दलहनी फसलों के उत्पादन में वृद्धि का लक्ष्य
राजस्थान के सीकर जिले में कृषि विभाग ने खरीफ सीजन 2026 के लिए दलहनी फसलों की खेती में उल्लेखनीय वृद्धि करने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। विभाग का लक्ष्य इस खरीफ सीजन में 50,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पर दलहनी फसलों की बुवाई करना है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को उन्नत बीज, वैज्ञानिक कृषि तकनीकें और फसल प्रदर्शन कार्यक्रमों से जोड़कर उनके उत्पादन और आर्थिक आय दोनों को बढ़ाना है।
किसानों को सशक्त बनाने की रणनीति
कृषि विभाग की योजना के अनुसार, जिले भर में लगभग 9,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन प्रदर्शनों के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों जैसे उन्नत किस्मों के बीजों का उपयोग, बीज उपचार के तरीके, संतुलित उर्वरकों का इस्तेमाल और फसल को रोग तथा कीटों से बचाने के प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। विभाग का मानना है कि किसान जब इन नई तकनीकों के सकारात्मक परिणामों को अपने खेतों में प्रत्यक्ष रूप से देखेंगे, तो वे उन्हें अपनाने के लिए अधिक प्रेरित होंगे, जिससे पूरे कृषि क्षेत्र में सुधार होगा।
प्रमुख दलहनी फसलें और उनके फायदे
इस अभियान के तहत मुख्य रूप से Moong, Urad, Arhar और Moth जैसी दलहनी फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। एग्रीकल्चर एक्सपर्ट Dinesh Jakhar ने बताया कि ये फसलें कम पानी की उपलब्धता वाले क्षेत्रों में भी अच्छी उपज देने में सक्षम हैं, जिससे ये जल संकट वाले इलाकों के लिए बेहद उपयुक्त हैं। इसके अतिरिक्त, दलहनी फसलें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करके भूमि की गुणवत्ता में सुधार करती हैं, जिससे अगली फसल के लिए रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम हो जाती है और खेती की लागत भी घटती है।
आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव
दलहन की खेती का रकबा बढ़ने से खेती की कुल लागत को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। स्थानीय स्तर पर दालों का उत्पादन बढ़ने से बाजार में उनकी आपूर्ति मजबूत होगी, जिससे किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर आर्थिक अवसर प्राप्त होंगे। फसल विविधीकरण (crop diversification) से किसानों की आय के नए स्रोत विकसित होंगे और कृषि क्षेत्र समग्र रूप से अधिक टिकाऊ बनेगा।
खरीफ 2026 के लिए अन्य प्रमुख फसलों के लक्ष्य
कृषि विभाग ने खरीफ 2026 के लिए सीकर जिले में विभिन्न अन्य फसलों के लिए भी बुवाई के लक्ष्य निर्धारित किए हैं, जो इस प्रकार हैं:
- Bajra: 2 लाख 10 हजार हेक्टेयर
- Guar: 1 लाख 22 हजार हेक्टेयर
- मूंगफली: 37 हजार हेक्टेयर
- Moong: 34 हजार हेक्टेयर
- Chawla: 18 हजार हेक्टेयर
- Moth: 400 हेक्टेयर
- Til: 260 हेक्टेयर













