सर्दियों का मौसम आते ही तापमान में गिरावट दर्ज होने लगती है, जिसका सीधा असर दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य और खानपान पर पड़ता है। मौसम के इस बदलाव के कारण कई बार गाय और भैंस के दूध उत्पादन में भारी कमी देखने को मिलती है। पशुपालकों के लिए यह स्थिति आर्थिक रूप से नुकसानदायक साबित होती है क्योंकि पर्याप्त मात्रा में दूध न मिलने से उनकी आय प्रभावित होती है। हालांकि, यदि पशुओं के दैनिक आहार पर विशेष ध्यान दिया जाए और समय रहते जरूरी बदलाव किए जाएं, तो इस समस्या से आसानी से निपटा जा सकता है और दूध के स्तर को बनाए रखा जा सकता है।
पोषण में लापरवाही से घटता है उत्पादन
पशु पालन से जुड़े जानकारों का मानना है कि सर्दियों के दिनों में पशुओं के खानपान में जरा सी भी कोताही उनके दूध देने की क्षमता को कमजोर कर देती है। इस मौसम में शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है, और यदि पशुओं को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिलते हैं, तो वे सुस्त और कमजोर नजर आने लगते हैं। केवल पारंपरिक चारे के भरोसे रहने के बजाय पशुओं को संतुलित आहार देना बेहद जरूरी है। उनके भोजन में हरे चारे के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण दाना, कैल्शियम और मिनरल मिक्सचर को शामिल करने से शरीर की जरूरतें पूरी होती हैं और दूध का उत्पादन भी स्थिर रहता है.
डॉ. भारत पटेल की सलाह और हरे चारे का महत्व
खरगोन के पशु चिकित्सक डॉ. भारत पटेल के अनुसार, दुधारू पशुओं के लिए हरा और ताजा चारा सबसे उत्तम आहार माना जाता है क्योंकि इसमें प्राकृतिक रूप से सभी आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। हालांकि, कई बार हर समय हरा चारा मिल पाना संभव नहीं हो पाता है। ऐसी स्थिति में पशुओं को सूखे चारे के साथ संतुलित दाना पर्याप्त मात्रा में देना चाहिए ताकि उन्हें जरूरी ऊर्जा मिलती रहे और उनका स्वास्थ्य पूरी तरह दुरुस्त बना रहे।
दूध की मात्रा के हिसाब से तय करें दाने का अनुपात
पशुओं को मिलने वाले दाने की मात्रा उनके दूध देने के औसत पर निर्भर करती है। भैंस को प्रति एक लीटर दूध उत्पादन के एवज में लगभग 500 ग्राम दाना देना चाहिए, जबकि गाय के मामले में एक लीटर दूध पर करीब 400 ग्राम दाना पर्याप्त माना जाता है। इसके अलावा, सर्दियों के मौसम में पशुओं के शरीर का तापमान और रखरखाव ठीक रखने के लिए रोजाना एक किलो अतिरिक्त सूखा दाना देना फायदेमंद होता है, जिससे उन्हें ऊर्जा मिलती है। यदि पशु को पर्याप्त मात्रा में हरा चारा मिल रहा है, तो दाने की कुल मात्रा में लगभग 30 फीसदी तक की कमी भी की जा सकती है।
दस लीटर से अधिक दूध देने वाले पशुओं के लिए विशेष खुराक
विशेषज्ञों का कहना है कि जो गाय या भैंस प्रतिदिन 10 लीटर से ज्यादा दूध देती हैं, उनके शरीर को अधिक मात्रा में कैल्शियम और खनिजों की आवश्यकता होती है। ऐसे उच्च उत्पादक पशुओं को प्रतिदिन 100 एमएल कैल्शियम तरल रूप में देना चाहिए। इसके साथ ही उनके आहार में 30 ग्राम मिनरल मिक्सचर भी अवश्य मिलाना चाहिए ताकि शरीर में किसी भी तरह की खनिज की कमी न हो। यह कैल्शियम और मिनरल मिक्सचर बाजार की पशु आहार दुकानों पर सरलता से मिल जाता है। इसे गेंहू की भूसी, मक्का की भूसी, ज्वार, बाजरा या किसी अन्य नियमित पशु आहार में मिलाकर पशुओं को आसानी से खिलाया जा सकता है।


















