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टाटा संस में एन चंद्रशेखरन के सेवा विस्तार पर विवाद, नोएल टाटा ने बोर्ड के फैसले पर उठाई आपत्तिव्यापार
27 अक्तू॰ 2026, 10:07 am (7 घंटे पहले)· 2

टाटा संस में एन चंद्रशेखरन के सेवा विस्तार पर विवाद, नोएल टाटा ने बोर्ड के फैसले पर उठाई आपत्ति

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस के चेयरमैन पद पर एन चंद्रशेखरन की पांच साल की दोबारा नियुक्ति को अमान्य बताते हुए बोर्ड बैठक की बिना कटी वीडियो रिकॉर्डिंग मांगी है।

भारतीय उद्योग जगत के अग्रणी औद्योगिक घराने टाटा समूह के शीर्ष प्रबंधन में नेतृत्व को लेकर मतभेद खुलकर सतह पर आ गए हैं। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को पुनः पांच वर्षों का सेवा विस्तार देने के बोर्ड के फैसले को सीधे तौर पर चुनौती दी है। इस संबंध में उन्होंने टाटा संस के कंपनी सेक्रेटरी सुप्रकाश मुखोपाध्याय को औपचारिक पत्र लिखकर इस पूरी प्रक्रिया की वैधता पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। चंद्रशेखरन का वर्तमान कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होने जा रहा है, लेकिन बोर्ड ने पूर्व में ही उनके अगले कार्यकाल को मंजूरी प्रदान कर दी थी।

एजेंडे से बाहर जाकर फैसला लेने का आरोप

नोएल टाटा ने अपनी औपचारिक आपत्ति में स्पष्ट किया है कि 17 सितंबर को आयोजित टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक में चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार का मुद्दा आधिकारिक कार्यसूची में शामिल ही नहीं था। उनके अनुसार, उस बैठक का मुख्य उद्देश्य केवल नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी द्वारा पेश की गई जानकारियों और सुझावों पर विमर्श करना था। नोएल टाटा का पक्ष है कि तय नियमों और स्थापित प्रक्रिया का पालन किए बिना ही अचानक इस अहम प्रस्ताव को पारित कर दिया गया, जिससे यह फैसला पूरी तरह से अमान्य हो जाता है। प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने उस बैठक की बिना संपादन वाली वीडियो रिकॉर्डिंग भी तलब की है।

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निदेशक मंडल में मतदान और समर्थन का गणित

बैठक के दौरान जब चंद्रशेखरन को आगे भी जिम्मेदारी सौंपने का प्रस्ताव पटल पर रखा गया, तब मतदान के समय नोएल टाटा ने इसका मुखर विरोध किया था। हालांकि, बोर्ड के अन्य सदस्यों ने बड़े अंतर से इस प्रस्ताव का समर्थन किया। टाटा ट्रस्ट्स द्वारा नामित एक अन्य महत्वपूर्ण निदेशक वेणु श्रीनिवासन ने बहुमत का साथ देते हुए चंद्रशेखरन के पक्ष में अपना मत दिया। इसके अलावा अनीता जॉर्ज, हरीश मनवानी और सौरभ अग्रवाल सहित बोर्ड के तमाम अन्य निदेशकों ने भी चंद्रशेखरन के कार्यकाल को विस्तार देने के पक्ष में मतदान किया था।

आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन और हिस्सेदारी का पेंच

इस पूरे प्रशासनिक टकराव के केंद्र में टाटा संस की शेयरधारिता और उसके नियम हैं। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की लगभग दो-तिहाई हिस्सेदारी है, जो इसे समूह के भीतर असाधारण शक्तियां देती है। नोएल टाटा का तर्क है कि टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में स्पष्ट नियम तय हैं, जिसके तहत किसी भी अहम प्रस्ताव को पारित कराने के लिए टाटा ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों की सर्वसम्मत सहमति अथवा समर्थन अनिवार्य होता है। चूंकि नामित निदेशकों में से एक ने इसका विरोध किया था, इसलिए इस निर्णय की संवैधानिक वैधता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। फिलहाल इस मुद्दे पर न तो टाटा संस और न ही टाटा ट्रस्ट्स की ओर से कोई आधिकारिक सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी गई है, लेकिन इस तकरार ने समूह की आंतरिक गवर्नेंस प्रणाली को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

सवाल-जवाब

नोएल टाटा ने किस फैसले को चुनौती दी है?
उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को फरवरी 2027 के बाद अगले पांच साल के लिए दोबारा चेयरमैन नियुक्त करने के बोर्ड के फैसले का विरोध किया है।
नोएल टाटा ने इस नियुक्ति को अमान्य क्यों बताया?
उनका तर्क है कि चंद्रशेखरन के सेवा विस्तार का मुद्दा 17 सितंबर की बोर्ड बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं था और तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
बैठक में किन निदेशकों ने चंद्रशेखरन का समर्थन किया?
टाटा ट्रस्ट्स के नामित निदेशक वेणु श्रीनिवासन के साथ-साथ अनीता जॉर्ज, हरीश मनवानी और सौरभ अग्रवाल ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में कितनी हिस्सेदारी है?
टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की लगभग दो-तिहाई इक्विटी हिस्सेदारी है।
नोएल टाटा ने पत्र में क्या विशेष मांग रखी है?
उन्होंने 17 सितंबर को हुई टाटा संस बोर्ड बैठक की पूरी और बिना संपादन वाली वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने की मांग की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·5 घंटे पहले

टाटा समूह के भीतर यह खींचतान देखकर थोड़ा अजीब लग रहा है। जब नोएल टाटा ने साफ विरोध किया था और दो-तिहाई हिस्सेदारी ट्रस्ट के पास है, तो बोर्ड ने इतनी जल्दीबाजी क्यों दिखाई? क्या इस अंदरूनी कलह का असर आने वाले समय में टाटा कंपनियों के कामकाज पर भी पड़ेगा?

Rohan Gupta@rohan-gupta·6 घंटे पहले

टाटा समूह के भीतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस का ऐसा तमाशा देखना हैरान करने वाला है। जब ट्रस्ट और होल्डिंग कंपनी के बीच ही इतनी खींचतान शुरू हो जाए, तो बड़े फैसले कैसे आगे बढ़ेंगे।

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·6 घंटे पहले

रोहन भाई, खेल के मैदान पर तो रणनीति समझ आती है, पर यहाँ बोर्डरूम की लड़ाई में तो टाटा समूह के अंदर ही बड़ा पंगा हो गया है।

Ravikash Gupta@ravikash·6 घंटे पहले

अचानक एजेंडे से बाहर जाकर इतना बड़ा फैसला ले लेना थोड़ा अजीब लगता है। बोर्ड मीटिंग्स में ऐसे मामलों पर पहले से बात होनी चाहिए थी, वरना अंदरूनी कलह तो बढ़ेगी ही।

Michael Anderson@michael-anderson·6 घंटे पहले

रविकेश, आपकी बात सही है। पर क्या नोएल टाटा का ये विरोध इस बड़े घराने में आगे चलकर कोई नया कानूनी विवाद खड़ा करेगा?

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