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सीकर में खरीफ की उन्नत खेती को सरकारी सहारा: हाइब्रिड बीज से लेकर खाद-प्रशिक्षण तक का पूरा खर्च उठाएगा कृषि विभागव्यापार
13 जून 2026, 3:31 pm (45 दिन पहले)· 0

सीकर में खरीफ की उन्नत खेती को सरकारी सहारा: हाइब्रिड बीज से लेकर खाद-प्रशिक्षण तक का पूरा खर्च उठाएगा कृषि विभाग

सीकर जिले के करीब पांच हजार किसानों को बाजरा, मूंगफली, मूंग और मोठ की हाइब्रिड किस्मों से जोड़ा जाएगा। राज्य सरकार ने इस पर 1.43 करोड़ रुपए का बजट जारी किया है और 1750 हेक्टेयर में प्रायोगिक खेती का लक्ष्य रखा है।

इस बार के खरीफ सीजन में सीकर जिले के किसानों के लिए खेती की लागत घटाने और पैदावार बढ़ाने का एक बड़ा मौका सामने आया है। कृषि विभाग ने उन्नत हाइब्रिड बीजों को खेतों तक पहुंचाने के मकसद से एक विशेष योजना तैयार की है, जिसके तहत जिले के करीब पांच हजार किसानों को बाजरा, मूंगफली, मूंग और मोठ की बेहतर किस्मों की खेती से जोड़ा जाएगा। खास बात यह है कि इस पूरी कवायद का आर्थिक भार किसानों पर नहीं, बल्कि सरकार पर रहेगा।

1750 हेक्टेयर और 1.43 करोड़ का बजट

विभाग ने जिले में 1750 हेक्टेयर क्षेत्र में इन चारों फसलों की प्रायोगिक खेती करवाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए राज्य सरकार ने 1.43 करोड़ रुपए का बजट जारी किया है। योजना का मूल विचार यही है कि किसान नई तकनीक और उन्नत बीजों को अपनाकर ज्यादा उत्पादन लें, ताकि खेती उनके लिए घाटे का नहीं बल्कि मुनाफे का सौदा बने और उनकी आमदनी में सीधा इजाफा हो।

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बीज से लेकर खाद तक, सब सरकार के जिम्मे

योजना के दायरे में किसानों को सिर्फ हाइब्रिड बीज ही नहीं मिलेंगे। बीज उपचार के लिए जरूरी रसायन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए जिप्सम, सूक्ष्म पोषक तत्व, राइजोबियम पीएस कल्चर तथा जैव एवं रासायनिक उर्वरक भी दिए जाएंगे। इन तमाम सामग्रियों का खर्च सरकार खुद वहन करेगी, यानी किसान की जेब पर इसका कोई बोझ नहीं आएगा।

सामग्री के साथ खेती की ट्रेनिंग भी

सरकार का इरादा सिर्फ संसाधन थमाकर पीछे हट जाने का नहीं है। किसानों को आधुनिक खेती के तौर-तरीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की टीम बीच-बीच में खेतों पर पहुंचेगी, फसल की निगरानी करेगी और किसानों को जरूरी सलाह देती रहेगी। इससे किसानों को नई तकनीक को समझने और उसे सही तरीके से अपनाने में मदद मिलेगी।

पैकेज से बाहर का खर्च किसान का

विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि योजना के तय पैकेज से अलग अगर कोई अतिरिक्त खर्च आता है, तो उसे संबंधित किसान को स्वयं उठाना होगा। हालांकि खेती से जुड़ी ज्यादातर जरूरी सामग्री और तकनीकी मदद सरकार की तरफ से ही मिलेगी, ताकि किसान को इस योजना का अधिक से अधिक फायदा मिल सके।

लाभार्थी कैसे चुने जाएंगे

किसानों के चयन में पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए विभाग ने एक तय प्रक्रिया अपनाई है। पहले विभाग की फील्ड टीम गांवों का चयन करेगी, जबकि किसानों को चुनने का काम ग्राम पंचायत स्तर पर बनी पांच सदस्यीय समिति के हाथ में होगा। इसी समिति की अनुशंसा के बाद किसी किसान का अंतिम चयन होगा और उसे संबंधित फसल का बीज पैकेज सौंपा जाएगा।

इस पांच सदस्यीय समिति में सहायक कृषि अधिकारी, संबंधित पंचायत के सरपंच, एससी-एसटी वर्ग के वार्ड पंच, स्थानीय कृषि सुपरवाइजर और ग्राम विकास अधिकारी को रखा गया है। संयुक्त निदेशक कृषि मोहन सिंह बिजारणियां के मुताबिक जिले के लिए 1750 हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया गया है और हाइब्रिड बीजों के चयन, क्लस्टर निर्धारण तथा लाभार्थियों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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