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पीएफआरडीए अब एनपीएस में तय पेंशन देने पर कर रहा विचार, कर्मचारियों की पुरानी शिकायत हो सकती है दूरमनी
8 सित॰ 2026, 8:34 am (1 घंटे पहले)· 1

पीएफआरडीए अब एनपीएस में तय पेंशन देने पर कर रहा विचार, कर्मचारियों की पुरानी शिकायत हो सकती है दूर

पीएफआरडीए एनपीएस में बाजार आधारित रिटर्न की जगह गारंटी वाली पेंशन देने पर वित्त मंत्रालय से बातचीत कर रहा है, ताकि कर्मचारियों की पुराने पेंशन प्लान की मांग कम की जा सके.

सरकारी नौकरी में आने वाले नए कर्मचारियों को दो दशक से जिस एक चिंता ने परेशान कर रखा है, वह है रिटायरमेंट के बाद तय पेंशन न मिलना. अब पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण यानी पीएफआरडीए इसी चिंता को दूर करने के लिए वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर नई पेंशन स्कीम यानी एनपीएस में गारंटी वाली पेंशन का विकल्प जोड़ने पर विचार कर रहा है.

एनपीएस से क्यों नाराज हैं कर्मचारी

साल 2004 में जब सरकार ने पुरानी पेंशन व्यवस्था खत्म करके एनपीएस लागू किया, तभी से इसका विरोध शुरू हो गया था. इस स्कीम में कर्मचारी हर महीने अपनी सैलरी से एक हिस्सा जमा करते हैं और रिटायरमेंट के बाद उन्हें जो पेंशन मिलती है, वह जमा राशि पर बाजार से मिले रिटर्न पर निर्भर करती है. यानी अगर बाजार अच्छा प्रदर्शन नहीं करता तो पेंशन की रकम भी कम हो सकती है और इसमें किसी न्यूनतम राशि की कोई गारंटी नहीं दी जाती. यही अनिश्चितता कर्मचारियों की सबसे बड़ी शिकायत रही है.

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यूपीएस को कर्मचारियों ने क्यों नहीं अपनाया

एनपीएस के विरोध को शांत करने के लिए सरकार ने यूनीफाइड पेंशन स्कीम यानी यूपीएस लाई थी, जिसमें रिटायरमेंट के बाद तय पेंशन देने का वादा किया गया था. लेकिन इसकी शर्त यह थी कि कर्मचारियों की जमा राशि का बड़ा हिस्सा पीएफआरडीए के कोष में जमा करना होगा. इस शर्त की वजह से बहुत कम कर्मचारियों ने यूपीएस को चुना और ज्यादातर कर्मचारी अब भी पुरानी पेंशन व्यवस्था यानी ओपीएस को वापस लाने की मांग पर अड़े रहे.

अब पीएफआरडीए बना रहा गारंटी वाली पेंशन का नया प्रस्ताव

कर्मचारियों के इसी असंतोष को देखते हुए पीएफआरडीए ने वित्त मंत्रालय के साथ नए सिरे से बातचीत शुरू की है. मकसद यह है कि एनपीएस में जमा राशि बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर रहने के बजाय कर्मचारियों को एक न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन की गारंटी दी जाए. इसके लिए पीएफआरडीए न्यूनतम सुनिश्चित रिटर्न वाली योजना पर काम कर रहा है, ताकि एनपीएस चुनने वाले कर्मचारियों को भी रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा मिल सके.

सितंबर 2025 में बनी समिति के सामने क्या चुनौतियां हैं

यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह के प्रस्ताव पर विचार हो रहा हो. सितंबर 2025 में भी पीएफआरडीए ऐसा ही प्रस्ताव लेकर आया था और इस पर काम करने के लिए एक समिति बनाई गई थी. इस समिति को एनपीएस की लॉक इन अवधि, नियामकीय ढांचा, शुल्क और जोखिम प्रबंधन जैसे मुद्दों पर नियम तैयार करने थे. पीएफआरडीए का आकलन है कि गारंटी वाली पेंशन देने के लिए फंड मैनेजरों पर जिम्मेदारी और लागत, दोनों बढ़ जाएंगी. इस अतिरिक्त बोझ से बचने के लिए एनपीएस के पैसे को फ्यूचर और ऑप्शन जैसे जोखिम भरे विकल्पों में भी लगाना पड़ सकता है. फिलहाल पेंशन कोष को कुछ शर्तों के साथ ही वायदा बाजार में निवेश की इजाजत मिली हुई है.

हाल के महीनों में एनपीएस में और क्या बदलाव हुए

गारंटी वाली पेंशन पर चल रही चर्चा के अलावा भी एनपीएस में कई अहम बदलाव हुए हैं. दिसंबर 2025 में नियम बदला गया कि जिन कर्मचारियों के खाते में 12 लाख रुपए से ज्यादा जमा है, वे अब एकमुश्त 60 फीसदी की जगह 80 फीसदी रकम निकाल सकते हैं. इसके अलावा पेंशन कोष प्रबंधकों को अपने पोर्टफोलियो का कुछ हिस्सा जिंसों यानी कमोडिटी में लगाने की भी मंजूरी मिल गई है, साथ ही बैंकों के लिए एक नया ढांचा भी स्वीकृत किया गया है.

जनवरी 2026 में बैंकों को यह छूट दी गई कि वे ऐसा ढांचा तैयार कर सकें, जिसके जरिए वे पेंशन फंड बनाकर एनपीएस के कोष का स्वतंत्र रूप से प्रबंधन कर सकें. बच्चों के लिए शुरू की गई एनपीएस वात्सल्य योजना में भी ढील दी गई है और अब इसमें निकासी और निवेश, दोनों को लेकर नियम पहले से आसान बना दिए गए हैं. वहीं जून 2026 से उन ग्राहक सेवा केंद्रों के लिए नियम और सख्त कर दिए गए हैं, जहां से आमतौर पर लोग अपना एनपीएस खाता खुलवाते हैं.

सवाल-जवाब

एनपीएस में गारंटी वाली पेंशन का प्रस्ताव किसने दिया है?
पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर इस पर बातचीत शुरू की है.
अभी एनपीएस में पेंशन कैसे तय होती है?
अभी पेंशन कर्मचारी के अंशदान और बाजार से मिले रिटर्न पर निर्भर करती है, इसमें कोई न्यूनतम राशि की गारंटी नहीं है.
यूपीएस को कर्मचारियों ने क्यों नहीं अपनाया?
क्योंकि गारंटी वाली पेंशन पाने के लिए कर्मचारियों को अपनी ज्यादातर जमा राशि पीएफआरडीए के कोष में डालनी पड़ती थी, इसलिए बहुत कम लोगों ने इसे चुना.
सितंबर 2025 में बनी समिति का काम क्या है?
यह समिति एनपीएस की लॉक इन अवधि, नियामकीय ढांचा, शुल्क और जोखिम प्रबंधन से जुड़े नियम तैयार कर रही है.
दिसंबर 2025 में एनपीएस में क्या बदलाव हुआ?
12 लाख रुपए से ज्यादा जमा वाले खाताधारकों के लिए एकमुश्त निकासी की सीमा 60 से बढ़ाकर 80 फीसदी कर दी गई.
एनपीएस वात्सल्य योजना में क्या बदलाव हुआ?
बच्चों के लिए इस योजना में निकासी और निवेश के नियमों को आसान बनाया गया है.
जून 2026 से क्या नियम सख्त हुए?
ग्राहक सेवा केंद्रों के लिए नियम और सख्त किए गए हैं, क्योंकि इन्हीं केंद्रों से ज्यादातर लोग एनपीएस खाता खोलते हैं.
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