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सीकर में खजूर की खेती पर शोध, शेखावाटी के किसानों को मिल सकती है नई कमाई की सौगातव्यापार
25 अग॰ 2026, 11:38 am (19 दिन पहले)· 2

सीकर में खजूर की खेती पर शोध, शेखावाटी के किसानों को मिल सकती है नई कमाई की सौगात

फतेहपुर कृषि अनुसंधान केन्द्र में खजूर के नए बगीचे तैयार किए जा रहे हैं ताकि शेखावाटी की जलवायु और मिट्टी में इसकी पैदावार का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा सके।

शेखावाटी के गर्म और शुष्क मौसम को देखते हुए अब वहां के किसानों के लिए पारंपरिक खेती से हटकर बागवानी की नई दिशा तलाशने की कवायद शुरू हो चुकी है। इसी कड़ी में फतेहपुर कृषि अनुसंधान केन्द्र में फलों की खास प्रजातियों पर वैज्ञानिक स्तर पर काम किया जा रहा है। केन्द्र परिसर में केसर प्रजाति के आम के पौधों के बाद अब खजूर का एक नया बगीचा विकसित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय पर्यावरण, मिट्टी और जल स्तर के मुताबिक सबसे बेहतरीन फलदार पौधों का चुनाव करने में आसानी होगी।

इस अभिनव प्रयोग के तहत बीकानेर से विशेष रूप से खजूर के पौधे मंगवाए गए हैं, जिनकी मदद से अनुसंधान केन्द्र में पूरा बगीचा तैयार किया जा रहा है। चूंकि खजूर मुख्य रूप से गर्म और शुष्क आबोहवा में अपनी बढ़वार बेहतरीन तरीके से करता है, इसलिए शेखावाटी के भौगोलिक हालात इसके लिए बेहद अनुकूल माने जा रहे हैं। इसी संभावना को परखने के लिए पौधों की ग्रोथ, उन पर आने वाले फलों, कुल उत्पादन और पानी की वास्तविक खपत का सूक्ष्म अध्ययन किया जाएगा। इन तमाम वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर ही क्षेत्र में खजूर की खेती की सफलता का पूरा आंकलन किया जाएगा।

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फतेहपुर कृषि अनुसंधान केन्द्र के प्रभारी हरफुल सिंह ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यहां विकसित किए जा रहे इन बगीचों का मुख्य उद्देश्य महज पौधे लगाना भर नहीं है, बल्कि विभिन्न फलदार किस्मों का स्थानीय परिस्थितियों में परफॉर्मेंस देखना है। इस पूरी प्रक्रिया में गर्मियों और सर्दियों के उतार-चढ़ाव के प्रभाव, मिट्टी की अंदरूनी बनावट, सिंचाई के लिए मिलने वाले पानी और पौधों की कुल उत्पादन क्षमता का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सीकर और उसके आसपास के इलाकों के अन्नदाताओं के लिए कौनसे फल के पौधे सबसे ज्यादा मुनाफे का सौदा साबित हो सकते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि जलवायु में लगातार आ रहे बदलावों के इस दौर में खेती के लिए सही फसल और उसकी उन्नत किस्म का चुनाव करना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसी स्थिति में स्थानीय मौसम के बिल्कुल अनुकूल बैठने वाले फलदार पौधों की पहचान हो जाने से किसानों को अपनी आय बढ़ाने में बहुत बड़ी सहायता मिल सकती है। हरफुल सिंह का कहना है कि अनुसंधान केन्द्र में चलाए जा रहे इन परीक्षणों से ऐसी खास किस्मों को छांटना आसान होगा जो इस इलाके के भीषण तापमान, उपलब्ध पानी और मिट्टी की तासीर के अनुसार सबसे शानदार परिणाम दे सकें।

इस तरह के शोध कार्यों से बागवानी से जुड़े जोखिम को काफी हद तक कम करने में मदद मिल सकती है। आमतौर पर देखा जाता है कि किसान जब भी बागवानी का रुख करते हैं, तो वे पौधों की सही प्रजाति और स्थानीय पर्यावरण के साथ उनके तालमेल को लेकर हमेशा दुविधा में रहते हैं। अनुसंधान केन्द्र में होने वाले ये प्रयोग किसानों की इसी उलझन को दूर करने में बेहद कारगर साबित होंगे। शोध से मिलने वाले पुख्ता नतीजों के आधार पर किसानों को उनके क्षेत्र के अनुकूल फलदार पौधों की सटीक जानकारी मुहैया कराई जा सकेगी, जिससे पौध चयन से लेकर उत्पादन तकनीक और बागवानी प्रबंधन तक हर मोर्चे पर उन्हें वैज्ञानिक मदद मिलेगी।

खजूर के इस बगीचे का यह प्रयोग केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि कृषि विषय में पढ़ाई करने वाले स्नातकोत्तर छात्रों के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित होने वाला है। छात्र यहां स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों में फलों की अलग-अलग प्रजातियों के पनपने, उनकी उत्पादकता और तकनीकी आवश्यकताओं पर गहराई से शोध कार्य कर सकेंगे। इससे अनुसंधान केन्द्र में बागवानी से जुड़े शैक्षणिक और शोध कार्यों का दायरा भी काफी विस्तृत होगा। विद्यार्थियों को व्यावहारिक स्तर पर यह समझने का मौका मिलेगा कि शेखावाटी की खास आबोहवा में अलग-अलग फलदार पौधे किस तरह से ढलते हैं और प्रतिक्रिया देते हैं।

फतेहपुर कृषि अनुसंधान केन्द्र में पहले आम और अब खजूर के बगीचे तैयार होने से पूरे इलाके में बागवानी आधारित खेती को एक नई और सकारात्मक दिशा मिलने की पूरी उम्मीद बंध गई है। आने वाले समय में इन तमाम वैज्ञानिक शोधों के जो परिणाम सामने आएंगे, उनके आधार पर स्थानीय जलवायु के हिसाब से सबसे उपयुक्त फलदार किस्मों की आधिकारिक सिफारिश किसानों को की जा सकेगी। केन्द्र प्रभारी हरफुल सिंह के मुताबिक बीकानेर से मंगवाए गए खजूर के इन पौधों पर होने वाली रिसर्च से न केवल कृषि विद्यार्थियों को बल्कि क्षेत्र के आम किसानों को भी आधुनिक बागवानी की बेहतरीन किस्मों और उन्नत तकनीकों की बहुमूल्य जानकारी मिल सकेगी।

सवाल-जवाब

फतेहपुर कृषि अनुसंधान केन्द्र में कौन सा नया बगीचा तैयार किया जा रहा है?
केन्द्र में केसर प्रजाति के आम के बाद अब खजूर का बगीचा तैयार किया जा रहा है।
खजूर के पौधे कहाँ से मंगवाए गए हैं?
खजूर के पौधे बीकानेर से मंगवाए गए हैं।
फतेहपुर कृषि अनुसंधान केन्द्र के प्रभारी कौन हैं?
फतेहपुर कृषि अनुसंधान केन्द्र के प्रभारी हरफुल सिंह हैं।
इस शोध का मुख्य उद्देश्य क्या है?
शोध का उद्देश्य स्थानीय जलवायु, मिट्टी और पानी की उपलब्धता के आधार पर खजूर जैसी फलदार प्रजातियों की उपयुक्तता और प्रदर्शन का अध्ययन करना है।
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