
ताज़ा लाइव कीमत के मुताबिक डॉलर इंडेक्स फिलहाल 99.18 पर है, जो पिछले बंद स्तर 99.16 के मुकाबले महज 0.02% ऊपर है, यानी लगभग सपाट कारोबार। पिछले 52 हफ्तों में इंडेक्स 95.55 से 101.80 के बीच घूमता रहा है, और कारोबार की मात्रा 20 दिन के औसत के बराबर बनी हुई है। मोमेंटम संकेतक मिलेजुले हैं, 14 दिन का आरएसआई 43 पर है यानी न ज्यादा खरीदारी न ज्यादा बिकवाली की स्थिति, जबकि एमएसीडी लाइन -0.24 अपनी सिग्नल लाइन -0.28 से नीचे है, हालांकि हिस्टोग्राम 0.04 पर सिकुड़ता दिख रहा है, जो बिकवाली के दबाव में कुछ कमी का संकेत है। इंडेक्स अपने 20 दिन के ईएमए 99.44, 50 दिन के ईएमए 99.77 और 200 दिन के ईएमए 99.30 से नीचे कारोबार कर रहा है, जो लंबी अवधि की गिरावट की तरफ इशारा करता है, भले ही 50 दिन और 200 दिन के सिंपल मूविंग एवरेज क्रमशः 100.19 और 99.16 पर गोल्डन क्रॉस बनाते दिख रहे हों। एडीएक्स 34 पर है, यानी बाजार में साफ रुझान बना हुआ है, और बोलिंगर बैंड 98.60 से 100.13 के बीच फैला है जिसका मध्य बिंदु 99.36 है, कीमत फिलहाल इसी दायरे में है। पिछले 20 सत्रों का सहारा और प्रतिरोध क्रमशः 98.56 और 100.08 पर आंका गया है, जबकि इंट्राडे पिवट 98.92 पर, प्रतिरोध स्तर 99.12 और 99.06 पर तथा सहारा स्तर 98.98 और 98.78 पर बताया गया है। 14 दिन का एटीआर 0.43 पर है, जो कारोबारियों को यह अंदाज़ा देता है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव में स्टॉप लॉस का दायरा कितना रखा जाए।
फेड और भू-राजनीतिक तनाव से मिल रहा सहारा
येन की तेजी के बावजूद डॉलर पूरी तरह बेसहारा नहीं है। फेड के आगे भी ब्याज दरें बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदें और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव, ऐसे कारक हैं जो आमतौर पर निवेशकों को सुरक्षित ठिकानों की तरफ धकेलते हैं, और डॉलर उन पहली जगहों में से एक है जहां पैसा जाता है। इसी सुरक्षित-निवेश वाली मांग की वजह से इंडेक्स अगस्त के तीन महीने के निचले स्तर से ऊपर बना हुआ है, भले ही येन का कारोबार दूसरी तरफ इसकी बढ़त खा रहा हो। आगे यह सहारा टिकेगा या नहीं, यह पूरी तरह आने वाले आंकड़ों पर निर्भर करेगा, फेड की सख्ती के पुख्ता संकेत या मध्य-पूर्व में किसी नए तनाव से डॉलर खरीदार लौट सकते हैं, जबकि इन दोनों कारकों में नरमी आने पर डॉलर एक बार फिर येन की अगुवाई वाली बिकवाली की चपेट में आ सकता है।
दूसरे बाजारों पर भी दिख रहा असर
डॉलर की डगमगाहट का असर बाकी बाजारों में भी साफ दिख रहा है। AUD/USD 0.7200 के स्तर के ऊपर पहुंच गया है, जो 14 मई के बाद इसका सबसे अच्छा स्तर है। इसकी वजह वही येन-आधारित डॉलर की कमजोरी है, साथ ही यह उम्मीद भी कि ऑस्ट्रेलिया का केंद्रीय बैंक इसी महीने बाद में एक बार फिर ब्याज दरें बढ़ा सकता है, फिलहाल बाजार की नजर चीन के व्यापार संतुलन के आंकड़ों पर भी है। वहीं USD/JPY जोड़ा छह महीने के निचले स्तर करीब 153.50 पर फिसल गया है, क्योंकि जापान के मजदूरी और वृद्धि दर के आंकड़े बैंक ऑफ जापान की दर बढ़ोतरी की उम्मीदों को और पुख्ता कर रहे हैं। सोने ने भी डॉलर की इसी नरमी का फायदा उठाते हुए 4,450 डॉलर के स्तर की तरफ वापसी की है, और लगातार दो दिन की गिरावट पर विराम लगाया है, हालांकि फेड की सख्ती की उम्मीदें और अमेरिका-ईरान तनाव सोने की तेजी पर लगाम लगा सकते हैं, क्योंकि निवेशक इस हफ्ते के महंगाई आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। कमोडिटी बाजार में एक और दिलचस्प हलचल है, अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स का प्रीमियम पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है और इंट्राडे में यह 102.00 डॉलर से थोड़ा ऊपर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया, जो बताता है कि ईंधन बाजार का मिजाज कच्चे तेल के शांत माहौल से काफी अलग चल रहा है।



















