बिहार में पारंपरिक खेती से हटकर अब औषधीय पौधों की खेती पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे किसान अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा सकें। इसी कड़ी में नालंदा जिले के इस्लामपुर प्रखंड में मगही पान अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई है, जहां पान की खेती के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधों को भी सहेजा जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसानों और आम लोगों को औषधीय पौधों की खेती से जोड़ना और इसे जमीनी स्तर पर लोकप्रिय बनाना है। इस अनुसंधान केंद्र परिसर में कई बहुउपयोगी औषधीय पौधे मौजूद हैं, जिनमें सुदर्शन का पौधा अपनी खास खूबियों के कारण विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पौधा कान के दर्द से लेकर गंभीर चर्म रोगों तक के इलाज में बेहद असरदार साबित होता है।
दस साल के अनुभव से सामने आई खासियत
इस्लामपुर के मगही पान अनुसंधान केंद्र में पिछले 10 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे किसान अवधेश प्रसाद इन औषधीय पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी संभालते हैं। रोपाई के शुरुआती चरण से लेकर खरपतवार निकालने और गुड़ाई करने तक के तमाम कृषि कार्य अवधेश प्रसाद खुद अपनी देखरेख में करते हैं। लंबे समय तक इन पौधों के संपर्क में रहने के कारण उन्हें इसकी बारीकियों की गहरी समझ है। अवधेश प्रसाद ने ही सुदर्शन नामक इस खास औषधीय पौधे की अनेक विशेषताओं से पर्दा उठाया है। उन्होंने बताया कि यह पौधा न केवल इंसानी शरीर की कई बीमारियों को ठीक करने में मददगार है, बल्कि इसके तंतुओं यानी रेशों का उपयोग करके वस्त्र या कपड़े तक तैयार किए जा सकते हैं, जो इसे कृषि के लिहाज से और भी अनोखा बनाता है।
औषधीय गुणों के साथ वस्त्र निर्माण में भी उपयोगी
खेती और पौधों की बारीकियों को समझाने वाले किसान अवधेश प्रसाद ने विस्तार से बताया कि सुदर्शन एक ऐसा मेडिसिन प्लांट है जिसका बड़े पैमाने पर चर्म रोगों से जुड़ी दवाइयां तैयार करने में इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, कान के दर्द से राहत पाने के लिए इसकी पत्तियों से निकलने वाले रस का भी सफलतापूर्वक उपयोग किया जाता है। हालांकि इस औषधीय पौधे का उपयोग पारंपरिक रूप से विभिन्न प्रकार की बीमारियों के उपचार में होता आया है, लेकिन इसकी सबसे अनूठी बात यह है कि इसका उपयोग वस्त्र निर्माण उद्योग के लिए भी किया जाए तो यह बेहद शानदार विकल्प साबित हो सकता है। जब आप इस पौधे के तने को तोड़कर खींचते हैं, तो इसमें से एक रेशेदार धागेनुमा तंतु बाहर निकलता है। इस तंतु की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आप इसे जितना अधिक खींचते चले जाते हैं, वह उतना ही लंबा होता जाता है।
कम लागत और छह महीने में बंपर मुनाफा
अवधेश प्रसाद आगे बताते हैं कि अगर इस अनूठे सुदर्शन पौधे की खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाए, तो यह राज्य और देश के किसानों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं होगी। सुदर्शन के पौधे की खेती करने में लागत भी बहुत ज्यादा नहीं आती है, जिससे छोटे किसान भी इसे आसानी से अपना सकते हैं। इसकी बुआई के दौरान पौधों को आपस में लगभग 60 सेंटीमीटर की उचित दूरी पर लगाया जाना चाहिए। सही देखभाल मिलने पर मात्र 6 महीने के भीतर ही सुदर्शन का यह औषधीय पौधा पूरी तरह से विकसित होकर कटाई के लिए तैयार हो जाता है। इस तरह किसान इस एक ही फसल से दोहरा लाभ कमा सकते हैं। एक तरफ जहां इससे विभिन्न रोगों के इलाज के लिए बहुमूल्य दवाइयां बनाई जा सकती हैं, वहीं दूसरी तरफ इसके मजबूत तंतुओं की मदद से वस्त्र उद्योग की तरफ कदम बढ़ाना भी पूरी तरह संभव है। पिछले कई वर्षों से औषधीय पौधों के बीच काम करने, उन्हें देखने और इस पर गहराई से विचार करने के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि यह एक बेहद कामयाब और बहुउद्देशीय फसल है जो किसानों की किस्मत बदल सकती है।


















