पारंपरिक खेती से इतर अब देश के अन्नदाता फलों और सब्जियों के आधुनिक तौर-तरीकों की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। कृषि के क्षेत्र में हो रहे इन बदलावों के बीच सीतामढ़ी के एक प्रगतिशील किसान ने शानदार सफलता हासिल की है। बाजार की दुकानों में जो चमकदार, गहरे लाल रंग के बड़े आकार के पपीते नजर आते हैं, वे असल में एक खास किस्म के होते हैं। इस विशेष वैरायटी को रेड लेडी के नाम से जाना जाता है, जो अपने बेहतरीन स्वाद और भारी भरकम आकार के चलते उपभोक्ताओं के बीच काफी पसंद की जाती है।
उत्पादन और मुनाफे का पूरा गणित
स्थानीय किसान विपिन सिंह के अनुसार, इस किस्म की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आमदनी बढ़ाने में बेहद कारगर साबित हो रही है। एक पौधे को रोपने और उसकी पूरी देखरेख करने में लगभग 150 रुपए की लागत आती है। रोपाई के महज 5 से 6 महीने के भीतर ही इस पौधे पर फल लदने शुरू हो जाते हैं। यह फसल करीब 2 साल तक लगातार फल देने की क्षमता रखती है। साल भर के दौरान एक ही पेड़ से किसान 3 से 4 बार फलों की तुड़ाई कर सकते हैं। विपिन सिंह का कहना है कि इस तरह केवल 150 रुपए के मामूली खर्च पर एक पौधे से आसानी से 600 से 700 रुपए तक का शुद्ध मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है।
रोपण की सही तकनीक और फासला
इस किस्म के पौधों को खेत में स्थापित करने के लिए जमीन पर नियमानुसार बेड तैयार किए जाते हैं। पौधों को प्रचुर मात्रा में सूर्य का प्रकाश, ताजी हवा और विकास के लिए पर्याप्त क्षेत्र मिल सके, इसके लिए विशेष दूरियों का ध्यान रखा जाता है। कतारों के बीच 8 फीट का अंतर रखा जाता है, जबकि दो पौधों के बीच की आपसी दूरी 7 फीट तय की जाती है। इस वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से बुआई करने से पौधों का विकास अवरुद्ध नहीं होता और फल भी बेहतरीन आकार लेते हैं। हालांकि, अन्य सामान्य फसलों की तुलना में इस किस्म को अधिक सतर्कता और नियमित देखभाल की आवश्यकता होती है।
उचित पोषण और सुरक्षा के उपाय
फसल से बंपर पैदावार सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर एनपीके खाद का इस्तेमाल किया जाता है। इस खेती के सामने सबसे बड़ी बाधा वायरस का प्रकोप है, जिसका संक्रमण पौधों पर बेहद तेजी से फैलता है। यदि शुरुआती दौर में ही सावधानी न बरती जाए, तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। इस खतरे से निपटने के लिए किसानों को समय-समय पर नीम के तेल या अन्य सुरक्षित कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ता है। खाद, सिंचाई और सुरक्षा के इन उपायों को सही ढंग से लागू करके किसान सीमित जमीन से भी बंपर कमाई कर सकते हैं।
















