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दीपावली पर दिल्ली-एनसीआर की हवा हुई जहरीली, नॉर्थ कैंपस में एक्यूआई 446 तो गाजियाबाद में 763 के पारभारत
8 नव॰ 2026, 9:27 pm (10 मिनट पहले)· 0

दीपावली पर दिल्ली-एनसीआर की हवा हुई जहरीली, नॉर्थ कैंपस में एक्यूआई 446 तो गाजियाबाद में 763 के पार

दीपावली की शाम दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में एक्यूआई 446 और गाजियाबाद में यह 763 तक दर्ज किया गया।

दीपावली की शाम शुरू होते ही दिल्ली और एनसीआर के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गई है। रोशनी के इस पर्व पर जैसे ही घरों में दीये जलने लगे और आसमान जगमगाने लगा, वैसे ही हवा में घुला प्रदूषण लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया। राजधानी के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई चार सौ के आंकड़े को पार कर चुका है। दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस इलाके में यह सूचकांक चार सौ छियालीस दर्ज किया गया है। वहीं गाजियाबाद से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक वहां एक्यूआई सात सौ त्रेसठ तक पहुंच गया है। पटाखे पूरी तरह जलने से पहले ही हवा का यह हाल इस बात का संकेत है कि आने वाले घंटों में स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है। दिवाली की इन खुशियों के बीच प्रदूषण का यह बढ़ता स्तर विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या सांस की अन्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

नोएडा और मेरठ में भी स्थिति खराब

राजधानी दिल्ली के अलावा आसपास के शहरों जैसे नोएडा और मेरठ में भी प्रदूषण का स्तर काफी ऊंचा बना हुआ है। एक्यूआई डॉट इन के आंकड़ों के अनुसार नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक छह सौ तीन और मेरठ में तीन सौ इकहत्तर दर्ज किया गया है। इसके अलावा गुरुग्राम में एक्यूआई दो सौ अट्ठाइस रिकॉर्ड किया गया है। दिल्ली के विभिन्न मॉनिटरिंग स्टेशनों पर पीएम टू पॉइंट फाइव सबसे बड़ा प्रदूषक तत्व बनकर उभरा है। शाम छह बजे के इन आंकड़ों से साफ हो गया था कि कई इलाकों की हवा बेहद खराब श्रेणी में थी तो कुछ जगहों पर यह गंभीर स्तर तक जा पहुंची थी। यह ध्यान रखना जरूरी है कि दिल्ली के अलग-अलग स्टेशनों और एनसीआर के अन्य शहरों से मिलने वाले लाइव आंकड़े अलग-अलग समय और विभिन्न मानकीकृत पैमानों पर आधारित होते हैं। रात के समय पटाखों के धुएं और आतिशबाजी के कारण इस स्थिति के और अधिक गंभीर होने की पूरी आशंका बनी हुई है।

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नॉर्थ कैंपस और चांदनी चौक में गंभीर श्रेणी की हवा

दिल्ली के भीतर शाम छह बजे के समय नॉर्थ कैंपस का एक्यूआई चार सौ छियालीस रिकॉर्ड किया गया, जो कि सीधे तौर पर गंभीर श्रेणी के अंतर्गत आता है। इसके अलावा ऐतिहासिक और व्यस्त बाजार चांदनी चौक में भी वायु गुणवत्ता सूचकांक चार सौ चौंतीस दर्ज किया गया। अलीपुर इलाके में यह आंकड़ा चार सौ इकतीस और बुराड़ी क्रॉसिंग पर चार सौ तैंतालीस तक पहुंच गया। बवाना में एक्यूआई चार सौ पैंतीस और मुंडका में चार सौ पंद्रह दर्ज किया गया। इन तमाम क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता खतरनाक रूप से गंभीर श्रेणी में बनी हुई थी। हालांकि कुछ इलाके ऐसे भी रहे जहां स्थिति थोड़ी कम गंभीर थी, जैसे वजीरपुर में तीन सौ बानवे और नांगलोई में तीन सौ चौानवे एक्यूआई दर्ज किया गया। ओखला फेज-टू में यह आंकड़ा तीन सौ इक्यानवे रिकॉर्ड किया गया।

राजधानी का औसत एक्यूआई तीन सौ चौहत्तर और लागू पाबंदियां

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पूरे दिल्ली का औसत एक्यूआई तीन सौ चौहत्तर दर्ज किया गया, जिसे बेहद खराब श्रेणी में रखा जाता है। बिगड़ते हालातों को देखते हुए राजधानी में ग्रेप यानी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के दूसरे चरण की पाबंदियां पहले ही लागू की जा चुकी हैं। मंदिर मार्ग पर एक्यूआई तीन सौ छियासी और मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम के पास तीन सौ बानवे दर्ज किया गया। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली यानी आईआईटी दिल्ली में यह आंकड़ा तीन सौ छिहत्तर रहा। दिलशाद गार्डन के इल्बास स्टेशन पर एक्यूआई तीन सौ पैंतालीस रिकॉर्ड किया गया। इसके विपरीत श्री अरबिंदो मार्ग पर यह दो सौ चौरासी और इग्नू मैदानगढ़ी में दो सौ छियालीस दर्ज किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजधानी के विभिन्न हिस्सों में प्रदूषण का स्तर एक समान नहीं था, बल्कि भौगोलिक स्थिति के अनुसार इसमें अंतर देखा गया।

गाजियाबाद और नोएडा में प्रदूषण का भारी असर

दिल्ली से लगे पड़ोसी शहरों में गाजियाबाद के हालात सबसे ज्यादा डराने वाले रहे। वहां उपलब्ध लाइव रैंकिंग के मुताबिक एक्यूआई सात सौ त्रेसठ दर्ज किया गया, जिसे अत्यधिक खतरनाक श्रेणी माना जाता है। नोएडा में एक्यूआई छह सौ तीन रहा जबकि मेरठ का आंकड़ा तीन सौ इकहत्तर पर दर्ज हुआ। इन सभी शहरों में पीएम टू पॉइंट फाइव और पीएम टेन जैसे सूक्ष्म कण प्रमुख प्रदूषक तत्व बताए गए। गुरुग्राम में रात छह बजकर इक्कीस मिनट के आसपास अपडेट किए गए आंकड़ों के मुताबिक एक्यूआई दो सौ अट्ठाइस था। विभिन्न एजेंसियों के अलग-अलग प्लेटफार्म और मापने के तरीकों के कारण इन सभी आंकड़ों को एक ही पैमाने पर रखकर नहीं देखा जा सकता है, फिर भी कुल मिलाकर हवा की सेहत काफी खराब है।

पटाखों के धुएं से और बढ़ सकता है खतरा

दीपावली की शाम को ही प्रदूषण का स्तर इस ऊंचाई तक पहुंच जाना अधिकारियों और आम जनता दोनों के लिए चिंता की बात है। आतिशबाजी और पटाखों से निकलने वाला धुआं हवा में पीएम टू पॉइंट फाइव और अन्य हानिकारक प्रदूषकों की मात्रा में भारी इजाफा कर सकता है। इसके अलावा मौजूदा मौसमी परिस्थितियां और हवा की धीमी रफ्तार भी प्रदूषण को फैलने से रोक रही है, जिससे वह निचले वायुमंडल में ही ठहर जाता है। ऐसे में रात के समय एक्यूआई में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और सांस की समस्याओं से पीड़ित लोगों को लंबे समय तक खुले में रहने से बचना चाहिए। घर से बाहर निकलते समय पूरी सावधानी बरतें और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी किए गए दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।

सवाल-जवाब

दिल्ली के नॉर्थ कैंपस में दीपावली की शाम कितना एक्यूआई दर्ज किया गया?
दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस में वायु गुणवत्ता सूचकांक 446 दर्ज किया गया।
गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता का स्तर कहां तक पहुंच गया था?
गाजियाबाद में उपलब्ध लाइव रैंकिंग के मुताबिक एक्यूआई 763 तक पहुंच गया था।
दिल्ली का औसत एक्यूआई कितना रहा?
राजधानी दिल्ली का औसत एक्यूआई 374 दर्ज किया गया जो बेहद खराब श्रेणी में आता है।
नोएडा और मेरठ में एक्यूआई कितना रिकॉर्ड किया गया?
नोएडा का एक्यूआई 603 और मेरठ का एक्यूआई 371 दर्ज किया गया।
दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कौन सी पाबंदियां लागू हैं?
राजधानी में वर्तमान में ग्रेप के दूसरे चरण की पाबंदियां लागू हैं।
गुरुग्राम में शाम के समय वायु गुणवत्ता सूचकांक क्या था?
गुरुग्राम में रात 6 बजकर 21 मिनट पर अपडेट हुए आंकड़ों के अनुसार एक्यूआई 228 दर्ज किया गया।
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