ग्रामीण इलाकों में पशुपालन से जुड़े परिवारों और किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। सीकर-झुंझुनूं सरस डेयरी संघ की ओर से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और परिवारों को आर्थिक संबल देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इन फैसलों से सीधे तौर पर उन किसानों और दुग्ध उत्पादकों को लाभ पहुंचेगा जो अपनी मेहनत से इस क्षेत्र को चला रहे हैं और डेयरी व्यवस्था से जुड़े हुए हैं।
सरस लाडली योजना के तहत एफडी राशि में इजाफा
डेयरी प्रबंधन ने ग्रामीण समाज में बालिकाओं के जन्म को लेकर सकारात्मक माहौल बनाने और उनकी आर्थिक नींव मजबूत करने के लिए एक सराहनीय कदम उठाया है। सरस लाडली योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता को दोगुना कर दिया गया है। इसके तहत अब किसी भी दुग्ध उत्पादक किसान के घर बेटी का जन्म होने पर डेयरी संघ की तरफ से 21 हजार रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट कराई जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बेटियों के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करना है ताकि वे आगे चलकर अपनी शिक्षा और अन्य जरूरतों को पूरा कर सकें।
दूध के क्रय मूल्य और बोनस में बढ़ोतरी
पशुपालकों की आय में सुधार करने के मकसद से डेयरी संघ ने दूध खरीद के दामों में भी इजाफा करने का फैसला किया है। अब दुग्ध उत्पादकों को दूध के क्रय मूल्य पर 2 रुपये प्रति लीटर का अतिरिक्त लाभ दिया जाएगा। इसके साथ ही इसमें 5 रुपये प्रति लीटर का बोनस मूल्य भी जोड़ा जाएगा। इस तरह कुल मिलाकर पशुपालकों को अब दूध के दाम पर 7 रुपये प्रति लीटर की अतिरिक्त राशि मिलेगी। जो किसान नियमित रूप से अपना दूध डेयरी तक पहुंचाते हैं, उनकी मासिक और वार्षिक आमदनी में इससे खासी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
सहकारी समितियों के सचिवों के लिए राहत कोष
दूध संग्रह केंद्रों और सहकारी समितियों को सुचारू रूप से चलाने में अहम भूमिका निभाने वाले सचिवों के कल्याण का भी पूरा ध्यान रखा गया है। सीकर और झुंझुनूं जिलों की इन समितियों में काम करने वाले सचिवों के लिए एक विशेष राहत कोष की स्थापना की जा रही है। अगर किसी दुर्घटना में सचिव की असामयिक मृत्यु हो जाती है, तो उनके शोकाकुल परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके अलावा, सामान्य मौत होने की स्थिति में परिजनों को 1 लाख रुपये और यदि दुर्घटना के कारण विकलांगता आती है, तो संबंधित सचिव को 75 हजार रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी।
संतान के जन्म पर मिलने वाले घी की मात्रा बढ़ाई
पारंपरिक प्रोत्साहन योजनाओं में भी बदलाव करते हुए डेयरी संघ ने बड़ा तोहफा दिया है। पहले दुग्ध उत्पादक परिवारों में बेटा या बेटी के जन्म पर 3 लीटर शुद्ध देसी घी दिया जाता था। अब इस मात्रा को बढ़ाकर 5 लीटर कर दिया गया है। इस प्रकार, अब डेयरी से जुड़े परिवारों को नवजात शिशु के आगमन पर न केवल आर्थिक प्रोत्साहन बल्कि पहले से 2 लीटर अधिक शुद्ध देसी घी भी उपहार स्वरूप मिलेगा।
दूध में मिलावट करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
उपभोक्ताओं तक उच्च गुणवत्ता और शुद्ध दूध पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए डेयरी प्रशासन ने कड़े तेवर अपनाए हैं। चेयरमैन जीताराम मील ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि दूध में किसी भी तरह की मिलावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो समितियां मिलावट में लिप्त पाई जाएंगी या नियमों के खिलाफ जाकर दूध से क्रीम निकालने और स्थानीय स्तर पर अवैध बिक्री करने का काम करेंगी, उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन का साफ संदेश है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और डेयरी के उत्पादों की शुद्धता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।



















