सीकर जिले के गणेश्वर इलाके में अब विकास की एक नई बयार बह रही है। यहां की पहाड़ियों के बीच एक अत्याधुनिक औद्योगिक क्षेत्र तेजी से आकार ले रहा है, जिससे इस पूरे आंचल की आर्थिकी को बड़ा संबल मिलने की उम्मीद है। रीको की तरफ से तैयार किए जा रहे इस नए प्रोजेक्ट का दायरा करीब 36.42 हेक्टेयर का है। इस पूरे प्लान की सबसे खास बात यह है कि यहां केवल उन्हीं यूनिट्स को स्थापित होने की अनुमति दी जाएगी जिनसे पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे और प्रदूषण का स्तर शून्य के बराबर रहे। इससे एक तरफ जहां स्थानीय युवाओं के लिए आजीविका के साधन बढ़ेंगे, वहीं दूसरी तरफ प्रकृति और पर्यावरण की सुरक्षा का भी पूरा ख्याल रखा जाएगा। इस महत्वपूर्ण निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ ली है और अधिकारियों का अनुमान है कि आगामी छह महीनों के भीतर यह पूरा प्रोजेक्ट पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा।
गड्ढों और टीलों वाली जमीन का बदला स्वरूप
कभी इस इलाके की भौगोलिक स्थिति ऐसी थी कि यहां दूर-दूर तक सिर्फ बड़े-बड़े गड्ढे और ऊबड़-खाबड़ जमीन ही नजर आती थी, जो किसी काम की नहीं लगती थी। लेकिन अब इस पूरी तस्वीर को बदल दिया गया है। यहां जमीनों को उपजाऊ और समतल बनाने के लिए ट्रकों भरकर मिट्टी डाली जा रही है, ताकि कारखाने लगाने के लिए एकदम सपाट जमीन मिल सके। बुनियादी ढांचे की बात करें तो इस औद्योगिक क्षेत्र के भीतर कुल सात सड़कों की लाइनों का निर्माण कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। सड़क तंत्र मजबूत होने के बाद अब यहां बिजली की लाइनें बिछाने, पीने का शुद्ध पानी पहुंचाने, ड्रेनेज सिस्टम और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने का काम तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि भविष्य में यहां काम करने वाले उद्यमियों और कामगारों को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
बढ़ाए गए भूखंडों की संख्या
व्यापारिक और औद्योगिक संभावनाओं को देखते हुए इस प्रोजेक्ट की पूरी रूपरेखा में संशोधन भी किया गया है, जिससे निवेशकों का उत्साह काफी बढ़ गया है। शुरुआती योजना के तहत इस क्षेत्र में केवल 61 औद्योगिक प्लॉट ही प्रस्तावित किए गए थे, लेकिन भविष्य की मांग और बंपर संभावनाओं को भांपते हुए इनकी संख्या बढ़ाकर अब सीधे 98 कर दी गई है। इसके साथ ही इस पूरे परिसर के भीतर 26 कमर्शियल प्लॉट और आधुनिक दुकानों का निर्माण भी कराया जाएगा, ताकि कारोबारी गतिविधियां सुचारू रूप से चल सकें। गणेश्वर की खूबसूरत पहाड़ियों के आंचल में बसने वाले इस रीको जोन में केवल प्रदूषण मुक्त उद्योगों को ही जमीन आवंटित की जाएगी। यहां समतलीकरण का काम अंतिम चरणों में है और सात मुख्य सड़कों का जाल बिछाया जा चुका है।
करोड़ों का बजट और रोजगार के अवसर
इस मेगा प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए पिछले साल यानी 23 सितंबर 2024 को 29.65 करोड़ रुपए की भारी-भरकम वित्तीय स्वीकृति जारी की गई थी। इस इंडस्ट्रियल एरिया के पूरी तरह विकसित हो जाने के बाद नए निवेशकों, छोटे कारोबारियों और बड़े उद्यमियों के लिए बिजनेस शुरू करने के सुनहरे अवसर पैदा हो जाएंगे। इसका सीधा फायदा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा, जिसमें दुकानदारी, ट्रांसपोर्टेशन, कंस्ट्रक्शन मटेरियल, खान-पान और अन्य दैनिक सेवाओं से जुड़े लोगों का कारोबार भी काफी फले-फूलने की उम्मीद है। अनुमान है कि छह महीने में यह काम पूरा होने के बाद लगभग 500 से ज्यादा लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिल सकेगा।
स्थानीय युवाओं को मिलेगा अपने ही शहर में काम
इस पूरी परियोजना का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव रोजगार के मोर्चे पर देखने को मिलेगा। जब यहां कारखाने और उद्योग धंधे पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर देंगे, तो प्रत्यक्ष रूप से पांच सौ से अधिक नौकरियां सृजित होंगी। यह बदलाव सीकर और उसके आसपास के बेरोजगार युवाओं के लिए बहुत बड़ी राहत बनकर आ रहा है। फिलहाल स्थिति यह है कि रोजगार की तलाश में युवाओं को अपने घर-परिवार को छोड़कर दूर-दूर के महानगरों और दूसरे शहरों में पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। लेकिन अब स्थानीय स्तर पर ही औद्योगिक इकाइयां स्थापित हो जाने से उन्हें अपने ही घर के पास आजीविका के बेहतरीन विकल्प मिल सकेंगे।



















