बहराइच जिले में खेतों के भीतर धान की बालियां अब तेजी से पकने की दिशा में बढ़ रही हैं। इस बीच विशेष सुगंध और औषधीय गुणों से भरपूर काला नमक धान पैदा करने वाले काश्तकारों के लिए कृषि विज्ञान केंद्र की विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका सिंह ने कई उपयोगी जानकारियां साझा की हैं। बहराइच के किसानों ने पिछले एक से दो वर्षों के दौरान ही इस पारंपरिक किस्म की बुवाई में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि पैदावार हाथ में आने के बाद सही मंडी, उचित खरीददार और बाजार भाव की सटीक समझ न होने के कारण कई उत्पादक अपनी उपज बेहद कम दामों में बेचने के लिए विवश हो जाते हैं।
स्वास्थ्य के लिए वरदान और स्वाद में लाजवाब
कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़ी डॉ. प्रियंका सिंह के मुताबिक काला नमक धान की मांग आम उपभोक्ता वर्ग के बीच बहुत तेजी से बढ़ रही है। इस बढ़ती लोकप्रियता के पीछे मुख्यतः तीन प्रमुख खूबियां शामिल हैं। सबसे पहली बात यह है कि यह चावल मधुमेह के मरीजों के लिए बेहद लाभकारी और स्वास्थ्यवर्धक माना गया है। इसके अलावा इसमें एक कुदरती और मन को भाने वाली महक होती है, जो पकाने पर चारों तरफ फैल जाती है। तीसरा बड़ा कारण इसका विशिष्ट स्वाद है, जो रोजमर्रा खाए जाने वाले सामान्य चावल की तुलना में काफी उम्दा होता है। इन्हीं खूबियों के चलते घरेलू स्तर के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसकी कीमत में लगातार इजाफा दर्ज किया जा रहा है।
जानकारी की कमी से उत्पादकों को उठाना पड़ रहा भारी घाटा
सही बाजार रणनीति न होने की वजह से काश्तकारों को अपनी कड़ी मेहनत का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। फसल खलिहान से निकलते ही अधिकांश किसान पैसों की तात्कालिक जरूरत या जानकारी के अभाव में धान को 6000 रुपये से लेकर 8,000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर व्यापारियों को सौंप देते हैं। इसके विपरीत जब यही अनाज प्रसंस्कृत होकर बाजार में खुदरा स्तर पर पहुंचता है, तब यह 200 रुपये से 250 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिकता है। इस हिसाब से तैयार चावल का मूल्य 20,000 रुपये से 25,000 रुपये प्रति क्विंटल तक जा पहुंचता है। बिचौलियों के हाथों होने वाले इस भारी अंतर को अगर व्यवस्थित तरीके से खत्म किया जाए, तो किसानों की जेब में वास्तविक मुनाफा पहुंच सकता है।
मंडी की नब्ज पहचानें और सीधे उपभोक्ता तक पहुंचें
किसानों को अपनी उपज का वाजिब दाम दिलाने के लिए कृषि विशेषज्ञ ने दो बेहद अहम रणनीतियों पर अमल करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि किसानों को खुद एक सामान्य ग्राहक बनकर स्थानीय और बड़े बाजारों का दौरा करना चाहिए। जब वे खुद बाजार में जाकर यह देखेंगे कि काला नमक चावल किस भाव पर आम खरीदारों को दिया जा रहा है, तब उन्हें अपनी उपज की वास्तविक ताकत और बाजार मूल्य का सटीक अंदाजा लग सकेगा।
इसके अलावा दूसरी अहम जरूरत खरीददार और किसान के बीच की खाई को पाटने की है। जब तक बिचौलियों का दखल बना रहेगा, तब तक अधिकतम मुनाफा व्यापारियों की जेब में ही जाएगा। कृषि विशेषज्ञ के अनुसार किसान चाहें तो संबंधित सरकारी विभागों से तालमेल बैठाकर अपनी उपज की खुद ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग करा सकते हैं। अपने उत्पाद को सीधे बाजार और उपभोक्ताओं तक उतारने से बिचौलियों की निर्भरता समाप्त हो जाएगी, जिससे काश्तकारों की आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी तय है।
















